कैसे होती है भारत के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति, जानिए सबकुछ
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भारत का मुख्य न्यायाधीश कौन हो यह इन दिनों केंद्र सरकार से लेकर कानूनी जमात में चर्चा का विषय बना हुआ है। सर्वोच्च न्यायालय में इन दिनों चर्चा का गर्म है कि अक्टूबर 2018 में जब चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा सेवानिवृत्त होंगे, तब जस्टिस रंजन गोगोई उनकी जगह लेंगे। लेकिन अब जब केंद्र सरकार ने खुद सीजेआई से पत्र लिखकर उत्तराधिकारी के बारे में पूछा है तो क्या सचमुच अब गोगोई को वह अपने उत्तराधिकारी के रूप में पेश करेंगे।
बता दें कि जस्टिस गोगोई सुप्रीम कोर्ट के उन चार जजों में शामिल रहे हैं, जिन्होंने जनवरी 2018 में प्रेस कांफ्रेंस कर सुप्रीम कोर्ट के कामकाज के तरीके और न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सवाल उठाए थे।
उस प्रेस कांफ्रेंस में शामिल होने पर न सिर्फ चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, बल्कि केंद्र सरकार भी उन चारों न्यायाधीशों के खिलाफ नाराजगी जताई थी और इसका खुलासा केंद्रीय कानून और आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद की प्रेस कांफ्रेंस में सामने आई थी। लेकिन अब सवाल ये उठ रहा है कि कौन होगा अगला मुख्य न्यायाधीश, क्या न्यायाधीश मिश्रा न्यायाधीश गोगोई बनाएंगे अपना उत्तराधिकारी।
कैसे नियुक्त होता है सीजेआई
भारत के संविधान में इस बात का ब्योरा नहीं मिलता है कि देश के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति कैसे की जानी चाहिए या कैसे की जा सकती है। अनुच्छेद 124 (1) कहता है कि भारत का एक सुप्रीम कोर्ट होगा, जिसमें भारत का एक मुख्य न्यायाधीश होगा। लेकिन इस अनुच्छेद में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया की योग्यता और उसकी नियुक्ति क्या होगी इसपर कोई विस्तार से चर्चा नहीं की गई है। वहीं अनुच्छेद 126 में कार्यकारी सीजेआई की नियुक्ति के बारे में जिक्र जरूर मिलता है।
मुख्य न्यायाधीश बनने की प्रक्रिया
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) की नियुक्ति को लेकर संवैधानिक प्रावधान न होने की वजह से ही सर्वोच्च पद की नियुक्ति के लिए अभी तक पिछली परंपराओं का सहारा ही लिया जा रहा है। जिसके तहत जब मौजूदा सीजेआई रिटायर होंगे (सुप्रीम कोर्ट के सभी जज 65 साल की उम्र में रिटायर होते हैं), तो सुप्रीम कोर्ट के सबसे वरिष्ठ जज बतौर मुख्य न्यायाधीश उनकी जगह लेंगे। यहां पर मुख्य न्यायाधीश का चयन उनकी उम्र से नहीं बल्कि इस बात से तय किया जाता है कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट में जज कब नियुक्त किया गया। लेकिन इसमें सबसे रोचक तथ्य यह है कि वही जज सुप्रीम कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश होगा जो लंबे समय से सुप्रीम कोर्ट में है, वो उतना ही वरिष्ठ माना जाता है।
इसको ऐसे भी समझा जा सकता हैं- मान लीजिए कि जब सीजेआई रिटायर हो रहे हों, तो कोई एक जज ऐसा है, जिसकी उम्र 63 साल है और वो 5 साल से सुप्रीम कोर्ट में काम रहा है। जबकि एक दूसरे जज की उम्र वैसे तो 62 साल है, लेकिन वो 6 साल से सुप्रीम कोर्ट में है, ऐसी स्थिति में वरिष्ठता के पैमाने पर 62 साल की उम्र वाला जज वरिष्ठ माना जाएगा और उसी को देश का अगला सीजेआई होना चाहिए। ऐसे में मामला तब पेचीदा हो जाता है, जब दो जजों की नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट में एक दिन हुई होती है और ऐसा मामला कई बार सामने आया है।
जब दो जजों ने ली हो एक ही दिन शपथ
भारत के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति उसी दिन हुई थी, जिस दिन (10 अक्टूबर 2011) जस्टिस चेलमेश्वर नियुक्त किए गए थे। लेकिन उम्र में 4 महीने छोटे होने के बावजूद दीपक मिश्रा अगस्त 2017 को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया बने। ऐसी स्थिति में वरिष्ठता तय करने के लिए कई और चीजों का इस्तेमाल किया जाता है। इस दौरान यह भी देखा जाता है कि किस जज को पहले शपथ दिलाई गई थी और तब इसी को आधार बनाकर जस्टिस मिश्रा और चेलमेश्वर में से जस्टिस मिश्रा का चुनाव सीजेआई के लिए हुआ था। साल 2000 में इसी आधार पर जस्टिस रूमा पाल और वाय के सभरवाल के बीच फैसला हुआ था।
