गाय माता बीमार है, एंबुलेंस तैयार है!
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तारीख थी सात नवंबर साल 2015 रांची में कुछ मिनी ट्रकों के लिए रेड कार्पेट बिछाया गया था। इन पर नीले रंग का सायरन लगा था। ट्रकों पर लगे बोर्ड पर लिखा था-आपातकालीन गौ वंश सेवा। यह झारखंड में गायों के लिए एंबुलेंस सेवा की शुरुआत का मौका था। स्वामी रामदेव इसके लिए खास तौर पर रांची आए थे।
तब उद्योगपति आर के अग्रवाल ने अपने निजी फंड से ऐसी 10 एंबुलेंस की व्यवस्था कराई थी। वे झारखंड प्रादेशिक गौशाला संघ के अध्यक्ष भी हैं। इसके नौ महीने बाद अगस्त-2016 में जब कुछ राज्यों में गायों की मौत चर्चा का विषय बनीं। तब झारखंड में संचालित इन एंबुलेंस के कारण सैकडों गायों की जान बचाने का दावा किया जा रहा है।
झारखंड प्रादेशिक गौशाला संघ के सचिव अनिल मोदी ने बताया कि गायों के लिए एंबुलेंस की सेवा राज्य के 10 शहरों में उपलब्ध है। इसके संचालन का जिम्मा संबंधित गौशालाओं का है। किसी भी गाय के बीमार होने की सूचना मिलने के आधे घंटे के अंदर गायों को रेस्क्यू करा लिया जाता है।
अब तक कितनी गायों का इलाज कराया गया होगा, इस सवाल पर अनिल मोदी ने बताया, "जमशेदपुर जैसे शहर में रोज करीब 4-5 गायों को रेस्क्यू कराया जाता है। ऐसे 10 शहर हैं। इनको जोड लें तो आप पाएंगे कि हमने बडी संख्या में गायों का इलाज कराया है। झारखंड में इस दौरान इलाज के अभाव मे किसी गाय की मौत नहीं हुई है।"
शहर मे महीने में महज 5-7 केस ही आते हैं
वहीं, झारखंड प्रादेशिक गौशाला संघ के उपाध्यक्ष ताराचंद जैन ने बताया कि गायों की एंबुलेंस की डिमांड कम है। देवघर जैसे शहर मे महीने में महज 5-7 केस ही आते हैं।
झारखंड सरकार निबंधित गौशालाओं के संचालन के लिए हर साल 50 लाख रुपये का अनुदान देती है। झारखंड के कृषि व पशुपालन मंत्री रंधीर सिंह ने कहा है कि अगले बजट में यह राशि बढा कर एक करोड कर दी जाएगी।
वहीं दूसरी तरफ झारखंड में स्वास्थ्य सेवाओं की बहाली पर प्रति व्यक्ति खर्च देश में सबसे कम है। इसका जिक्र भारत सरकार की ओर से 2015 में जारी नेशनल हेल्थ प्रोफाइल में किया गया है। नेशनल हेल्थ प्रोफाइल के मुताबिक राज्य में प्रति एक लाख लोगों पर एक अस्पताल की व्यवस्था है।
6052 लोगों पर एक बेड उपलब्ध है और सरकारी अस्पतालों की एंबुलेंस सेवा बुरी हालत में है। एमसीआई ने राज्य में डाक्टरों की कमी पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। हालांकि, स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी का दावा है कि उनकी सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता के प्रति गंभीर है।
अभी हाल में ओडिशा में दाना मांझी नाम के एक शख्स की तस्वीर दुनिया भर में इसलिए चर्चा में रही क्योंकि उनके पास अपनी बीवी की लाश को घर तक ले जाने के लिए एंबुलेंस के पैसे नहीं थे। उन्होंने 12 किलोमीटर तक अपनी बीवी की लाश अपने कंधे पर ढोई थी।