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बड़ी चुनौती: शहर प्यारा पर पानी खारा, साफ कैसे मिले?

Fri, 20 Jan 2017 04:03 AM IST
सुशील पांडेय/अमर उजाला, दिल्ली
सुशील पांडेय/अमर उजाला, दिल्ली Updated Fri, 20 Jan 2017 04:03 AM IST
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How people will get drinking water in hightech city
Water Tap

यूपी के बेहतर शहर नोएडा से एनसीआर के लिहाज से भी काफी उम्मीदें हैं, जो कि पानी के खारेपन के चलते विकास में रुकावट हैं। 

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भल ही यहां ऊंची-ऊंची इमारतें लगातार खड़ी होती जा रही हैं, लेकिन यहां रहने वालों के लिए पानी का खारापन सबसे बड़ी समस्या है। यहां के जल में कैल्शियम और मैगनेशियम की मात्रा मानक से ज्यादा है। इस वजह से पानी खारा है। उसे पीने लायक बनाने के लिए गंगाजल मिलाया जाता है।
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सेक्टर-26 में रहने वाले वरिष्ठ साहित्यकार श्याम विमल बताते हैं कि यहां के जलस्तर की हालत बेहद खराब है। पानी का प्रेशर भी ठीक नहीं है। पहले तल पर पानी चढ़ ही नहीं पाता। कई बार पाइपलाइन फटने की बात आती है, जिससे कई दिन तक पानी नहीं आता। पानी माफिया का भी यहां दखल है।
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वहीं, नेफोमा के चेयरमैन अन्नू खान का भी कहना है कि निवासियों के पानी की शिकायत पर प्राधिकरण ध्यान नहीं देता। यही नहीं पानी इतना गंदा आता है कि वह पीने लायक नहीं होता। कई बार यह पानी बालों के लिए भी नुकसानदायक साबित हुआ है।

ऐसी शिकायतें कई सेक्टरों सेआई हैं। जहां नए प्रोजेक्ट चल रहे हैं। वहां गंगाजल की आपूर्ति नहीं होती। इसकी बड़ी वजह कनेक्शन का नहीं होना है। बिल्डर किसी तरह से वहां पानी की व्यवस्था करते हैं। निवासियों की शिकायत पर प्राधिकरण के सीनियर प्रोजेक्ट इंजीनियर (जल) समाकांत श्रीवास्तव का दावा है कि नोएडा के पास 570 एमएलडी पानी सप्लाई के लिए उपलब्ध है। वहीं पानी की मांग इससे काफी कम केवल 250 एमएलडी ही है।

वहीं 240 मिलियन लिटर गंगाजल भी यहां लाया जाता है ताकि उसे ग्राउंड वाटर में मिक्स किया जा सके और खारे पानी को मीठा बनाया जा सके। यहां 350 ट्यूबवेल और 10 रेनीवेल लगातार काम करते रहते हैं। केंद्र सरकार की एक एजेंसी के सर्वे के बाद ग्राउंड वाटर में 56 प्रतिशत गंगाजल मिक्स कर आपूर्ति करने का प्रस्ताव दिया गया था, जिसे अब 71 प्रतिशत तक बढ़ाया जा रहा है। हालांकि 2021 के मास्टर प्लान में यह अनुपात 60 और 40 का है।

पानी के अवैध पैकेजिंग के रोक पर प्राधिकरण एक्शन लेता है। लेकिन केवल उन्हीं स्थानों पर एक्शन लिया जाता है, जो प्राधिकरण की जद में है। ग्रामीण इलाकों में जिला प्रशासन का रोल अहम हो जाता है। जल विभाग की ओर से वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट और ग्राउंड वाटर के स्तर को बनाए रखने के लिए भी कवायद की जाती है। प्राधिकरण का दावा है कि नोएडा के निवासियों को अगले कई वर्षों तक पानी की समस्या नहीं होगी।

जल विभाग के आंकड़े

How people will get drinking water in hightech city
-एक आदमी को की जाने वाली जलापूर्ति-150 लिटर प्रतिदिन

-औद्योगिक सेक्टर में जलापूर्ति-45 किलोलीटर प्रति हेक्टेयर प्रतिदिन

-वर्तमान मांग-250 मिलियन लीटर प्रति दिन

-नोएडा में टयूबवेल की संख्या-350

-रेनीवेल की संख्या-10

-यूजीआर की संख्या-77

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