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समलैंगिक किसी पाप और दुर्व्यवहार के कारण ऐसा बर्ताव करते हैं, आनुवंशिक है समलैंगिकता : वैज्ञानिक

Tue, 25 Sep 2018 02:28 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 25 Sep 2018 02:28 PM IST
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Homosexuality is Genetic, Homosexuals behave like this because of some sin, misbehavior : scientists
समलैंगिकता
क्या समलैंगिकता खत्म हो सकती है? क्या आखिरकार यह विलुप्त हो जाएगी? वैज्ञानिकों को मिले नए साक्ष्य इस ओर इशारा करते हैं कि समलैंगिक व्यवहार मुख्य तौर पर आनुवांशिक प्रभावों से नियंत्रित होते हैं। यह भी पता चला है कि समलैंगिक लोग विपरीतलिंगियों की तुलना में काफी कम प्रजनन करते हैं। ऐसे में दुनिया भर के वैज्ञानिक इस सवाल पर मंथन कर रहे हैं।
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पर्यावरणीय कारक समलिंगी शारीरिक लक्षणों की अभिव्यक्ति में भूमिका निभाते हैं जबकि वैज्ञानिकों का कहना है कि उनका प्रभाव इतना ज्यादा नहीं है कि कोई विपरीतलिंगी जीव समलैंगिक हो जाए।
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वैज्ञानिक भी इस बात पर बहस कर रहे हैं कि ऐसा व्यवहार कैसे ब्रिटिश वैज्ञानिक चार्ल्स डार्विन के विकास के सिद्धांत के साथ फिट बैठता है।

इटली की यूनिवर्सिटी ऑफ पडोवा में विकास मनोविज्ञान की प्रोफेसर आंद्रिया कैम्पेरियो सियानी ने पीटीआई को बताया, "डार्विन के सिद्धांत का विरोधाभास कहता है कि प्रजनन को बढ़ावा नहीं देने वाली जीन को बनाए रखना असंभव है, जैसा कि समलैंगिकता में होता है। चूंकि समलैंगिक विपरीत लिंगियों की तुलना में बहुत कम प्रजनन करते हैं, इसलिए इस प्रवृति को बढ़ावा देने वाली जीन तेजी से विलुप्त हो जानी चाहिए।"
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सियानी ने इस सवाल का जवाब देने के लिए काफी शोध किया है कि समलैंगिक मानव आबादी से विलुप्त क्यों नहीं हुए।

'समलैंगिक किसी पाप और दुर्व्यवहार के कारण ऐसा बर्ताव करते हैं'

Homosexuality is Genetic, Homosexuals behave like this because of some sin, misbehavior : scientists
समलैंगिकता के पक्ष में प्रदर्शन करते कार्यकर्ता
उनका कहना है कि इस विरोधाभास ने लंबे समय तक आनुवंशिक परिकल्पना को छोड़ रखा था और इससे "संकेत मिलते हैं कि समलैंगिक किसी पाप और दुर्व्यवहार के कारण ऐसा बर्ताव करते हैं जिसे थेरेपी के जरिए खत्म किया जा सकता है।"

वैज्ञानिकों ने कहा कि पिछले कुछ दशकों में ऐसे साक्ष्य सामने आए हैं कि समलैंगिकता ऐसा व्यवहार है जो जैविक या आनुवंशिक प्रभावों के कारण पैदा होती है।

बेंगलुरु के जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर अडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च (जेएनसीएएसआर) में विकास जीव-विज्ञान में पीएचडी शोधार्थी मनस्वी सारंगी ने कहा, "विपरीत लिंग वाले व्यक्ति के साथ यौन संबंध बनाने की पूर्ववृत्ति का मकसद प्रजनन और आने वाली पीढ़ियों में जीन को भेजना है। बहरहाल, समलैंगिक व्यवहार काफी व्यापक है और नया नहीं है।"

सारंगी ने कहा, "समलैंगिक व्यवहार दिखाने वाली विभिन्न प्रजातियों पर किए गए कई अध्ययन दिखाए गए हैं ताकि जीवों को विकासात्मक लाभ दिए जा सकें।"

चिम्पैंजी और पेंग्विन में भी पाए जाते हैं समलैंगिक

Homosexuality is Genetic, Homosexuals behave like this because of some sin, misbehavior : scientists
भारत में समलैंगिकता अपराध के दायरे से बाहर हुआ
जेएनसीएएसआर के एवोल्यूशनरी एंड ऑर्गेनिज्मल बायोलॉजी यूनिट की असोसिएट प्रोफेसर टी एन सी विद्या के मुताबिक, समलैंगिक पुरुषों में जीन के कुछ प्रकार बहुत सामान्य हैं।

उन्होंने कहा, "जहां तक मैं जानती हूं, यह साफ नहीं है कि समलैंगिकता किस हद तक एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक जाने वाली है।"

विद्या ने कहा, "समलैंगिकता को प्रभावित करने वाले विभिन्न प्रकार के जीन एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में जाते हैं कि नहीं, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि उन्हें प्रजनन का मौका मिलता है कि नहीं। यदि वे खुद प्रजनन नहीं भी करते हैं तो जीन के वे प्रकार दूसरी पीढ़ियों में जा सकते हैं, बशर्ते उनके तरह की जीन से लैस उनके रिश्तेदार प्रजनन करें।"

वैज्ञानिकों ने यह भी कहा कि समलैंगिक व्यवहार सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं है बल्कि 500 से ज्यादा गैर-मानव जातियों में भी यह पाया गया है। इनमें चिम्पैंजी और पेंग्विन भी शामिल हैं।

गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय ने हाल में अपने फैसले में समलैंगिक वयस्कों द्वारा आपसी सहमति से बनाए गए समलिंगी यौन संबंधों को अपराध की श्रेणी से हटा दिया। न्यायालय के इस फैसले का स्वागत किया गया है। (इनपुट:भाषा)
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