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जानिए मोदी सरकार ने कैसे की 'सर्जिकल स्ट्राइक' की प्लानिंग
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 03 Oct 2016 04:09 PM IST
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- फोटो : Getty Images file
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'भारत न तो भूलेगा और न ही माफ करेगा..', प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उड़ी हमले के बाद केरल से पाकिस्तान को यही संदेश दिया था। यह केवल जुमला भर नहीं था, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इससे पहले ही एलओसी के पार पीओके में पाकिस्तानी आतंकियों के लॉन्च पैड पर हमले की अनुमति दे चुके थे।
पाकिस्तान को सबक सिखाने के फैसले से रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को 23 सितंबर को बताया गया और इसके अगले दिन मिशन को अंजाम देने की तैयारी शुरू हो गई। अंग्रेजी अखबार हिंदुस्तान टाइम्स ने इस आशय की खबर प्रकाशित की है।
यह कोई जल्दबाजी में लिया गया निर्णय नहीं था। आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई के निर्णय से पहले कूटनीतिक रास्ते को चुना गया। 18 सितंबर को उड़ी में आर्मी के सैन्य ठिकाने पर हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अजीत डोभाल से आतंकियों के बारे में जानकारी मांगी कि हमलावर कैसे ब्रिगेड हेडक्वार्टर में घुस गए।
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उड़ी हमले में मारे गए चार आतंकियों के पास से जीपीएस सेट मिला था और इससे पाकिस्तान का कनेक्शन साबित हुआ। इसके अलावा उड़ी के ग्रामीणों ने दो गाइडों को पकड़ा था, जिनसे पूछताछ में इसकी पुष्टि हुई।
21 सितंबर को दिल्ली में पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित को समन किया गया और विरोध स्वरुप उन्हें हमले में पाकिस्तान समर्थित आतंकियों का हाथ होने के सबूत सौंपे गए। इसके जवाब में पाकिस्तान ने इनकार का रास्ता चुना और संयुक्त राष्ट्र संघ में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने अपने संबोधन में एक बार फिर कश्मीर राग छेड़ा।
यह निर्णायक प्वाइंट था, जब सैन्य कार्रवाई का आइडिया मूर्त रूप लेने लगा।
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पाकिस्तान को सबक सिखाने के फैसले से रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को 23 सितंबर को बताया गया और इसके अगले दिन मिशन को अंजाम देने की तैयारी शुरू हो गई। अंग्रेजी अखबार हिंदुस्तान टाइम्स ने इस आशय की खबर प्रकाशित की है।
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यह कोई जल्दबाजी में लिया गया निर्णय नहीं था। आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई के निर्णय से पहले कूटनीतिक रास्ते को चुना गया। 18 सितंबर को उड़ी में आर्मी के सैन्य ठिकाने पर हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अजीत डोभाल से आतंकियों के बारे में जानकारी मांगी कि हमलावर कैसे ब्रिगेड हेडक्वार्टर में घुस गए।
