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हिमाचल चुनावः शिमला में एक 'निर्दलीय' ने अटकाई भाजपा और कांग्रेस की सांसें

Tue, 07 Nov 2017 07:11 PM IST
हरेन्द्र सिंह मोरल, अमर उजाला डॉट कॉम के लिए, शिमला
हरेन्द्र सिंह मोरल, अमर उजाला डॉट कॉम के लिए, शिमला Updated Tue, 07 Nov 2017 07:11 PM IST
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Himachal assembly elections: An Independent candidate created Challenges for BJP and Congress 
प्रतीकात्मक तस्वीर

हिमाचल के विधानसभा चुनावों में मतदान के लिए अब बस दो दिन शेष रह गए हैं। ऐसे में अंतिम दिनों में सभी दलों ने पूरी ताकत झोंक दी है। वोटरों को अपने पक्ष में करने के लिए प्रत्याशी घरों से लेकर दुकान और मंदिरों से लेकर गुरुद्वारे, हर जगह मत्‍था टेक रहे हैं। राज्य में चुनावी मौसम का जायजा लेने निकली अमर उजाला डॉट कॉम की टीम ने भी शहर के राजनीतिक ताप को परखने का प्रयास किया। 

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शिमला में यूं तो मुख्य मुकाबला हमेशा से ही भाजपा और कांग्रेस के बीच रहा है। भाजपा के ही सुरेश भारद्वाज बीती दो योजनाओं से शहर के विधायक हैं, उन्हें टक्कर दे रहे हैं कांग्रेस के हरभजन सिंह भज्जी। इसके अलावा सीपीएम भी हमेशा से शिमला में एक मजबूत कड़ी रहा है, जिसकी ओर से शहर के पूर्व मेयर संजय चौहान मैदान में हैं। लेकिन इन तीन प्रत्याशियों के अलावा एक प्रत्याशी और है जिसने शिमला की इस लड़ाई को सबसे रोचक बना दिया है। 
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ये हैं कांग्रेस के ही पूर्व नेता और मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खास हरीश जनार्था। शहर के पूर्व डिप्टी मेयर रहे जनार्था का नाम कुछ दिन पहले तक कांग्रेस के बड़े नेताओं में शुमार होता था, पिछले चुनाव में वह कांग्रेस के टिकट पर ही मैदान में उतरे थे और मात्र 628 वोटों से भाजपा के सुरेश भारद्वाज से पीछे रह गए थे।


इसी बिनाह पर जनार्था ने इस बार भी टिकट का दावा किया, मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का भी उन्हें समर्थन प्राप्त था, लेकिन कांग्रेस हाईकमान से आई लिस्ट में जनार्था पूर्व विधायक हरभजन सिंह भज्जी के हाथों मात खा बैठे। भज्जी को कांग्रेस के बड़े नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा का खास माना जाता है इसलिए उनको टिकट दिए जाने में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की पसंद को भी दरकिनार कर दिया गया। नतीजतन, इसके विरोध में जनार्था ने बगावत का ऐलान कर दिया। इसके बाद उन्होंने निर्दलीय ही चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया। 

जनार्था का दावा- कांग्रेस के 90 फीसदी कार्यकर्ता उनके साथ

Himachal assembly elections: An Independent candidate created Challenges for BJP and Congress 

खास बात ये है कि जनार्था को चुनाव लड़वाने में कांग्रेस के कुछ नेता पार्टी से बगावत कर खुलकर उनके साथ आ गए हैं। हालांकि राजनीतिक मजबूरियों के चलते मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह इस मुद्दे पर ज्यादा कुछ नहीं कर पाए लेकिन माना जा रहा है कि जनार्था के साथ जाने वाले कांग्रेस कार्यकर्ताओं को एक तरह से उनका मौन समर्थन हासिल है। इसलिए कार्रवाई से हाथ खींचे जा रहे हैं। जनार्था के बारे मे कहा जाता है कि जब वह पर्यटन निगम के उपाध्यक्ष थे उस समय उन्होंने शहर में कई विकास कार्य कराए, मुख्यमंत्री से नजदीकी को भी वह खुलकर भुनाते रहे हैं, जिसके चलते उन्होंने शहर में काफी विकास कार्य कराए।

वहीं उनके निर्दलीय उतरने से कांग्रेस भी असहज स्थिति में है, क्योंकि अधिकतर कार्यकर्ता हरीश जनार्था के समर्थन में खुले या चोरी छिपे प्रचार में लगे हुए हैं। जनार्था को शहर के संजौली इलाके में काफी लोकप्रिय माना जाता है जो शिमला का ऊपरी इलाका है। जनार्था यहीं के रहने वाले हैं। इस दौरान हमारी कुछ स्‍थानीय नेताओं से बात हुई। 62 साल के अकरम मूल रूप से यूपी के सहारनपुर के रहने वाले हैं, लेकिन पिछले 30 सालों से यहीं रह रहे हैं। उनका यहां सब्जी का काम है, जब उनसे पूछा गया कि चुनाव में किसका माहौल है, तो अकरम बताते हैं कि लहर तो यहां दो ही हैं एक मोदी और दूसरा जनार्था की। मैंने पूछा ऐसा क्यों, अकरम बोले जनार्था जब शहर के डिप्टी मेयर थे तब यहां खूब काम कराया। 

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कुछ दिन पहले तक हिमाचल प्रर्यटन निगम के उपाध्यक्ष रहे तब भी काम करवाने में पीछे नहीं रहे। वैसे हमारी बातचीत के बीच ही जनार्था का काफिला भी वहां पहुंच गया। गाड़ी से उतरकर जनार्था चौक के गुरुद्वारे में प्रार्थना करने के लिए पहुंचे। बाहर निकले तो अमर उजाला से बातचीत में दावा किया कि कांग्रेस के 90 फीसदी कार्यकर्ता उनके साथ हैं। उन्होंने अपना टिकट कटवाने के आरोप मौजूदा प्रत्याशी हरभजन सिंह भज्जी पर लगाया। बोले- पिछली बार भी इन्ही लोगों ने भीतरघात कर उनकी हार तय कर दी थी और अब उन्हीं लोगों को इसके ईनाम के रूप में पार्टी ने टिकट दे दिया। अब मेरे समर्थकों ने कहा है कि चुनाव लडो तो चुनावी मैदान में हूं। बातचीत के इसी सिलसिले के बीच मौजूदा विधायक और भाजपा प्रत्याशी सुरेश भारद्वाज भी अपनी पुरानी वैगनआर में सवार होकर संजौली पहुंच गए। 


हालांकि बीच चौराहे हरीश जनार्था का काफिला देख वह आगे बढ़ गए। हालांकि प्रचार के मामले कांग्रेस प्रत्याशी हरभजन सिंह भज्जी थोड़ा पिछड़ते नजर आए। शहर में उनके कई जगह बैनर पोस्टर तो दिखाई दिए जिनमें वह आनंद शर्मा के साथ दिखे लेकिन उनको लेकर लोगों में खास उत्साह देखने को नहीं मिला। दूसरी ओर उनके मुकाबले सीपीएम के संजय चौहान काफी मेहनत करते दिखे। एक दिन पहले ही मॉल रोड पर सफर के दौरान सैकडों लोगों के काफिले के साथ वह प्रचार के लिए निकले। बहरहाल शिमला की यह सीट भाजपा के लिए तो नाक का प्रश्न बन ही चुकी है कांग्रेस की प्रतिष्ठा भी यहां दांव पर लगी है। दूसरी ओर जनार्था के पास खोने के लिए कुछ नहीं है लेकिन जीतने के लिए सबकुछ है।

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