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गृह मंत्रालय की रिपोर्ट: देश में नक्सली हिंसा की घटनाओं में आई भारी कमी, 2013 के मुकाबले 2020 में ऐसे रहे हालात

Tue, 26 Apr 2022 03:51 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Tue, 26 Apr 2022 03:51 PM IST
सार

गृह मंत्रालय की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि कुल मिलाकर हिंसा की घटनाओं में 41 फीसदी की कमी आई है। 2013 में ऐसी घटनाओं की संख्या 1136 थी जो 2020 में 665 रही।

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Home Ministry annual report says Naxal violence and deaths reduced significantly in last 6 years news in Hindi
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फाइल

विस्तार

साल 2013 के मुकाबले साल 2020 में देश में नक्सलियों की ओर से की जाने वाली हिंसा में 41 फीसदी और इससे होने वाली मौतों में 54 फीसदी की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। साल 2020-21 के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार नक्सली हिंसा की घटनाएं काफी हद तक सीमित हो गई हैं और सभी माओवादी हिंसा की घटनाओं में से 88 फीसदी केवल 30 शहरों में हुई हैं।

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रिपोर्ट के अनुसार साल 2020 में नौ राज्यों में 53 जिलों के 226 पुलिस थानों से नक्सली हिंसा की रिपोर्ट सामने आई थीं। वहीं, साल 2013 में 10 राज्यों में 76 जिलों के 328 पुलिस थानों में नक्सली हिंसा की घटनाएं दर्ज हुई थीं। पिछले छह वर्षों के दौरान वामपंथी उग्रवाद में उल्लेखनीय गिरावट आई है। इसके साथ ही इसके भौगोलिक प्रसार में भी कमी आई है, जो कि देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। 
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गृह मंत्रालय की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि कुल मिलाकर हिंसा की घटनाओं में 41 फीसदी की कमी आई है। 2013 में ऐसी घटनाओं की संख्या 1136 थी जो 2020 में 665 रही। इसके साथ ही, वामपंथी उग्रवाद के चलते होने वाली मौतों में 54 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। साल 2013 में नक्सली हिंसा की घटनाओं में 397 लोगों की जान गई थी। साल 2020 में यह आंकड़ा 183 रहा।
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छत्तीसगढ़ सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य रहा
2020 में छत्तीसगढ़ नक्सली हिंसा से सबसे अधिक प्रभावित राज्य रहा। यहां ऐसी 315 घटनाएं हुईं और 111 लोगों की मौत हुई। इसके बाद झारखंड रहा जहां 199 हिंसा की घटनाएं हुईं और 39 लोगों की जान चली गई। ओडिशा में नक्सली हिंसा की 50 घटनाएं दर्ज की गई थीं और यहां नौ लोगों की मौत हुई। वहीं, महाराष्ट्र में 30 व बिहार में 26 घटनाएं हुईं और इनमें आठ-आठ लोगों की जान गई।

2020 में 32.79 लाख विदेशी नागरिक भारत की यात्रा पर आए
देश में 2020 में 32.79 लाख से अधिक विदेशियों ने भारत की यात्रा की थी। इस वर्ष देश में कोविड महामारी के कारण लॉकडाउन और अन्य पाबंदियां लगाई गई थीं। 2020 में भारत की यात्रा करने वाले विदेशियों में 61,000 से अधिक अमेरिकी और 4,751 पाकिस्तानी नागरिक शामिल थे। गृह मंत्रालय की 2020-21 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, एक अप्रैल, 2020 से 31 दिसंबर, 2020 की अवधि के दौरान कुल 32,79,315 विदेशी नागरिकों ने भारत की यात्रा की थी। रिपोर्ट के अनुसार इस अवधि के दौरान भारत की यात्रा पर आने वाले विदेशी नागरिकों में अमेरिका से सबसे अधिक 61,190 लोग, बांग्लादेश से 37,774, ब्रिटेन से 33,323, कनाडा से 13,707, पुर्तगाल से 11,668 और अफगानिस्तान से 11,212 लोग आए थे। जर्मनी के कुल 8,438 नागरिक, 8,353 फ्रांसीसी नागरिक, इराक से 7,163 और कोरिया गणराज्य के 6,129 नागरिक भी भारत आए।

64,827 कश्मीरी पंडित परिवारों को कश्मीर घाटी छोड़ने को मजबूर होना पड़ा
सरकार ने कहा है कि पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद की वजह से 64,827 कश्मीरी पंडित परिवारों को 1990 के दशक की शुरुआत में कश्मीर घाटी छोड़ने और जम्मू, दिल्ली और देश के कुछ अन्य हिस्सों में बसने के लिए मजबूर होना पड़ा था। गृह मंत्रालय (एमएचए) की 2020-21 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 1990 के दशक और 2020 के बीच जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के कारण 14,091 नागरिकों और सुरक्षा बल के 5,356 जवानों को अपनी जान गंवानी पड़ी। रिपोर्ट के अनुसार जम्मू के पहाड़ी इलाकों से लगभग 1,054 परिवार जम्मू के मैदानी इलाकों में चले गए। इसमें कहा गया है कि जम्मू कश्मीर के राहत और प्रवासी आयुक्त के पास उपलब्ध पंजीकरण के रिकॉर्ड के अनुसार, वर्तमान में 43,618 पंजीकृत कश्मीरी प्रवासी परिवार जम्मू में बसे हुए हैं, 19,338 परिवार दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में और 1,995 परिवार देश के कुछ अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बसे हुए हैं।

सीएए सीमित संदर्भ में और खास उद्देश्य से बनाया गया कानून: गृह मंत्रालय
संशोधित नागरिकता अधिनियम (सीएए) एक सीमित संदर्भ में और एक खास उद्देश्य से बनाया गया कानून है, जिसमें सहानुभूतिपूर्ण और सुधारात्मक दृष्टिकोण अपनाकर स्पष्ट ‘कट ऑफ’ तिथि के साथ कुछ चुनिंदा देशों से आने वाले विशेष समुदायों को छूट देने की कोशिश की गई है। गृह मंत्रालय (एमएचए) की वार्षिक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। सीएए 2019 में बनाया गया था, लेकिन इसे अभी तक लागू नहीं किया गया है। इसका उद्देश्य हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के उन सदस्यों को नागरिकता प्रदान करना है, जिन्हें अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान में उत्पीड़न का सामना करना पड़ा था। इस कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए थे जिनमें देश के विभिन्न हिस्सों में लगभग 100 लोगों की मौत हुई थी।


गृह मंत्रालय के पास 10.69 लाख से अधिक यौन अपराधियों का ब्योरा
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने देश में 10.69 लाख से अधिक यौन अपराधियों का ब्योरा जमा किया है और इस तरह के जुर्म के नए मामलों की जांच के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों को इन अपराधियों की जानकारी जिस समय चाहिए, वह तत्काल उपलब्ध है। मंत्रालय की 2020-21 के लिए वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रीय यौन अपराधी डेटाबेस (एनडीएसओ) के पास देश में 10.69 लाख से अधिक यौन अपराधियों के आंकड़े हैं जिससे जांच अधिकारियों को आदतन यौन अपराधियों पर नजर रखने तथा ऐसे मुजरिमों के खिलाफ एहतियाती कदम उठाने में मदद मिलती है।
 

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