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उड़ी हमले में मारे गए चार आतंकियों के पास से जीपीएस सेट मिला था और इससे पाकिस्तान का कनेक्शन साबित हुआ। इसके अलावा उड़ी के ग्रामीणों ने दो गाइडों को पकड़ा था, जिनसे पूछताछ में इसकी पुष्टि हुई।
21 सितंबर को दिल्ली में पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित को समन किया गया और विरोध स्वरुप उन्हें हमले में पाकिस्तान समर्थित आतंकियों का हाथ होने के सबूत सौंपे गए। इसके जवाब में पाकिस्तान ने इनकार का रास्ता चुना और संयुक्त राष्ट्र संघ में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने अपने संबोधन में एक बार फिर कश्मीर राग छेड़ा।
यह निर्णायक प्वाइंट था, जब सैन्य कार्रवाई का आइडिया मूर्त रूप लेने लगा।
रणनीतिकारों को मिली रियल टाइम तस्वीरें
22 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर और डोभाल को सैन्य ऑपरेशन के डायरेक्टर जनरल रणबीर सिंह ने एलओसी पर हमले और पाकिस्तानी सेना के रूख के संदर्भ में जानकारी दी। रक्षा मंत्रालय के वॉर रूम में हुई इस बैठक में आर्मी चीफ जनरल दलबीर सिंह भी मौजूद रहे। हालांकि इस समय तक पाकिस्तान ने अपने सभी राडार एक्टिव कर दिए और एलओसी पर उसकी सेनाएं अलर्ट हो गई थी।
सेना के तीनों प्रमुखों संग बैठक के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की ओर से सुझाए गए विकल्प पर विचार के बाद सर्जिकल स्ट्राइक के लिए 23 सितंबर का दिन चुना गया। अंतिम फैसला हो जाने के बाद डोभाल, आर्मी चीफ दलबीर सिंह और अन्य दूसरे रणनीतिकारों ने अपने मोबाइल फोन नष्ट कर दिए। अब सारी बातचीत अति सुरक्षित लाइनों के जरिए डायरेक्ट थी। पाकिस्तान की पॉलिटिकल लीडरशिप, पीओके के इंचार्ज यानी रावलपिंडी स्थित X कॉर्प्स, उत्तरी इलाकों के कमांडरों और आर्मी पर लगातार नजर रखी जा रही थी। अब जबकि स्ट्राइक की योजना को अंजाम देना था, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कुछ बैठकें की।
आर्मी चीफ दलबीर सिंह ने नॉदर्न आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट डीएस हुड्डा को 1, 4 और 9 पैराट्रूप्स के जवानों को कार्रवाई के लिए तैयार करने को कहा। 24 सितंबर को आर्मी की तैयारियां शुरू हो गई।
इस बीच नेशनल टेक्निकल रिसर्च ऑर्गेनॉइजेशन (एनटीआरओ) ने जीपीएस का प्रयोग कर टारगेट एरिया पर नजर रखने के लिए सैटेलाइट सेट कर दिए। इसके माध्यम से सैनिकों के हेलमेट पर लगे कैमरों के जरिए दिल्ली को रियल टाइम तस्वीरें हासिल हुई। इस पूरी कार्रवाई का रियल टाइम वीडियो भी सेना के पास मौजूद है, जिसे अभी पब्लिक नहीं किया गया है।
सेना के तीनों प्रमुखों संग बैठक के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की ओर से सुझाए गए विकल्प पर विचार के बाद सर्जिकल स्ट्राइक के लिए 23 सितंबर का दिन चुना गया। अंतिम फैसला हो जाने के बाद डोभाल, आर्मी चीफ दलबीर सिंह और अन्य दूसरे रणनीतिकारों ने अपने मोबाइल फोन नष्ट कर दिए। अब सारी बातचीत अति सुरक्षित लाइनों के जरिए डायरेक्ट थी। पाकिस्तान की पॉलिटिकल लीडरशिप, पीओके के इंचार्ज यानी रावलपिंडी स्थित X कॉर्प्स, उत्तरी इलाकों के कमांडरों और आर्मी पर लगातार नजर रखी जा रही थी। अब जबकि स्ट्राइक की योजना को अंजाम देना था, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कुछ बैठकें की।
