Himachal Pradesh: हिमाचल की बगावत पर कितनी असरदार है ये संजीवनी? 90 दिन बाद 'ऑपरेशन लोटस-2' के तूफान की आहट
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हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार को फिलहाल संजीवनी मिल गई है, लेकिन इसके असरदार होने को लेकर संदेह है। राज्यसभा चुनाव में हुई हार के बाद पार्टी के केंद्रीय ऑब्जर्वर ने दोनों धड़ों के विधायकों से मिलकर उनकी बात सुनी। कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और हिमाचल प्रदेश के प्रभारी राजीव शुक्ला ने कहा, सारे मतभेद सुलझा लिए गए हैं। सुखविंदर सिंह सुक्खू, सीएम बने रहेंगे। भाजपा का ऑपरेशन लोटस फेल हो गया है। पार्टी की केंद्रीय इकाई से जुड़े सूत्रों का कहना है, अभी हिमाचल प्रदेश पर कांग्रेस हाईकमान की नजर है। जिस तरह से भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर बयान दे रहे हैं कि ये सरकार नहीं बचेगी, पार्टी ने उन्हें गंभीरता से लिया है। अगर कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन नहीं किया, तो 90 दिन बाद 'ऑपरेशन लोटस-2' का तूफान आ सकता है।
सूत्रों ने बताया, हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस के पास पूर्ण बहुमत होते हुए भी राज्यसभा का चुनाव हारना, पार्टी हाईकमान के लिए यह किसी बड़े झटके से कम नहीं है। हिमाचल प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस के पास 40 विधायक थे। भाजपा के 25 विधायक हैं। तीन निर्दलीय विधायकों के समर्थन का दावा किया गया। राज्यसभा चुनाव में हुई क्रॉस वोटिंग ने कांग्रेस के गणित को तार-तार कर दिया। भाजपा उम्मीदवार की जीत हुई। नतीजा, कांग्रेस ने अपने छह विधायकों की सदस्यता रद्द कर दी। अब विधानसभा में कांग्रेस के पास 34 विधायक बचे हैं।
हिमाचल प्रदेश के सियासी संकट में पार्टी हाईकमान ने मुख्यमंत्री सुक्खू सहित कई लोगों पर कार्रवाई का मन बनाया था, लेकिन लोकसभा चुनाव के चलते वह कार्रवाई टाल दी गई। कांग्रेस पार्टी के सूत्रों का कहना है, हिमाचल प्रदेश में अंदरूनी गुटबाजी के चलते राज्यसभा की एक सीट हाथ से निकल गई। जिन विधायकों की सदस्यता रद्द की गई है, वे सभी प्रतिभा सिंह और विक्रमादित्य सिंह के समर्थक बताए जाते हैं। अब उन पर कार्रवाई हो चुकी है। ये प्रतिभा सिंह के लिए बड़ा नुकसान है। ऐसे में प्रतिभा सिंह खेमा अभी पूरी तरह से संतुष्ट नहीं है। हिमाचल प्रदेश को मिली संजीवनी स्थायी नहीं है। इसका असर अगले 90 दिन बाद देखने को मिलेगा। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को सफलता नहीं मिलती है, तो 'ऑपरेशन लोटस-2' होने से इनकार नहीं किया जा सकता। कांग्रेस हाईकमान ने दोनों खेमों से कहा है कि वे लोकसभा चुनाव पर ध्यान दें। कांग्रेस पर्यवेक्षकों ने विधायकों का मन टटोला है कि वे विधानसभा चुनाव में जाने को तैयार हैं। सभी विधायकों ने इस बात से मना कर दिया।
भाजपा के पूर्व सीएम जयराम ठाकुर अपनी रणनीति को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त हैं। उनका कहना है कि सुक्खू सरकार से कांग्रेस के विधायक नाराज हैं। देर-सवेर इस सरकार का गिरना तय है। राज्यसभा जीतने वाले भाजपा के हर्ष महाजन कहते हैं, विधायकों की सदस्यता रद्द होने से कांग्रेस में विरोध नहीं थमेगा। हिमाचल प्रदेश में भाजपा की सरकार बनना तय है।