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Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- संसद में कैसे लौट सकता है आपराधिक मामले के लिए दोषी व्यक्ति?

Mon, 10 Feb 2025 08:12 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Mon, 10 Feb 2025 08:12 PM IST
सार

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि आपराधिक मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद कोई व्यक्ति संसद में कैसे लौट सकता है। कोर्ट ने केंद्र और चुनाव आयोग से तीन हफ्ते में जवाब देने को कहा है।
 

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How can a person return to Parliament after conviction in criminal case? SC asks
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : पीटीआई (फाइल)

विस्तार

राजनीति के अपराधीकरण को एक बड़ा मुद्दा बताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को सवाल किया कि आपराधिक मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद कोई व्यक्ति कैसे संसद में लौट सकता है। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने इस मुद्दे पर अटॉर्नी जनरल से मदद मांगी।  

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दरअसल, वकील अश्विनी उपाध्याय की ओर से एक जनहित याचिका दायर की गई। याचिका में दोषी ठहराए गए राजनेताओं पर आजीवन प्रतिबंध लगाने की मांग की गई और सांसदों व विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामलों पर त्वरित सुनवाई की भी अपील की गई। 
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सुप्रीम कोर्ट ने तीन हफ्ते के भीतर केंद्र सरकार औऱ चुनाव आयोग से इस मुद्दे पर जवाब मांग है, क्योंकि याचिका जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 8 और 9 की सांविधानिक वैधता को चुनौती देती है। शीर्ष कोर्ट ने कहा, अगर किसी व्यक्ति को दोषी ठहराया जाता है और सजा को बरकरार रखा जाता है, तो वह कैसे संसद या विधानसभ में वापस आ सकता है? उन्हें इसका जवाब देना होगा। यह स्पष्ट रूप से हितों का टकराव भी है, वह कानून भी बना रहे होंगे। 
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मामले को चीफ जस्टिस खन्ना के पास भेजा
बेंच ने कहा, हमें जन प्रतिनिधित्व कानून की धारा 8 और 9 पर अधिक जानकारी की जरूरत है। एक सरकारी कर्मचारी, जो भ्रष्टाचार या राज्य के प्रति निष्ठा का उल्लंघन करता है, उसे सेवा में बने रहने के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता, लेकिन वह मंत्री बन सकता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि चूंकि इस मुद्दे पर पहले एक तीन जजों की बेंच ने फैसला दिया था, इसलिए इस मामले को दो जजों की बेंच के लिए खोलना उचित नहीं होगा। इसलिए इस मामले को चीफ जस्टिस (सीजेआई) संजीव खन्ना के पास भेजने का आदेश दिया गया है, ताकि एक बड़ी बेंच इस पर विचार करे। 

एमपी-एमएलए के खिलाफ दायर मुकदमों में हो रही देरी
न्यायमित्र के रूप में नियुक्त वरिष्ठ वकील विजय हंसारिया ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से समय-समय पर आदेश दिए जाने और हाईकोर्ट द्वारा निगरानी रखने के बावजूद सांसदों और विधायकों के खिलाफ कई मामलों का निपटारा धीमी गति से हो रहा है।


शीर्ष कोर्ट ने दिया था विशेष अदालतें बनाने का आदेश
हंसारिया ने बताया कि याचिका में यह भी सवाल उठाया गया है कि क्या अपराध के लिए दोषी व्यक्ति राजनीतिक दल बना सकता है या पार्टी का अधिकारी हो सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में 12 स्पेशल कोर्ट बनाने का आदेश दिया था, ताकि सांसदों व विधायकों के खिलाफ लंबित मामलों का शीघ्रता से निपटारा हो सके, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ है। हंसारिया ने कहा कि यह शर्मनाक है कि वर्तमान में 42 फीसदी सांसदों पर आपराधिक मामले लंबित हैं।  

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