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प्रदुषित हो रही है गंगा: कपड़ों से नदी में पहुंच रहा भारी मात्रा में माइक्रोप्लास्टिक, वैज्ञानिकों का खुलासा

Fri, 29 Sep 2023 05:51 AM IST
जलज मिश्रा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Fri, 29 Sep 2023 05:51 AM IST
सार

साइंस ऑफ द टोटल एनवायरमेंट में प्रकाशित अध्ययन में एक प्रमुख नदी प्रणाली के आसपास पानी, तलछट और हवा में माइक्रोप्लास्टिक का पहला विश्लेषण किया गया है।

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Huge amount of microplastic is reaching the river ganga through clothes
Ganga - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कपड़ों के रेशे गंगा नदी में माइक्रोप्लास्टिक का प्रमुख स्रोत हैं, जो वायुमंडलीय जमाव, अपशिष्ट जल और कपड़े धोने जैसे प्रत्यक्ष कारणों से आते हैं। एक अध्ययन से पता चला है कि हवा के माध्यम से फैल रहे भारी मात्रा में माइक्रोप्लास्टिक के कण नदी के तलछट में फंस रहे हैं।

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साइंस ऑफ द टोटल एनवायरमेंट में प्रकाशित अध्ययन में एक प्रमुख नदी प्रणाली के आसपास पानी, तलछट और हवा में माइक्रोप्लास्टिक का पहला विश्लेषण किया गया है। यह अध्ययन नेशनल ज्योग्राफिक सोसाइटी लंदन के वैज्ञानिकों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम की ओर से एकत्र किए गए नमूनों का उपयोग करके किया गया है, जिसमें भारतीय वैज्ञानिक भी शामिल थे। गंगा नदी की लंबाई के साथ किए गए शोध में वायुमंडल से प्रति वर्ग मीटर, प्रति दिन औसतन 41 माइक्रोप्लास्टिक कण पाए गए। इसके अलावा नदी तल से तलछट में प्रति किलो औसतन 57 कण और साथ ही प्रत्येक 20 लीटर पानी में एक कण पाया गया।

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समुद्री प्रदूषण के लिए भी जिम्मेदार
अध्ययन के अनुसार, पानी में अघुलनशील माइक्रोप्लास्टिक नदियों के साथ समुद्री प्रदूषण के एक प्रमुख स्रोत के रूप में माना जाता है। नदी के किनारे कई शहरों से अनुपचारित सीवेज, अपशिष्ट और गैर-अपघटनीय प्लास्टिक में लिपटे धार्मिक चढ़ावा भी नदी में प्रदूषकों का ढेर लगाते हैं। ये धीरे-धीरे सूक्ष्म कणों में टूट जाते हैं, जिसे नदी समुद्र में पहुंचाती है।

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बिना जले शव भी कारण
गंगा बेसिन पृथ्वी पर सबसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में से एक है। नदी में डाला गया अंतिम संस्कार की चिताओं से आंशिक रूप से जले अवशेष और जानवरों के शव सभी गंगा को प्रदूषित करने की वजह हैं।

कुछ नमूनों में 99 फीसदी तक माइक्रोप्लास्टिक
कणों की समग्र प्रचुरता को उजागर करने के अलावा विश्लेषण किए गए कुछ नमूनों में पाए गए 99 फीसदी माइक्रोप्लास्टिक थे, जो कपड़ों के रेशों या फाइबर के जरिए नदी में आए थे। इनमें ऐक्रेलिक और पॉलिएस्टर के अलावा रेयान प्रमुख पॉलीमर था। कुछ नमूनों में 82 फीसदी फाइबर पाए गए। इन फाइबर का रंग प्रमुख तौर पर नीला था। अध्ययन के अनुसार तलछट के नमूनों में अक्सर पानी और हवा में पाए जाने वाले कणों की तुलना में माइक्रोप्लास्टिक के अधिक कण होते हैं। इसलिए उच्च घनत्व के कारण हवा और पानी के नमूनों में माइक्रोप्लास्टिक की मात्रा अधिक पाई जाती है।

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