आर्मी चीफ दलबीर सिंह ने नॉदर्न आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट डीएस हुड्डा को 1, 4 और 9 पैराट्रूप्स के जवानों को कार्रवाई के लिए तैयार करने को कहा। 24 सितंबर को आर्मी की तैयारियां शुरू हो गई।
इस बीच नेशनल टेक्निकल रिसर्च ऑर्गेनॉइजेशन (एनटीआरओ) ने जीपीएस का प्रयोग कर टारगेट एरिया पर नजर रखने के लिए सैटेलाइट सेट कर दिए। इसके माध्यम से सैनिकों के हेलमेट पर लगे कैमरों के जरिए दिल्ली को रियल टाइम तस्वीरें हासिल हुई। इस पूरी कार्रवाई का रियल टाइम वीडियो भी सेना के पास मौजूद है, जिसे अभी पब्लिक नहीं किया गया है।
30 टीमों के पास अलग-अलग टारगेट
एलओसी पर पाकिस्तान के राडारों की सक्रियता को देखते हुए हेलिकॉप्टर से सैनिकों को उतारने की योजना को रद्द कर दिया गया। स्पेशल फोर्सेस के जवान नाइट विजन डिवाइस, टेवर 21 और एके-47 असाल्ट राइफल्स, रॉकेट संचालित ग्रेनेड, कंधे से फायर की जाने वाली मिसाइलें, हेक्लर और कोच पिस्टल, अति ज्वलनशील ग्रेनेड और प्लास्टिक विस्फोटक के साथ पैदल एलओसी पार कर गए। सेना की कुल 30 टीमों के पास अलग-अलग टारगेट थे।
एक ओर सेना के कमांडर अपने जवानों को तैयार कर रहे थे, दूसरी ओर डोभाल ने तीनों सेना प्रमुखों, विदेश सचिव, दो खुफिया प्रमुख, एनटीआरओ चीफ और डीजीएमओ के साथ तीन बैठकें की। इस बैठक के लिए कोई भी यूनिफॉर्म में नहीं पहुंचा। बिना पहचान वाली कारें उपयोग में ली गई और दिल्ली के पास अज्ञात लोकेशन पर बैठक हुई। डोभाल ने बैठक में पाकिस्तान की ओर से जवाबी हमले की स्थिति में भारत के विकल्पों पर विचार किया।
हालांकि इसमें कोई आश्चर्य नहीं है कि जम्मू कश्मीर और पंजाब में सीमा से सटे गांवों को खाली कराने का काम 27 सितंबर को रात 10 बजे ही शुरू हो गया था, ठीक एक घंटे पहले जब भारतीय सैनिक एलओसी के पार चले गए।
अगले दिन स्पेशल फोर्स के जवान एलओसी के पार अपने लक्ष्य की ओर सरकते गए। योजना के मुताबिक सभी टीमों को एक ही साथ हमला करना था, ताकि आतंकी समूहों को एक दूसरे की मदद करने का मौका न मिल सके। मोर्टार और मशीन गन के जरिए सेना ने पाकिस्तानी सैनिकों को उलझाए रखा और स्पेशल फोर्स के जवान बिना किसी रूकावट के अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते चले गए।
एक ओर सेना के कमांडर अपने जवानों को तैयार कर रहे थे, दूसरी ओर डोभाल ने तीनों सेना प्रमुखों, विदेश सचिव, दो खुफिया प्रमुख, एनटीआरओ चीफ और डीजीएमओ के साथ तीन बैठकें की। इस बैठक के लिए कोई भी यूनिफॉर्म में नहीं पहुंचा। बिना पहचान वाली कारें उपयोग में ली गई और दिल्ली के पास अज्ञात लोकेशन पर बैठक हुई। डोभाल ने बैठक में पाकिस्तान की ओर से जवाबी हमले की स्थिति में भारत के विकल्पों पर विचार किया।
हालांकि इसमें कोई आश्चर्य नहीं है कि जम्मू कश्मीर और पंजाब में सीमा से सटे गांवों को खाली कराने का काम 27 सितंबर को रात 10 बजे ही शुरू हो गया था, ठीक एक घंटे पहले जब भारतीय सैनिक एलओसी के पार चले गए।
अगले दिन स्पेशल फोर्स के जवान एलओसी के पार अपने लक्ष्य की ओर सरकते गए। योजना के मुताबिक सभी टीमों को एक ही साथ हमला करना था, ताकि आतंकी समूहों को एक दूसरे की मदद करने का मौका न मिल सके। मोर्टार और मशीन गन के जरिए सेना ने पाकिस्तानी सैनिकों को उलझाए रखा और स्पेशल फोर्स के जवान बिना किसी रूकावट के अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते चले गए।
