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हिन्दू तालिबानियों ने बाबरी मस्जिद को तोड़ा: मुस्लिम पक्षकार 

Sat, 14 Jul 2018 05:55 AM IST
राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली
राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 14 Jul 2018 05:55 AM IST
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Hindu Taliban broke Babri Masjid: Muslim parties

राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले की सुनवाई केदौरान शुक्रवार को मुस्लिम पक्षकारों की ओर से पेश वकील ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि हिन्दू तालिबानियों ने बाबरी मजिस्द को तोड़ा था। कोई भी कानून या संविधान किसी को दूसरे धर्म के धार्मिक स्थल को तोडने की इजाजत नहीं देता। वहीं सिया वक्फ बोर्ड ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवादित जगह का एक तिहाई उन्हें दिया है और वह इस हिस्से को राममंदिर बनाने के लिए हिन्दू पक्षकारों को देना चाहते हैं।  

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मुस्लिम पक्षकारों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने शुक्रवार को चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय विशेष पीठ के समक्ष कहा कि मुस्लिम तालिबानियों ने बुद्ध की मूर्ति को तोड़ा था और उन्हें यह कहने में कोई गुरेज नहीं है कि बाबरी मस्जिद को हिन्दू तालिबानियों ने ढहा दिया था। उन्होंने कहा कि कोई भी कानून किसी को धार्मिक स्थलों को गिराने की इजाजत नहीं देता। उन्होंने एक बार फिर दोहराया कि मस्जिद इस्लाम धर्म का अभिन्न अंग है।
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साथ ही उन्होंने कहा कि शिया वक्फ बोर्ड उस हिस्से को दान में देना चाहती, जो उनका है ही नहीं। धवन ने यूपी सरकार सरकार द्वारा इस मामले में दखल पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि पहले यूपी सरकार ने कहा था कि इस मामले में उसका स्टैंड न्यूट्रल है लेकिन अब वह इस मामले में दखल दे रही है। मालूम हो कि पिछली सुनवाई केदौरान यूपी सरकार की ओर पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुस्लिम पक्षकारों पर इस मामले में देरी करने का आरोप लगाया था।

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विवादित भूमि में से एक हिस्सा मुस्लिम पक्षकार को दिया गया है

Hindu Taliban broke Babri Masjid: Muslim parties

यूपी सरकार ने कहा था कि वर्षों से लंबित इस मामले में मुस्लिम पक्षकार वर्ष 1994 में इस्माइल फारुखी मामले में दिए फैसले में लिखी उस टिप्पणी पर अब पुनर्विचार करने की गुहार कर ही है जिसमें कहा गया था कि मस्जिद में नमाज पढना इस्लाम का अभिन्न अंग नहीं है। करीब एक सदी से इस विवाद के अंतिम रूप से निपटारे का इंतजार हो रहा है। उक्त टिप्पणी वर्ष 1994 में की थी लेकिन अब तक इसे लेकर कोई याचिका दायर की गई और न ही मौजूदा दायर अपील में की गई।
 
इससे पहले सेंट्रल सिया वक्फ बोर्ड की ओर से पेश वरिष्ठ वकील एसएन सिंह ने कहा कि बाबरी मस्जिद मीर बाकी ने बनवाया था और मीर बाकी शिया था। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवादित भूमि में से एक हिस्सा मुस्लिम पक्षकार को दिया गया है। ऐसे में वह उसकेअसली दावेदार हैं और वह चाहता है इस हिस्से को राम मंदिर बनाने के लिए हिन्दू को दे दिया जाए। ऐसा करना देश की अखंडता, एकता, भाईचारे और शांति व्यवस्था केलिए जरूरी है। साथ ही शिया वक्फ बोर्ड ने मुस्लिम पक्षकारों द्वारा इस्माइल फारुखी केफैसले में की गई टिप्पणी पर पुनर्विचार करने की मांग को भी अुनचित बताया।  

वहीं सुन्नी वक्फ बोर्ड की तरफ से कहा गया कि 1946 में ही यह निर्णय हो गया था कि उस जमीन पर मालिकाना हक सुन्नी वक्फ बोर्ड का है। शिया वक्फ बोर्ड ने पिछले वर्ष 1946 केफैसले को चुनौती दी है। साथ ही सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से कहा गया कि इस मामले में शिया बोर्ड को कोई लोकस नहीं है, लिहाजा वह उनकी बातों का जवाब नहीं देना चाहते। अगली सुनवाई 20 जुलाई को होगी। 

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