इसके साथ यह भी देखा जाता है कि किस जज ने हाईकोर्ट में ज्यादा वक्त तक सेवा दी है और ये भी देखा जाता है कि किस जज को सीधे बार ने नॉमिनेट किया है (जैसे कि जस्टिस रोहिंटन नरीमन या इंदु मल्होत्रा) और किसने पहले हाईकोर्ट के जज के रूप में काम किया है। ऐसी स्थिति में हाईकोर्ट में काम करने का अनुभव रखने वाले जज को सीजेआई के पद के लिए प्राथमिकता दी जाती है।
सीजेआई की नियुक्ति के लिए ये परंपरा पुराने समय से चली आ रही है और जिसकी 1993 में सुप्रीम कोर्ट ने ‘सेकेंड जजेज केस’ में पुष्टि की थी। इसमें बहुमत की राय के साथ कहा गया था कि चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया की नियुक्ति करते हुए सबसे वरिष्ठ जज को ही इसके लिए उपयुक्त माना जाना चाहिए।
सीजेआई के चयन की प्रक्रिया
1. जिस प्रकार केंद्र सरकार ने मुख्य न्यायाधीश से उनके उत्तराधिकारी के बारे में पूछा है ठीक उसी प्रकार हर बार केंद्रीय कानून, न्याय और कंपनी मामलों का मंत्रालय मुख्य न्यायाधीश से राय मांगता है।
2. इसके बाद सीजेआई वरिष्ठतम जज के नाम की सिफारिश करते हैं जिसमें उन्हें मुख्य न्यायाधीश के फिटनेस को लेकर कोई संदेह नहीं होता है। यही नहीं सीजेआई आगामी सीजेआई के लिए कॉलेजियम से भी बात करते हैं और राय लेते हैं।
3. सीजेआई की सिफारिश के बाद कानून मंत्रालय इसे आगे बढ़ाता है और वह प्रधानमंत्री के पास जाता है और वहीं से यह जानकारी राष्ट्रपति तक पहुंचाई जाती है
4. इस पूरी प्रक्रिया के बाद सीजेआई के नाम पर मुहर लगती है और फिर राष्ट्रपति उन्हें शपथ दिलाते हैं।
सरकार का क्या होता है रोल
चीफ जस्टिस के चयन की प्रक्रिया में कानून मंत्री और प्रधानमंत्री की भागीदारी के साथ कॉलेजियम का भी अहम रोल होता है। सरकार कॉलेजियम के फैसले पर दोबारा विचार के लिए वापस भेज सकती है। और अगर कॉलेजियम दोबारा उसी नाम को भेजती है तो सरकार फिर उसका विरोध नहीं कर पाती है।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया
मुख्य न्यायाधीश के पद के लिए सर्वोच्च न्यायालय के सबसे वरिष्ठ और इस काम के लिए सबसे फिट जज का चयन किया जाता है। कानून, न्याय और कंपनी मामलों का केंद्रीय मंत्रालय इसके लिए सही समय पर रिटायर हो रहे चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया से नए मुख्य न्यायाधीश का प्रस्ताव मांगता है।
अगर ऐसे वरिष्ठतम जज के फिटनेस में किसी बात को लेकर संदेह होता है तो संविधान के अनुच्छेद 124(2) के अनुसार अगले मुख्य न्यायाधीश के लिए फिर से कॉलेजियम में सलाह- मशविरा किया जाता है। मुख्य न्यायाधीश ऑफ इंडिया से सिफारिश आने के बाद केंद्रीय कानून, न्याय और कंपनी मामलों के मंत्री देश के प्रधानमंत्री के सामने प्रस्ताव देते हैं और इसके बाद राष्ट्रपति के आगे फाइल बढ़ाई जाती है।
कई बार नियमों को ताक पर रखा जा चुका है
सुप्रीम कोर्ट की स्थापना 1950 में हुई थी, अब तक देश में 45 मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किए जा चुके हैं। हर बार वरिष्ठता की परंपरा को ही अपनाया गया है लेकिन हर काम में अपवाद होता है सुप्रीम कोर्ट में मुख्यन्यायाधीश के चयन को लेकर भी ऐसे अपवाद रहे हैं। इसमें प्रमुख रही है न्यायाधीश ए एन रे और न्यायाधीश एमएच बेग की नियुक्ति।
न्यायाधीश ए एन रे की नियुक्ति 25 अप्रैल 1973 को हुई थी। एसएम सीकरी के रिटायर होने के बाद सारे नियमों को ताक पर रखकर चीफ जस्टिस नियुक्त किया गया था। बता दें कि रे को न्यायाधीश जे एम शेल्ट, जस्टिस के एस हेगड़े और न्यायाधीश ए एन ग्रोवर की वरिष्ठता को ताक पर रखकर यह पद दिया गया था।
न्यायाधीश एमएच बेग
वैसे तो अक्सर ये कहा जाता है कि मुख्य न्यायाधीश के चयन में प्रधानमंत्री का कोई रोल नहीं होता है लेकिन जब इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थीं और मुख्य न्यायाधीश के एन रे रिटायर होने वाले थे तो न्यायाधीश की सारी परंपराओं और वरिष्ठता को ताक पर रखकर एमएच बेग को मुख्य न्यायाधीश बनाया गया था। बताते हैं कि परंपरा के लिहाज से उस समय के सबसे वरिष्ठ जज एच आर खन्ना थे लेकिन वह श्रीमति गांधी को पसंद नहीं थे।