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भगवान की सालाना आय 2600 करोड़! अमीरी की पौराणिक वजह
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भगवान वेंकटेश्वर को समर्पित तिरुमला तिरुपति मंदिर भारत के सबसे पवित्र मंदिरों में से एक है। यहां सोने के चढ़ावे को लेकर अक्सर खबरें आती रहती हैं। मंदिर में रोजाना औसतन एक लाख से अधिक श्रद्धालु न केवल प्रार्थना करते हैं, बल्कि दिल खोलकर दान भी देते हैं।
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मंदिर की दानपेटियों में लाखों रुपए तो पड़ते ही हैं, जेवरात चढ़ाने वालों की भी कमी नहीं है। खास बात ये है कि यहां श्रद्धालु जमकर सोना दान देते हैं और शायद यही वजह है कि तिरुपति मंदिर देश का सबसे अमीर मंदिर है।
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मन में सवाल उठता है कि लोग यहां नकदी और सोना क्यों दान करते हैं? प्राचीन मान्यता है कि भगवान वेंकटेश्वर जब पद्मावती से अपना विवाह रचा रहे थे तो उन्हें पैसे की कमी पड़ी गई, इसलिए वो धन के देवता कुबेर के पास गए और उनसे एक करोड़ रुपए और एक करोड़ सोने की गिन्नियां मांगी। मान्यता है कि भगवान वेंकटेश्वर पर अब भी वो कर्ज है और श्रद्धालु इस कर्ज का ब्याज चुकाने में उनकी मदद करने के लिए दिल खोलकर दान देते हैं।
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बेशक, दिल खोलकर दान देने के पीछे ये विश्वास भी है कि जितना वो दान देंगे, इसका कई गुना उनकी झोली में वापस आएगा। इसीलिए मंदिर परिसर के चारों ओर, बड़े-बड़े दान बक्से रखे गए हैं, जिन्हें हुंडी कहा जाता है- जहां श्रद्धालु अपनी इच्छा के मुताबिक जो चाहे दान करते हैं। दान में सिक्कों के अलावा, कीमती पत्थर, चांदी, सोना शामिल है। कुछ श्रद्धालु तो कंपनियों के शेयर और प्रॉपर्टी के कागज तक दान में दे देते हैं।
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जब मंदिर को शेयरों के दस्तावेज दानपेटियों में मिले तो मंदिर ने एक डीमैट खाता ही खोल दिया। स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया में खोले गए इस डीमैट खाते का नंबर 1601010000384828 है। ये डीमैट खाता भगवान बालाजी के नाम पर खोला गया है और श्रद्धालु भगवान को शेयर भी दान में दे सकते हैं।
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