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कश्मीर का हाल: कैसे गई 21 वर्षीया युवती की जान, फिर क्या हुआ?

Wed, 27 Jul 2016 10:52 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Wed, 27 Jul 2016 10:52 AM IST
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How 21-yr-old’s killing left behind skeletons of steel in Kashmir town.
- फोटो : PTI
8 जुलाई को आतंकी बुरहान वानी के मारे जाने के करीब दो हफ्ते बाद भी कश्मीर घाटी जल रही है। हालात बेहद गंभीर हैं। यहां की स्थिति आखिर है क्या इसका पता घाटी के ही दमहल हांजीपोरा या डीएचपोरा के पुलिस थाने के लोगों के डरावने खुलासों से समझा जा सकता है।
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इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक यहां के हालात पर गौर करें तो यहां थाने की जगह जली हुई बिल्डिंग के अवशेष हैं। इसकी छत फट गई है। दरवाजों और खिड़कियों की जगह पर काले धब्बे ही बचे हैं। दीवारों की ईटें बिखरी पड़ी हैं। दूसरी ओर जली हुई गाड़ियां हैं और स्टील के अवशेष बिखरे हुए हैं। जंग लगे स्टील के कंकाल मिले हैं, टायर जले हुए हैं और पेंट फैले हुए हैं।
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दमहाल हांजीपोरा पुलिस स्टेशन या डीएचपोरा का ये हाल 8 जुलाई को बुरहान वानी की हत्या के बाद का है। यहां पिछले दो हफ्ते से लगातार स्थिति गंभीर बनी हुई है। सरकार ने इस थाने के कंपाउंड को उदाहरण के तौर पर पेश किया है। साथ ही सरकार ने सेना से यहां हुई मौतों और हालात को लेकर जवाब मांगने की तैयारी भी कर रही है।
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थाने को किया आग के हवाले

How 21-yr-old’s killing left behind skeletons of steel in Kashmir town.
इन सबके बीच बड़ा सवाल यही है कि आखिर दक्षिणी कश्मीर के इस थाने में क्या हुआ होगा, जहां 81 फीसदी लोगों ने पिछले चुनाव में वोट किया था उनमें से ज्यादातर लोगों ने इस थाने पर हमला किया। उन्होंने बाकायदा बुलडोजर के जरिए थाने पर चढ़ाई की और इसे आग के हवाले कर दिया।

जम्मू-कश्मीर पुलिस के मुताबिक एक भीड़ ने थाने पर हमला किया था। उन्होंने इस कार्रवाई में 20 पुलिसवालों को बंधक बना लिया। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक हमलावर लोगों ने हथियार भी लूट लिए, इनमें करीब 40 आटोमैटिक हथियार भी शामिल हैं। उन्होंने किसी भी आम आदमी के मारे का खंडन किया है।

दूसरी ओर जमीनी सच्चाई की बात करें तो 9 जुलाई की घटना है कि जब 21 वर्षीय यास्मीना अख्तर के घर के बाहर 50 से ज्यादा ग्रामीण एकत्र हुए। यास्मीना अख्तर की गोली मारकर हत्या की गई थी। यास्मीना की आखिरी विदाई देने पहुंचे एक युवा शकील अहमद ने बताया कि ये शनिवार का दिन था। सुबह के करीब 10.30 बजे थे। लोग बुरहान वानी के लिए गइबाना जनाजा करना चहता थे। ये बेहद शांति से चल रहा था, जिसमें आजादी के लिए नारेबाजी हो रही थी।

कश्मीर के हालात बेहद गंभीर

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अहमद ने बताया कि जैसे ही नारेबाजी तेज हुई पुलिस-सीआरपीएफ और सेना ने हमला कर दिया। इस दौरान वहां मौजूद लोग भागने लगे। उनमें से कुछ युवा पकड़ लिए गए।

एक दूसरे स्थानीय इंशा वानी ने बताया कि हम घर पर थे तभी किसी के चिल्लाने की आवाज आई। इस दौरान मेरे 13 साल के छोटे भाई मोइन को गिरफ्तार कर लिया गया। मैंने देखा कि सेना के दो जवान उसकी पिटाई कर रहे थे।

मोइन के चचेरे भाई इंशा ने बताया कि हम तीन लोग उसकी ओर दौड़े लेकिन यास्मीना पहले पहुंच गई, उसने मोइन का हाथ पकड़ा और खींचने लगी। इसी दौरान एक जवान ने गोली चला दी जिसके बाद यास्मीना जमीन पर गिर गई।

यास्मीना की मां हसीना ने बताया कि उसने कॉलेज में आईटीआई कोर्स के लिए एप्लाई किया था। वह घर चलाने के लिए एम्ब्रॉइडरी का काम करती थी।

हसीना ने बताया कि उसका छोटा भाई बीएसएफ में है और त्रिपुरा में तैनात है, लेकिन हमने उसे अब तक इस बात की जानकारी नहीं दी है। मुझे समझ नहीं आ रहा अगर उसे पता चलेगा कि सेना ने ही उसकी बहन को मारा है तो वह क्या करेगा?
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