उड़ी का बदला ले लिया गया
एलओसी के ठिकानों पर सेना के स्नाइपर्स ने आतंकियों और उनके चौकीदारों का काम खत्म कर दिया। इसके बाद पूरी टीम ने अपना काम पूरा किया। 28 सितंबर की अगली सुबह सभी टीम 9 बजे तक अपने बेस पर वापस आ चुकी थी, सेना का चौंकाने वाला अभियान पूरा हो चुका था और इसके जवाब में एक गोली भी नहीं चली।
दूसरी ओर जब ऑपरेशन चल ही रहा था, राष्ट्रीय सुरक्षा सुलाह कार अजीत डोभाल के पास अमेरिकी समकक्ष सुसन राइस की ओर से फोन आया। राइस ने अमेरिका की ओर से आतंक के खिलाफ भारत की मदद का प्रस्ताव दिया, लेकिन मोदी सरकार ने इस बातचीत को पूरी तरह सीक्रेट रखा।
पूरे ऑपरेशन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सेना प्रमुख, डीजीएमओ, खुफिया प्रमुख, नॉदर्न आर्मी कमांडर और उनके दो कॉर्प्स कमांडर जगे रहे और जुड़े रहे। जवानों के लौटने के बाद डोभाल के नेतृत्व में मिशन के रणनीतिकार प्रधानमंत्री मोदी से मिले और उन्हें जानकारी दी।
स्पेशल फोर्स के जवानों ने आतंकियों के 6 ठिकानों को तबाह करने के साथ विभिन्न इलाकों में 45 आतंकियों को मारा। उड़ी का बदला ले लिया गया था।
ऑपरेशन के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमिटी (सीसीएस) की बैठक बुलाई और डीजीएमओ रणबीर सिंह ने अपने पाकिस्तानी समकक्ष को स्ट्राइक के बारे में जानकारी दी। सीसीएस की बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को इस बारे में जानकारी दी। उसी दिन ऑल पार्टी मीटिंग में विपक्ष के नेताओं को इस बारे में अवगत कराया गया, जबकि विदेशमंत्री सुषमा स्वराज ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को इस बारे में जानकारी दी।
दूसरी ओर जब ऑपरेशन चल ही रहा था, राष्ट्रीय सुरक्षा सुलाह कार अजीत डोभाल के पास अमेरिकी समकक्ष सुसन राइस की ओर से फोन आया। राइस ने अमेरिका की ओर से आतंक के खिलाफ भारत की मदद का प्रस्ताव दिया, लेकिन मोदी सरकार ने इस बातचीत को पूरी तरह सीक्रेट रखा।
पूरे ऑपरेशन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सेना प्रमुख, डीजीएमओ, खुफिया प्रमुख, नॉदर्न आर्मी कमांडर और उनके दो कॉर्प्स कमांडर जगे रहे और जुड़े रहे। जवानों के लौटने के बाद डोभाल के नेतृत्व में मिशन के रणनीतिकार प्रधानमंत्री मोदी से मिले और उन्हें जानकारी दी।
स्पेशल फोर्स के जवानों ने आतंकियों के 6 ठिकानों को तबाह करने के साथ विभिन्न इलाकों में 45 आतंकियों को मारा। उड़ी का बदला ले लिया गया था।
ऑपरेशन के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमिटी (सीसीएस) की बैठक बुलाई और डीजीएमओ रणबीर सिंह ने अपने पाकिस्तानी समकक्ष को स्ट्राइक के बारे में जानकारी दी। सीसीएस की बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को इस बारे में जानकारी दी। उसी दिन ऑल पार्टी मीटिंग में विपक्ष के नेताओं को इस बारे में अवगत कराया गया, जबकि विदेशमंत्री सुषमा स्वराज ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को इस बारे में जानकारी दी।