मुंबई हमला: फांसी के फंदे तक कैसे पहुंचा कसाब? जानें आतंकी के खाने-पीने पर हुए खर्च पर क्यों मचा था बवाल
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विस्तार
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में हुए 26/11 आतंकी हमले को 15 साल हो गए। पाकिस्तानी शहर कराची से आए लश्कर के 10 आतंकियों ने सोची समझी साजिश के तहत मुंबई स्थित यहूदी गेस्ट-हाउस नरीमन हाउस, सीएसटी, ताज होटल, ट्राईटेंड, लियोपोल्ड कैफे में आतंक मचाया था। इस आतंकी हमले में 166 लोग मारे गए थे।
इस हमले में शामिल रहे 10 आतंकियों में से नौ को मौके पर ही मार गिराया गया था, जबकि आतंकी अजमल कसाब को जिंदा पकड़ा गया था। चार सालों तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद 2012 में कसाब को फांसी पर लटकाया गया था। हालांकि, इस दौरान कसाब के खाने पीने और सुरक्षा में किए खर्चों को लेकर महाराष्ट्र और केंद्र सरकार में तनातनी भी हुई थी। आइये जानते हैं कि आतंकी कसाब फांसी के फंदे तक कैसे पहुंचा था?
26 नवंबर 2008 : अजमल कसाब और नौ आतंकियों ने मुंबई पर हमला किया, जिसमें 166 लोगों की मौत हो गई ।
27 नवंबर 2008 : हमलावरो में एक मात्र जिंदा बचा आतंकी आमिर अजमल कसाब गिरफ्तार किया गया।
30 नवंबर 2008 : कसाब ने पुलिस के सामने अपना गुनाह कुबूल किया।
27/28 दिसंबर 2008 : कसाब की आइडेंटीफिकेशन परेड कराई गई।
13 जनवरी 2009 : एमएल तहलियानी को 26/11 मामले में विशेष जज नियुक्त किया गया।
16 जनवरी 2009 : ऑर्थर रोड जेल को कसाब का ट्रायल के लिए चुना गया।
22 फरवरी 2009 : उज्ज्वल निकम को सरकारी वकील नियुक्त किया गया।
25 फरवरी 2009 : मेट्रोपॉलिटिन कोर्ट में कसाब के खिलाफ चार्जशीट दायर।
1 अप्रैल 2009 : स्पेशल कोर्ट ने अंजलि वाघमारे को कसाब का वकील नियुक्त किया।
20 अप्रैल 2009 : अभियोजन पक्ष ने कसाब को आरोपी बनाया।
29 अप्रैल 2009 : विशेषज्ञों की राय पर अदालत ने फैसला सुनाया कि कसाब नाबालिग नहीं है।
6 मई 2009 : मामले में आरोप तय किए गए। कसाब पर 86 आरोप तय।
23 जून 2009 : हाफिज सईद, जकी-उर-रहमान लखवी समेत 22 लोगों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए गए।
16 दिसंबर 2009 : अभियोजन पक्ष ने 26/11 के मामले में बहस पूरी की।
9 मार्च 2010 : अंतिम बहस शुरू।
31 मार्च 2010 : फैसला 3 मई के लिए सुरक्षित रखा गया।
3 मई 2010 : कोर्ट ने कसाब को मुंबई हमले का दोषी ठहराया। सबाउद्दीन अहमद और फहीम अंसारी आरोपों से बरी।
6 मई 2010 : कसाब को विशेष अदालत ने मौत की सजा सुनाई।
18 अक्तूबर 2010 : बॉम्बे हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई शुरू। कसाब की वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए पेशी।
25 नवंबर 2010 : कसाब के वकील अमीन सोलकर ने बहस शुरू की। निचली अदालत की कार्यवाही को गलत ठहराते हुए 26/11 मामले पर दोबारा ट्रायल की माग की।
