{"_id":"59fcaf734f1c1b6e548ba996","slug":"hindi-writer-krishna-sobti-honoured-with-jnanpith-award-for-the-year-2017","type":"story","status":"publish","title_hn":"साहित्यकार कृष्णा सोबती को मिला इस वर्ष का ज्ञानपीठ पुरस्कार","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
साहित्यकार कृष्णा सोबती को मिला इस वर्ष का ज्ञानपीठ पुरस्कार
एजेंसी, नई दिल्ली
Updated Sat, 04 Nov 2017 04:33 AM IST
विज्ञापन
हिंदी की मशहूर साहित्यकार कृष्णा सोबती
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिंदी की मशहूर साहित्यकार कृष्णा सोबती को इस वर्ष के ज्ञानपीठ पुरस्कार देने की घोषणा की गई है। ज्ञानपीठ पुरस्कार चयन बोर्ड ने शुक्रवार को एक बैठक के बाद इसकी घोषणा की। चयन बोर्ड ने बताया कि 2017 के लिए इस पुरस्कार के लिए हिंदी की मशहूर लेखिका कृष्णा सोबती को चुना गया है। कृष्णा सोबती का जन्म 1925 में गुजरात में हुआ और वह क्षेत्र अब पाकिस्तान में है।
विज्ञापन
92 वर्षीय सोबती लेखन की नई शैली और अपनी कहानियों में साहसी पात्रों को गढ़ने के लिए जानी जाती हैं, जो हमेशा चुनौतियों को स्वीकार करने को तैयार रहता है। ज्ञानपीठ बोर्ड के अध्यक्ष मशहूर लेखक और आलोचक नामवर सिंह ने कहा कि वह लीक से हटकर लिखने वाली उपन्यासकार हैं। उन्होंने हिंदी साहित्य को काफी संपन्न बनाया है।
विज्ञापन
सोबती ने भारत-पाकिस्तान विभाजन, स्त्री-पुरुष संबंधों, भारतीय समाज में बदलाव और क्रमश: गिरते मानव मूल्यों जैसे कई विषयों को अपने लेखन में समेटा है। उनकी कुछ मशहूर कृतियां हैं ‘दर से बिछुड़ी’, ‘मित्रो मरजानी’, ‘जिंदगीनामा’, ‘दिल-ओ-दानिश’, ‘बादलों के घेरे’, ‘ऐ लड़की’ और ‘गुजरात पाकिस्तान से गुजरात हिंदुस्तान।’ उनकी कई पुस्तकों का देसी और विदेशी भाषाओं में अनुवाद हुआ है।
विज्ञापन