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Himachal Election: इस राज्य में है 'दस्तूर' की जंग, भाजपा चाहती है तोड़ना, तो कांग्रेस जारी रखने के पक्ष में!

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Fri, 14 Oct 2022 04:04 PM IST
सार

Himachal Election: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने यह दावा किया है कि इस बार वह 'दस्तूर' टूट जाएगा। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की तर्ज पर हिमाचल में भाजपा को लगातार दूसरी बार सरकार बनाने का मौका मिलेगा। चुनाव की घोषणा होने से पहले पीएम नरेंद्र मोदी और पार्टी के शीर्ष नेता कई बार हिमाचल का दौरा कर चुके हैं...

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Himachal Election: BJP and congress both fight with anti-incumbency factor
Himachal Pradesh Election: काफिला रोक पुरानी पेंशन के लिए धरना दे रहे कर्मचारियों से मिलने पहुंची प्रियंका गांधी - फोटो : Agency

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज गया है। शुक्रवार को निर्वाचन आयोग ने चुनाव की घोषणा कर दी है। राज्य में 12 नवंबर को वोट पड़ेंगे और आठ दिसंबर को नतीजे आएंगे। इस पहाड़ी राज्य में दोनों मुख्य दल यानी कांग्रेस और भाजपा, एक 'दस्तूर' के पीछे पड़े हैं। भाजपा इस बार दावा कर रही है कि वह दशकों से चले आ रहे 'दस्तूर' को बदल रख देगी, जबकि कांग्रेस पार्टी उस दस्तूर को बनाए रखने के लिए मैदान में उतरी है। वह दस्तूर आखिर है क्या? हिमाचल प्रदेश की राजनीति में दस्तूर का मतलब, सत्ता परिवर्तन के चक्र से है। वह चक्र हर पांच साल में बदलता रहा है। यानी पांच साल भाजपा, तो पांच साल कांग्रेस पार्टी की सरकार बनती रही है।

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मौजूदा समय में यहां भाजपा की सरकार है, इसलिए वह दस्तूर को तोड़कर लगातार दूसरी बार सत्ता में आना चाहती है। कांग्रेस का प्रयास है कि पहले से चला आ रहा दस्तूर जारी रहे। यानी इस बार हिमाचल प्रदेश की सत्ता, कांग्रेस पार्टी के हाथ में आ जाए।

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कांग्रेस पार्टी के पास नहीं है कोई बड़ा चेहरा

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने यह दावा किया है कि इस बार वह 'दस्तूर' टूट जाएगा। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की तर्ज पर हिमाचल में भाजपा को लगातार दूसरी बार सरकार बनाने का मौका मिलेगा। चुनाव की घोषणा होने से पहले पीएम नरेंद्र मोदी और पार्टी के शीर्ष नेता कई बार हिमाचल का दौरा कर चुके हैं। भाजपा नेताओं को लगता है कि इस बार कांग्रेस पार्टी के पास कोई बड़ा चेहरा नहीं है। वीरभद्र सिंह के निधन के बाद पार्टी को एक मंच पर नहीं लाया जा सका है। कांग्रेस हाईकमान को छोटी-छोटी बातों के लिए राज्य कमेटी में हस्तक्षेप करना पड़ रहा है। हालांकि अब प्रियंका गांधी, हिमाचल प्रदेश का दौरा कर रही हैं। माना जा रहा है कि वे ही इस चुनाव में पार्टी का बड़ा चेहरा रहेंगी।

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प्रियंका गांधी संभालेंगी चुनाव की कमान