13 दिसंबर 2010 : कसाब ने खुद के किशोर होने की दलील देते हुए अदालत से अपनी मानसिक हालत के लिए चिकित्सा विशेषज्ञों के एक पैनल नियुक्ति करने का आग्रह किया।
14 दिसंबर 2010 : अदालत ने कसाब की माग को खारिज कर दिया।
21 फरवरी 2011 : बॉम्बे हाईकोर्ट ने कसाब पर निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया और उसकी अपील खारिज कर दी।
29 जुलाई 2011 : कसाब ने फांसी की सजा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की।
10 अक्तूबर 2011 : सुप्रीम कोर्ट ने कसाब की फांसी की सजा पर रोक लगाई थी।
31 जनवरी 2012 : सुप्रीम कोर्ट में शुरू हुई मामले की सुनवाई। कसाब का पक्ष रखने के लिए वरिष्ठ वकील राजू रामचंद्रन को एमिकस-क्यूरी नियुक्त किया गया।
25 अप्रैल 2012 : कसाब की अपील पर कोर्ट ने सुनवाई पूरी की और फैसला सुरक्षित रखा।
28 अगस्त 2012: मुंबई हमले के दोषी आमिर अजमल कसाब को फांसी की सजा को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा।
21 नवंबर 2012 : राष्ट्रपति ने कसाब की दया याचिका खारिज कर दी और उसे फांसी दे दी गई।
ऑपरेशन एक्स दिया था कोड
कसाब को फांसी देने की प्रक्रिया बेहद गोपनीय रखी गई थी। इसका कोड ऑपरेशन एक्स रखा गया था। इस ऑपरेशन की जानकारी राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, गृहसचिव, आईबी चीफ सहित केवल छह लोगों को थी। फांसी के तुरंत बाद महाराष्ट्र के तत्कालीन गृह मंत्री आरआर पाटिल को इसकी सूचना दी गई। उन्हें मैसेज किया गया-ऑपरेशन एक्स सक्सेजफुली एक्जक्यूटेड।
जेल में ही दफनाया गया
कसाब का शव को यरवदा जेल परिसर में ही दफनाया गया। कसाब को फांसी दिए जाने की सूचना पाकिस्तान को भेजी गई थी। हालांकि, पाकिस्तान ने अधिकारिक तौर पर खत लेने से इनकार कर दिया। जिसके बाद उन्हें फैक्स के जरिए सूचना भेजी गई।
मुंबई पर हुए आतंकी हमले में पकड़े गये जिंदा आरोपी अजमल कसाब को फांसी के फंदे तक पहुंचाने में चार साल लग गए थे। दावा किया गया था कि कसाब की सुरक्षा, खान-पान, इलाज और अन्य सुविधाओं पर केंद्र और महाराष्ट्र सरकार ने करीब 29.5 करोड़ रुपये खर्च किए। नवंबर 2008 में कसाब की गिरफ्तारी के बाद आर्थर रोड जेल में आईटीबीपी के 250 से ज्यादा सुरक्षा गार्ड उसकी सुरक्षा के लिए तैनात किए गए थे। इस पर करीब 26 करोड़ रुपये का खर्च हुआ।
महाराष्ट्र सरकार ने कसाब पर 3.47 करोड़ रुपये खर्च किए थे, जिसमें खाने पर 42 हजार 313 रुपये, सुरक्षा पर एक करोड़ 46 लाख 81 हजार 794 रुपये, दवाइयों पर 39,829 रुपये और कपड़ों पर 1,878 रुपये का खर्च आया था।
राज्य सरकार ने दो करोड़ रुपये की लागत से आर्थर रोड जेल में बुलेट और बम प्रूफ सेल भी तैयार किया था। यह सेल एक सुरंग के जरिए विशेष रूप से तैयार कोर्ट से जुड़ा हुआ था। डॉक्टर खुद ही आर्थर रोड जेल जाकर कसाब की सेहत का जायजा लेते रहते थे। चार साल में 25 से ज्यादा डॉक्टरों ने कसाब का इलाज किया था।