EXCLUSIVE: हिमांशी ने खुद नहीं चलाई थी गोली, हत्या की आशंका!
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बसपा के राज्यसभा सदस्य एवं राष्ट्रीय महासचिव नरेंद्र कश्यप की पुत्रवधु और पूर्व राज्यमंत्री हीरालाल की बेटी हिमांशी कश्यप की मौत की गुत्थी सुलझ गई है। आगरा विधि विज्ञान प्रयोगशाला की बेलेस्टिक यूनिट ने एक महीने चले परीक्षण के बाद रिपोर्ट दी है, जिससे पता चलता है कि उसने सुसाइड नहीं किया था। उसकी मौत गाजियाबाद स्थित ससुराल में गोली लगने से हुई थी। इस रिपोर्ट से जेल में बंद नरेंद्र कश्यप और उनके परिवार की मुश्किल बढ़ गई हैं।
हिमांशी की शादी नरेंद्र कश्यप के बेटे सागर से हुई थी। वह बदायूं के बसपा नेता एवं पूर्व राज्यमंत्री हीरालाल की बेटी थी। छह अप्रैल को ससुराल में कमरे से अटैच बाथरूम में उसका खून से लथपथ शव मिला था। पास में लाइसेंसी सागर का रिवाल्वर पड़ा था। हीरालाल कश्यप ने दहेज हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें नरेंद्र कश्यप, उनकी पत्नी देवेंद्री, दोनों बेटे सागर और सिद्धार्थ, दोनों बेटी सरिता और शोभा नामजद हैं। नरेंद्र कश्यप, देवेंद्री और सागर जेल में हैं।
नरेंद्र कश्यप ने बताया था कि हिमांशी ने सागर की रिवाल्वर से गोली मारकर सुसाइड किया। गाजियाबाद पुलिस ने रिवाल्वर, शव से निकली गोली और हिमांशी के दाहिने हाथ से लिया गया गन शॉट रिजिड्यू (जीएसआर) परीक्षण के लिए आगरा विधि विज्ञान प्रयोगशाला को भेजा था। जीएसआर के परीक्षण से पता चलता है कि उस हाथ से गोली चलाई गई या नहीं।
सूत्रों ने बताया कि बेलेस्टिक यूनिट में परीक्षण के बाद मंगलवार को रिपोर्ट तैयार की गई। इसके मुताबिक ,जीएसआर रिपोर्ट नेगेटिव है। मतलब गोली हिमांशी ने नहीं चलाई थी। इसका अर्थ यह भी है कि उसकी हत्या की गई थी। अगर हिमांशी ने गोली चलाई होती तो उसके हाथ में बारूद के कुछ कण लगे होते।
सागर की रिवाल्वर से ही चली थी गोली
फोरेंसिक एक्सपर्ट ने बताया कि ऐसे केस में जीएसआर के लिए हाथ धोया जाता है तो कण सैंपल में आ जाते हैं। परीक्षण में बारूद का टेस्ट पॉजिटिव आता है। नेगेटिव का अर्थ है हाथ में बारूद के कण नहीं थे।
हालांकि सिर्फ इस रिपोर्ट से पुलिस निष्कर्ष नहीं निकाल सकती। इसके अलावा पोस्टमार्टम रिपोर्ट, क्राइम सीन का अध्ययन और गवाहों के बयान के आधार पर विवेचना अधिकारी अपनी राय बनाते हैं, लेकिन फोरेंसिक लैब रिपोर्ट के अपने मायने होते हैं। यह रिपोर्ट आज गाजियाबाद पुलिस को मिल जाएगी। इसके बाद जांच की रफ्तार तेज होगी।
परीक्षण में यह भी साफ हुआ है कि गोली उसी रिवाल्वर से चली जो मौका ए वारदात पर पड़ी मिली। इसका लाइसेंस सागर के नाम है। इसमें पहले शव से मिली गोली का परीक्षण किया गया। इस पर कारतूस के पीछे की तरफ बना फायरिंग पिन मार्क, गोली छूटते समय बना इजेक्ट मार्क और नाल से चेंबर से गुजरते समय बना इजेक्ट मार्क देखे गए। इसके बाद इसी बोर की गोली इसी रिवाल्वर से चलाकर देखी गई। इस पर भी तीनों निशान देखे गए। दोनों परीक्षण के निशान का मिलान हो गया।