हिमाचल चुनाव, "साहब... कांग्रेस ने काम किया पर जीतेंगे मोदीजी ही"
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पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में नवंबर की शुरूआत के साथ ही मैदानी इलाकों के मुकाबले सर्दी यहां ज्यादा तेजी से दस्तक दे रही है, कालका के रास्ते जैसे-जैसे आप राजधानी शिमला के लिए आगे बढ़ते हैं मंद-मंद गहराता कोहरा और लगातार गिरता पारा आपको ठंड के आगोश में लेने के लिए तैयार रहता है। लेकिन इस मौसमी ठंड से बेअसर सूबे की फिजा विधानसभा चुनावों के चलते पूरी तरह गर्म है।
सर्द मौसम और रोज चढ़ते राजनीतिक पारे के बीच अमर उजाला डॉटकॉम की टीम ने राज्य में होने वाले विधानसभा चुनावों का जायजा लिया। बाकी मीडिया की तरह हमारा पहला प्रयास भी यह जानने का रहा कि मौजूदा विधानसभा चुनावों में इस पहाड़ी राज्य में किस दल की लहर है? क्या बाकी राज्यों की तरह यहां भी फिलहाल प्रधानमंत्री मोदी का असर बाकी है, या नोटबंदी और जीएसटी ने उनके प्रभाव को कम कर दिया है?
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सवाल ये भी सामने था कि राज्य की मौजूदा वीरभद्र सिंह सरकार को लेकर लोग क्या सोचते हैं? कालका से कुछ दूर चलते ही हिमाचल के सीमावर्ती कस्बे परवाणू में एंट्री करते ही हमें अपने सवाल का जवाब मिलना शुरू हो गया। शुरूआत हुई स्कूली छात्राओं से बातचीत से, प्रिया शर्मा नाम की छात्रा से जब बात की गई तो अन्य युवाओं की तरह मोदी ही उसकी पहली पसंद थे। सवाल हुआ, क्यों? जवाब- "वो देश के लिए काफी कुछ कर रहे हैं और ईमानदार भी हैं।"
मीडिया को नजदीक देखकर बराबर में ही मिठाइयों की दुकान करने वाले बुजुर्ग सत्यप्रकाश ने बात करने की इच्छा जताई। हम उनके पास पहुंचे तो बड़े उत्साह के साथ बोले- "देखिए साहब सरकार सारी बढ़िया हैं वीरभद्र सिंह ने भी काम बढ़िया किया है पर जीतेंगे मोदी ही।" हमने हैरत से पूछा कि मोदी जी तो यहां से लड़ नहीं रहे उनकी पार्टी के स्थानीय उम्मीदवार तो डॉ. राजीव सैजल हैं जो दो बार से स्थानीय विधायक भी हैं, चुनाव तो वो लड़ रहे हैं।
इस पर उनका कहना था कि, जी... यहां स्थानीय नेता को देखकर कोई वोट नहीं दे रहा। कांग्रेस को वोट राजा साहब (मुख्यमंत्री वीरभद्र को स्थानीय लोग राजा साहब के नाम से ही पुकारते हैं) के नाम पर मिलेगा और भाजपा को प्रधानमंत्री मोदी के नाम पर...।
जीएसटी नोटबंदी से परेशानी तो हुई लेकिन वोट मोदी को ही
बता दें कि परवाणू कस्बा कसौली विधानसभा सीट के अंतर्गत आता है। यहां से भाजपा के दो बार से विधायक राजीव सैजल एक बार फिर प्रत्याशी हैं। जिनकी टक्कर है पूर्व सांसद और कई बार के विधायक रहे कृष्णदत्त सुल्तानपुरी के बेटे विनोद सुल्तानपुरी से। युवा विनोद को स्थानीय युवाओं में समर्थन तो मिल रहा है लेकिन मोदी मैजिक के सामने उनका जादू चलने की संभावना कम ही है।