भाजपा से जुड़े पदाधिकारियों का कहना है कि संगठनात्मक तौर पर कांग्रेस पार्टी, पहले की तुलना में काफी कमजोर हो चुकी है। पार्टी को इसका नुकसान उठाना पड़ेगा। सोलन में परिवर्तन प्रतिज्ञा रैली के जरिए प्रियंका गांधी अपनी पार्टी का उत्साहवर्धन करने पहुंची हैं। यहां उन्होंने एक रैली को संबोधित किया है। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी राजीव शुक्ला और राज्य अध्यक्ष प्रतिभा सिंह कई दिनों से रैली की तैयारियों में जुटे थे। उनकी रैली का असर शिमला संसदीय क्षेत्र की 17 विधानसभा सीटों पर देखने को मिल सकता है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भले ही उनकी पार्टी में गुटबाजी रही है, लेकिन वे एक साथ और मजबूती से चुनाव मैदान में उतरेंगे। प्रदेश में सत्ता का दस्तूर नहीं बदलेगा। भाजपा को जाना होगा। कांग्रेस पार्टी के नेताओं का कहना है कि प्रदेश में बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी, ये बड़े मुद्दे हैं। भर्तियों में भ्रष्टाचार को लेकर जनता परेशान है। सरकारी कर्मियों को पुरानी पेंशन का लाभ नहीं दिया जा रहा। सेब उत्पादक भी भाजपा सरकार की नीतियों से खुश नहीं हैं। ऐसे में जनता इस बार भाजपा को दूसरा मौका नहीं देगी।

इन समस्याओं को सुलझाने का दावा कर रही भाजपा

कांग्रेस की कई बातों को प्रदेश का शीर्ष भाजपा नेतृत्व भी स्वीकार करता है। इनमें महंगाई, पुरानी पेंशन और सेब उत्पादकों के मुद्दे शामिल हैं। सीएम जयराम ठाकुर खुद यह बात स्वीकार कर चुके हैं कि महंगाई हर चुनाव में मुद्दा होती है। यह केवल भारत की नहीं, बल्कि एक वैश्विक समस्या है। इसके बावजूद, प्रदेश सरकार ने अपने लोगों को राहत देने के लिए हर संभव प्रयास किया है। सेब उत्पादकों की समस्या को दूर किया गया है। जीएसटी को लेकर केंद्र सरकार का फैसला, इन्हें रास नहीं आया था। छह फीसदी जीएसटी के चलते पैकिंग लागत बढ़ गई। अब प्रदेश सरकार, उस जीएसटी का भुगतान अपने खाते से कर रही है। इसके बाद उनकी कोई नाराजगी नहीं है। तीसरा मुद्दा सरकारी कर्मियों का है। पुरानी पेंशन व्यवस्था शुरू करने का निर्णय केंद्र सरकार के हिसाब से तय होगा। अभी जहां भी भाजपा सरकारें हैं, वहां इस मुद्दे पर सरकार का स्पष्ट रुख है। केंद्र सरकार अगर इसमें कुछ बदलाव लाती है तो उसे तुरंत प्रदेश में लागू कर दिया जाएगा।

आप के पास नहीं है एक मजबूत संगठन

प्रदेश में आम आदमी पार्टी को अभी उस तरह से जन समर्थन नहीं मिल रहा है, जैसा कि पंजाब या दिल्ली में मिला है। भाजपा नेताओं का कहना है कि आप के पास अभी एक मजबूत संगठन नहीं है। जो संगठन बना था, वह अब बिखरता जा रहा है। हालांकि प्रदेश इकाई के नेता मानते हैं कि अगर 'आप' को यहां कुछ मत प्रतिशत मिलता है, तो उसे भाजपा को नुकसान नहीं होगा। उससे कांग्रेस के वोट बैंक में ही सेंध लगेगी। दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने कहा, अभी जो दिखाई पड़ रहा है, वह सही नहीं है। भाजपा को चुनाव के बाद सही स्थिति का अंदाजा होगा। हिमाचल प्रदेश में दस्तूर जारी रहेगा, वह टूटेगा नहीं। इस बार कांग्रेस पार्टी की सरकार बनेगी। पार्टी के सभी मौजूदा विधायकों को टिकट दिया जा रहा है। 2017 के चुनाव में 68 विधानसभा सीटों में से कांग्रेस पार्टी को 21 सीटें मिली थीं, जबकि भाजपा को 44 सीटों पर जीत दर्ज हुई थी। भाजपा का वोट प्रतिशत 48.79 प्रतिशत और कांग्रेस का वोट प्रतिशत 41.68 रहा था।

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