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नए नोट न मिलने पर अस्पताल ने रोका केंद्रीय मंत्री के भाई का शव

Wed, 23 Nov 2016 12:17 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 23 Nov 2016 12:17 PM IST
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Hospital refused to take old money with central Minister Sadananda gowda
- फोटो : ANI

केंद्र सरकार के नोटबंदी के फैसले से आम जनता को तो भारी परेशानी का सामना करना पड़ ही रहा है, इससे अछूते वीआईपी भी नहीं हैं। केंद्रीय मंत्री सदानंद गौड़ा तक को इस फैसले की दुश्वारियों का सामना करना पड़ गया। 

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वह अपने मृतक भाई का शव लेने अस्पताल पहुंचे तो प्रबंधन ने पुराने नोट लेने से मना कर दिया और बिना बिल का भुगतान करे शव को भी नहीं ले जाने दिया। बाद में सदानंद गौड़ा ने चेक के द्वारा बिल का भुगतान कर भाई के शव को अस्पताल से निकाला जिसके बाद उनका अंतिम संस्कार किया गया। 
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इस सारे वाक्ये से गौड़ा खासे आहत नजर आए, उन्होंने इस संबंध में अस्पताल प्रबंधन से लिखित जवाब मांगा है।  

जानकारी के अनुसार मामला मंगलवार का है, केंद्रीय मंत्री सदानंद गौड़ा के भाई भास्कर गौड़ा को दस दिन पहले जांडिस की वजह से मंगलौर के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया ‌था। जहां मंगलवार को उनका देहांत हो गया।
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मंगलवार को हो गया था गौड़ा के भाई का इंतकाल

Hospital refused to take old money with central Minister Sadananda gowda

सूचना मिलने पर सदानंद गौड़ा भी अस्पताल पहुंचे और बिल का भुगतान करने के लिए पुराने नोट दिए। गौडा उस समय अवाक रह गए जब अस्पताल प्रबंधन ने पुराने नोट लेने से साफ इंकार कर दिया। इस पर भड़के गौड़ा ने लिखित में प्रबंधन से जवाब मांगा। 

हालांकि काफी देर चली जद्दोजहद के बाद गौड़ा ने चेक से भुगतान कर अस्पताल का बिल चुकाया। इसके बाद वह शव लेकर घर के लिए रवाना हुए। इस सारे वाकये से गौड़ा काफी आहत नजर आए। 

उन्होंने कहा मैंने इस संबंध में अस्पताल प्रबंधन से लिखित में जवाब मांगा है कि जब सरकार ने 24 नवंबर तक सभी अस्पतालों को पुराने नोट लेने की अनुमति दे रखी है तो फिर उन्होंने क्यों इंकार किया। गौड़ा ने कहा मैं महसूस कर सकता हूं कि जब मुझे एक मंत्री होते हुए इतनी इतनी दिक्‍कत हुई है तो आम आदमी को कितनी होती होगी। 

हालांकि तथ्य यह भी है कि अपने आदेश में सरकार ने केवल सरकारी अस्पतालों में ही पुराने नोट लेने की अनुमति प्रदान की थी प्राइवेट अस्पतालों में नहीं। यही कारण है कि देशभर में आम लोगों को निजी अस्पतालों में इलाज के दौरान भारी दिक्‍कतों से जूझना पड़ रहा है। 

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