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हिमाचल चुनावः जब धूमल ने खोला अनुराग के राजनीति में आने का राज

Mon, 18 Dec 2017 08:01 AM IST
संजय मिश्र, हमीरपुर, हिमाचल
संजय मिश्र, हमीरपुर, हिमाचल Updated Mon, 18 Dec 2017 08:01 AM IST
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himachal election 2017 live result: Dhumal has opened the secret of Anurag's entry in politics
- फोटो : SELF

परिवारवाद के आरोपों पर सफाई देते हुए हिमाचल में भाजपा के मुख्यमंत्री उम्मीदवार प्रेम कुमार धूमल ने कहा है कि अनुराग आज जो भी हैं, वो मेरी वजह से नहीं बल्कि अपनी वजह से हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि उन्हें मेरे साथ जोड़कर परिवारवाद से जोड़ा जाता है। 

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अपने हमीरपुर निवास पर अमर उजाला से बातचीत में धूमल ने कहा कि कई बार मैं यह परिचय देता हूं कि मैं अनुराग का पिता हूं। राजनीति में उसकी रुचि नहीं थी। वह क्रिकेट खेलता था। पंजाब रणजी टीम का वह सदस्य रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर वह अंडर 14 और 17 क्रिकेट टीम का कप्तान रहा है। वह देश के क्रिकेट संस्थानों से भी जुड़ा रहा। 
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वीरभद्र की बदले वाली भावना ने अनुराग को बनाया नेता

बतौर धूमल कांग्रेस और वीरभद्र सिंह की बदले की भावना वाली राजनीति ने अनुराग को नेता बनाया। धूमल के अनुसार जब वे पहली दफे हमीरपुर से चुनाव लड़ने वाले थे, तभी उनके दूसरे पुत्र अरुण ने इंजीनियरिंग में दाखिला ले लिया। उसी वक्त अनुराग ने क्रिकेट का करियर छोड़ कर परिवार की देखभाल करनी शुरू कर दी। उसके बाद वह हिमाचल क्रिकेट एसोसिएशन से जुड़ गया।

2003 में जब हमारी सरकार चली गई, तब वीरभद्र सिंह ने बदले की भावना से अनुराग पर कई झूठे मुकदमे लाद दिए। उन मुकदमों से लड़ते-लड़ते अनुराग की छवि सामंती मानसिकता के खिलाफ लड़ने वाले प्रतीक के रूप में बन गई। सामंती सोच के खिलाफ लड़ाई का वह चेहरा बन गया। क्रिकेट में सक्रियता की वजह से वह अरुण जेटली जी के संपर्क में आया। उन्होंने भी उसकी क्षमता का आंकलन किया।

धूमल ने बताया कैसे अचानक राजनीति में आए अनुराग

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अनुराग की राजनीतिक एंट्री का खुलासा करते हुए धूमल ने बताया कि 2007 में हमीरपुर लोकसभा सीट के उपचुनाव होने थे। उसके ठीक 6 माह बाद राज्य विधानसभा के भी चुनाव होने थे। उपचुनाव के लिए हमने कई नाम दिए थे। पार्टी ने कहा आपको चुनाव लड़ना है, मैंने कहा नहीं। 6 माह बाद विधानसभा के चुनाव होने हैं।

मैं वहां चुनाव लड़ूंगा, मगर अटलजी के आगे किसी की नहीं चली। धूमल बताते हैं कि अटल जी की वह अंतिम चुनाव समिति बैठक थी। उस दिन संसदीय बोर्ड की बैठक में वे शांत होकर चुपचाप बैठे थे। बाद में एकदम से बोले सुनिए, तो सब शांत हो गए। तब अटल जी ने कहा कि यदि हमें हिमाचल में सरकार बनानी है तो हमीरपुर जीतना बहुत जरूरी है और हमीरपुर जीतने के लिए धूमल जी आपका लड़ना जरूरी है।

उन्होंने आगे कहा कि धूमल जी आप लड़िए, जीतिए और सरकार भी बनाइए। बतौर धूमल, उन्होंने तब अटलजी से कहा सर आप मुझे भावनात्मक रूप से ब्लैकमेल कर रहे हैं। आप जानते हैं कि मैं आपका बहुत आदर करता हूं। तब सुषमा स्वराज ने बात पकड़ ली और सुषमा ने कहा कि यदि यह पैकेज है तो हमें कोई दिक्कत नहीं है। मेरी ओर इशारा करते हुए कहा सरकार को भी आप लीड करेंगे। बतौर धूमल, सुषमा से उनकी बात चल ही रही थी कि अटल जी ने कहा सुनो और उन्होंने अपना चश्मा टेबल पर रख दिया।

उस दिन वे एक बैग लेकर बैठक में आए थे। धूमल ने बताया कि अटलजी ने उनसे कहा कि उनके घुटनों में आजकल दर्द बहुत होता है। उसके बाद उठे और बैठक से चल दिये। उसके बाद मैंने आडवाणी जी से कहा कि मुझे उपचुनाव नहीं लड़ना, लेकिन आडवाणी ने कुछ भी नहीं कहा। फिर मैंने बगल में बैठे गोपीनाथ मुंडे से कहा कि यदि आज हमारा दोस्त प्रमोद होता तो इस वक्त हमारे साथ खड़ा होता। लेकिन सबने कहा कि अटलजी जब बोल देते हैं तो उस पर कोई कुछ नहीं कर सकता।
 
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