बैंकों को चूना लगाने वाले कई सौ डिफॉल्टर हर माह भारत को बोल रहे टाटा-बाय बाय
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राष्ट्रीय बैंकों से करोड़ों रुपये का लोन लेने वाले कई सौ डिफॉल्टर हर माह भारत को टाटा बाय-बाय बोल रहे हैं। वजह, सरकार इन डिफॉल्टरों का नाम सार्वजनिक नहीं कर रही। ये इसी का फायदा उठाते हैं और आसानी से देश छोड़कर दूसरे मुल्क में चले जाते हैं। दा ऑल इंडिया बैंक ऑफ़िसर्ज कन्फेडरेशन (एआईबीओसी) का आरोप है कि बैंकों के करोड़ों रुपये डकारकर विदेश जा रहे इन लोगों का पासपोर्ट भी जब्त नहीं किया जा रहा है। इसके विपरित, सरकार बैंकों का गैर निस्पंदकारी संपतियां (एनपीए) बढ़ने की सजा बैंक अफसरों को दे रही है। एआईबीओसी का कहना है कि सरकार ने 6049 अफसरों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए जो सूची तैयार की है, उसके खिलाफ देशभर के बैंक अफसर बजट सत्र के दौरान संसद मार्च करने की तैयारी कर रहे हैं।
बैंक कन्फेडरेशन का आरोप है कि सरकार ने बैंकों का एनपीए बढ़ने का ठीकरा अफसरों के सिर पर फोड़ दिया है। कन्फेडरेशन के राष्ट्रीय महासचिव सौम्या दत्ता ने बताया कि तीन सालों में 19 राष्ट्रीयकृत बैंकों, जिनमें पीएनबी और केनरा बैंक भी शामिल हैं, का एनपीए करीब छह लाख करोड़ रुपये बढ़ गया है। सरकार इसके लिए बैंक अफसरों को दोषी ठहरा रही है, जबकि इसके पीछे बैंक बोर्ड और राजनीतिक लोग जिम्मेदार हैं। विजय माल्या जैसे लोगों को भारी-भरकम लोन देने का अधिकार बैंक अफसरों के पास नहीं होता।
ऐसे मामलों का निपटारा बैंक बोर्ड ही करता है। खास बात है कि पिछले तीन साल से बैंक बोर्ड में अफसरों का एक भी प्रतिनिधि नियुक्त नहीं किया गया है। सरकार को डर है कि कहीं इनका प्रतिनिधि बैठक में आ गया तो उनके गलत कामों की पोल खुल जाएगी। इसके लिए एआईबीओसी ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका भी लगाई है।
हर राज्य से करीब सौ लोग विदेश भाग रहे हैं
सौम्या दत्ता के मुताबिक, बड़ा लोन चुकता न करने वाले हजारों डिफॉल्टर देश छोड़ रहे हैं। हर राज्य से करीब सौ-सौ डिफॉल्टर विदेश भाग रहे हैं या भागने की फिराक में हैं। सरकार इनके खिलाफ कुछ नहीं कर रही है। हम कई बार यह मांग कर चुके हैं कि सरकार ऐसे डिफॉल्टरों का नाम सार्वजनिक करे और साथ ही उनका पासपोर्ट भी जब्त कर लिया जाए। इन डिफॉल्टरों में 75 फीसदी कॉरपोरेट जगत के लोग हैं।
सरकार ने कदम पीछे नहीं हटाया तो होगा संसद मार्च
देशभर में कन्फेडरेशन के 3.20 लाख सदस्य हैं। एआईबीओसी का कहना है कि सरकार ने बैंक अफसरों के खिलाफ कार्रवाई का फैसला वापस नहीं लिया तो बैंक अधिकारी संसद मार्च करने के लिए मजबूर होंगे। चार जनवरी को एआईबीओसी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हो रही है। इसमें बजट सत्र के दौरान संसद मार्च करने का प्रस्ताव पेश होगा। चूंकि सभी बैंक अधिकारी सरकार के इस तुगलकी फरमान के खिलाफ हैं, इसलिए संसद मार्च की योजना को आसानी से मंजूरी मिल जाएगी।