साफ था कि इस पहाड़ी राज्य में अभी मोदी लहर बाकी है। इसके बाद यहां से हमारा काफिला निकला सोलन शहर के लिए। ऊंची-ऊंची बिल्डिंगों और बड़े बड़े शोरूम के कारण पहली नजर में सोलन की पहचान एक संपन्न शहर की ही नजर आती है। जहां अधिकतर लोग अपने अपने व्यापार में ही लगे हुए हैं। इन्हीं में से एक हैं ताराचंद, जिनकी भाजपा कार्यालय के नीचे खाने-पीने की एक छोटी सी दुकान है। दोपहर के समय भूख लगी तो हमने भी यहां का रुख कर लिया। कढ़ी चावल के ऑर्डर के साथ ही बातों का सिलसिला शुरू हो गया।
इस दौरान यहां बैठे कई लोगों से बात हुई, स्थानीय मुद्दों के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि, "कोई बड़ी समस्या तो यहां नहीं है। बिजली पूरी आती है पानी की भी समस्या नहीं है। सड़कें हमारे यहां लगातार बन रही हैं...।" मैंने पूछा तो फिर आप वोट किन मुद्दों पर देते हैं? और किसे वोट करेंगे। बहुत सोचकर उन्हीं में से एक ने जवाब दिया, "रोजगार और कानून व्यवस्था के आधार पर।"
नोटबंदी से आपके काम पर कुछ असर पड़ा, इसपर दुकान चलाने वाले बुजुर्ग ताराचंद का कहना था कि "हम पर क्या, उसका तो सब पर असर पड़ा। लोगों के काम धंधे चौपट हो गए, सालभर बाद भी हम उससे उबर नहीं पाए।" तो चुनावों में मोदी जी की पार्टी को वोट देंगे... इस पर बुजुर्ग ने मुस्करा कर ही अपनी सहमति का प्रदर्शन कर दिया।
टिकट देने के मामले में भाजपा की रही खास रणनीति
कुछ ऐसा ही हाल शहर के बाकी तबकों में भी देखने को मिला जहां, देशभर में जीएसटी लागू करने को लेकर व्यापारी वर्ग में भाजपा के प्रति कुछ नाराजगी देखने को तो मिली लेकिन वोट देने के नाम पर वह भी भाजपा के पक्ष में ही खड़े नजर आए। वैसे सोलन की सदर सीट पर हिमाचल का सबसे रोमांचक मुकाबला भी है, जहां से स्थानीय कांग्रेस प्रत्याशी हैं कर्नल धनीराम शांडिल, जो मौजूदा विधायक के साथ साथ वीरभद्र सरकार में मंत्री भी हैं।
खास बात ये है कि उनका मुकाबला उनके अपने ही दामाद डा. राजेश कश्यप से है, जिन्हें भाजपा ने जानबूझकर उनके सामने उतारा है। कर्नल शांडिल सेना से रिटायर हैं तो उनके प्रतिद्वंदी यानि उनके दामाद डा. राजेश कश्यप शिमला मेडिकल कालेज में डॉक्टर रहे हैं। सोलन के बाद हम वापस शिमला के लिए निकले।
इसी बीच कुछ देर के लिए हम शिमला ग्रामीण सीट पर भी रुके, जहां से मुख्यमंत्री वीरभद्र के पुत्र और उनके राजनीतिक उत्तराधिकारी माने जा रहे विक्रमादित्य कांग्रेस की ओर से ताल ठोंक रहे हैं। उनका मुकाबला है भाजपा के डा. प्रमोद शर्मा से, जिन्हें कभी उनके पिता वीरभद्र सिंह का करीबी माना जाता था।
स्थानीय लोगों से बातचीत करने पर पता चला कि मुकाबला बराबरी का है। प्रमोद शर्मा बेशक नए हैं लेकिन हैं पके हुए खिलाड़ी, भाजपा ने यूं ही उन पर दांव नहीं लगाया है। इसी बीच निगाह चेहरे पर प्रधानमंत्री मोदी का मुखौटा लगाए घूम रहे कुछ बच्चों पर पड़ी, जिन्हें उनकी मां स्कूल से लेकर घर लौट रही थीं। पूरे उत्साह से झूमते और शोर मचाते बच्चे घर की ओर लौट रहे थे और लोगों की निगाहें उन्हीं पर जमीं हुईं थीं।