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Hindenburg: बाजार में 53 हजार करोड़ डूबे, अदाणी ग्रुप को नुकसान, गिरावट के बाद संभला बाजार, निवेशकों को सलाह

Mon, 12 Aug 2024 02:05 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Mon, 12 Aug 2024 02:05 PM IST
सार

शेयर बाजार में यह गिरावट सेबी के स्पष्टीकरण के बाद भी देखा जा रहा है। संभवतः संस्था को भी अनुमान था कि हिंडनबर्ग की रिपोर्ट का बाजार पर नकारात्मक असर दिख सकता है, सेबी ने निवेशकों से संभलकर निवेश पर विचार करने का भी अनुरोध किया था।

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Hindenburg Report Share Market Investors Adani Group position news and updates
शेयर बाजार। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिंडनबर्ग की रिपोर्ट आने के बाद शेयर मार्केट में जिस बड़े भूचाल की आशंका व्यक्त की जा रही थी, सोमवार को उसका असर दिखना शुरू हो गया है। शेयर बाजार खुलने के पूर्व की गई प्री-बिडिंग में भी इसके आसार दिख रहे थे, लेकिन बाजार खुलने के साथ ही इसका असली असर दिखना शुरू हो गया। शुरुआती दौर में ही अदाणी ग्रुप की कई कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखी गई। अब तक अदाणी ग्रुप के शेयरों में लगभग सात फीसदी की गिरावट दर्ज की जा चुकी है। शेयर बाजार में निवेश करने वाले निवेशकों के लगभग 53 हजार करोड़ रुपये डूबने का अनुमान लगाया जा रहा है। हालांकि, शुरुआती गिरावट के बाद बाजार दोबारा संभलता दिखाई दे रहा है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को घबराना नहीं चाहिए और हिंडनबर्ग का असर स्थाई नहीं होगा। 
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शेयर बाजार में यह गिरावट सेबी के स्पष्टीकरण के बाद भी देखा जा रहा है। संभवतः संस्था को भी अनुमान था कि हिंडनबर्ग की रिपोर्ट का बाजार पर नकारात्मक असर दिख सकता है, सेबी ने निवेशकों से संभलकर निवेश पर विचार करने का भी अनुरोध किया था। लेकिन इसके बाद भी हिंडनबर्ग रिपोर्ट ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। यह कहां तक जाकर संभलेगा, यह आने वाले समय में ही स्पष्ट हो पाएगा। पिछली बार हिंडनबर्ग रिपोर्ट के कारण अदाणी समूह को भारी नुकसान हुआ था। हालांकि, इस बार नुकसान का वेग उतना तेज नहीं दिखाई दे रहा है।
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'वापसी के संकेत अच्छे, घबराने की आवश्यकता नहीं'
आर्थिक मामलों के जानकार शुभम पाहूजा ने अमर उजाला से कहा कि हिंडनबर्ग के रिपोर्ट के कारण शुरुआती दौर में ज्यादा नुकसान होता दिखाई दे रहा था, लेकिन अब बाजार वापस होता दिखाई दे रहा है। इससे यही संकेत मिलता है कि निवेशकों ने रिपोर्ट को लेकर जो संवेदनशीलता शुरुआती दौर में दिखाई थी, अब उससे वापसी हो रही है। अदाणी ग्रुप के शेयरों में ज्यादा गिरावट दिखाई पड़ी थी, लेकिन यह भी वापसी करता दिखाई दे रहा है। इसी बीच कई सेक्टरों के शेयरों में वृद्धि भी दिखाई दे रही है, यानी हिंडनबर्ग रिपोर्ट का कोई बड़ा असर लंबे समय में नहीं दिखाई देगा, यह तय है।  
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'घबराकर शेयर बेचने से बचें'
शुभम पाहूजा ने कहा कि हिंडनबर्ग एक शॉर्ट सेलिंग फर्म है। इसका काम इसी तरह की रिसर्च कर पैसा कमाना है। पिछली बार ही जिस तरह इसकी रिपोर्ट में छेद दिखाई पड़े थे, उसी के बाद से हिंडनबर्ग की रिपोर्ट को लेकर सवाल खड़े होने लगे थे। उनका कहना है कि निवेशकों को बाजार में भारी बिकवाली से बचने की कोशिश करनी चाहिए। बाजार दोबारा वापसी करता दिखाई पड़ रहा है, ऐसे में बड़ा नुकसान होने की कोई संभावना फिलहाल नहीं है।

सेबी को बनाया निशाना
इस बार शॉर्ट सेलिंग फर्म हिंडनबर्ग ने सीधे अदाणी समूह को निशाना बनाने की बजाय सेबी की चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच को निशाना बनाया था। रिपोर्ट में यह आरोप लगाया गया था कि अदाणी ग्रुप ने जिस ऑफशोर कंपनी के माध्यम से अपने शेयरों में भारी चढ़ाव लाने का प्रयास किया था, बुच उसमें निवेशक हैं। बुच और उनके पति ने इन आरोपों का सिरे से खंडन किया था। 

11 अगस्त की शाम को ही सेबी ने भी एक बयान जारी कर स्पष्ट किया था कि उसके पास आंतरिक ऑडिट प्रणाली बहुत स्पष्ट और मजबूत है। उसने बताया था कि माधबी पुरी बुच ने उन मामलों की जांच से खुद को अलग कर लिया था, जिनके मामले में उनके हित जुड़े हुए बताए जा रहे हैं। हिंडनबर्ग की रिपोर्ट को खारिज करते हुए संस्था ने बताया था कि उसने अब तक 23 मामलों की जांच पूरी कर ली है और केवल एक मामले की जांच चल रही है और वह भी अंतिम दौर में है। जल्द ही इस जांच की अंतिम रिपोर्ट भी आने वाली है।      

पहले घोषणा करती तो बेहतर होता
आर्थिक मामलों के जानकार अरुण कुमार ने अमर उजाला से कहा कि सेबी चीफ ने हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के आने के बाद इस बात की घोषणा की है कि उन्होंने उस ऑफशोर कंपनी में निवेश कर रखा था। नैतिकता यह होनी चाहिए थी कि वे अपने निवेश के बारे में पूरी जानकारी पहले ही दे दी होतीं, और अदाणी मामले की जांच होने तक स्वयं को सेबी के कामकाज से मुक्त कर लेतीं। 


अरुण कुमार ने कहा कि न्यायपालिका में किसी तरह हित जुड़ने पर न्यायाधीश लोग संबंधित केसों की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लेते हैं। यदि माधबी पुरी बुच भी नैतिकता के उच्च मापंड स्थापित करते हुए अपने आपको अदाणी समूह से जुड़े मामलों की जांच से खुद को अलग कर लेतीं तो आज यह परिस्थिति न पैदा होती। उन्होंने कहा कि अभी यह कोई नहीं कह सकता कि माधबी ने किसी तरह से कुछ गलत किया है, लेकिन बेहतर मापदंड स्थापित करते हुए यदि उन्होंने अपने इन निवेशों का पहले ही खुलासा कर दिया होता तो आज हिंडनबर्ग की दूसरी रिपोर्ट बेमानी हो जाती।
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