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Hindi News ›   India News ›   Hijab controversy: Now entry of All India Muslim Personal Law Board, Supreme Court said - Karnataka High Court misinterpreted Islam

हिजाब विवाद : अब ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की एंट्री, सुप्रीम कोर्ट में कहा- कनार्टक हाईकोर्ट ने इस्लाम की गलत व्याख्या की

Mon, 28 Mar 2022 11:00 AM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Mon, 28 Mar 2022 11:00 AM IST
सार

दरअसल, कर्नाटक हाईकोर्ट ने 15 मार्च को अपने फैसले में कहा था कि हिजाब इस्लाम की अनिवार्य प्रथा नहीं है। हाईकोर्ट ने स्कूल व कॉलेज में हिजाब पर प्रतिबंध के कर्नाटक सरकार के फैसले को सही ठहराया था।

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Hijab controversy: Now entry of All India Muslim Personal Law Board, Supreme Court said - Karnataka High Court misinterpreted Islam
कर्नाटक हिजाब विवाद - फोटो : पीटीआई

विस्तार

कर्नाटक से उठे हिजाब विवाद में अब ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) की एंट्री हो गई है। बोर्ड ने कर्नाटक कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले को इस्लाम के आधार पर चुनौती दी है। उसका कहना है कि हाईकोर्ट ने कुरान और हदीस की गलत व्याख्या की है।
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दरअसल, कर्नाटक हाईकोर्ट ने 15 मार्च को अपने फैसले में कहा था कि हिजाब इस्लाम की अनिवार्य प्रथा नहीं है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने स्कूल व कॉलेज में हिजाब पर प्रतिबंध के कर्नाटक सरकार के फैसले को सही ठहराया था।
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अब तक यह मामला छात्राओं व उनसे जुड़े संगठनों द्वारा उठाया जा रहा था। सुप्रीम कोर्ट में इससे संबंधित कई याचिकाएं लंबित हैं। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने परीक्षाओं को देखते हुए इस मामले में जल्दी सुनवाई के आग्रह को खारिज कर दिया था। शीर्ष कोर्ट ने कहा था कि इस विवाद का परीक्षाओं से कोई लेना-देना नहीं। कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील से मामले को संवेदनशील नहीं बनाने का भी आग्रह किया था। 
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ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड1973 में गठित एक गैर-सरकारी संगठन है। यह देश में मुस्लिमों के पर्सनल लॉ की सुरक्षा व अन्य मुस्लिम हितों की रक्षा के लिए कार्यरत है। 

पीएफआई जता चुका है समर्थन
पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) ने कर्नाटक के शिक्षण संस्थानों में हिजाब पर प्रतिबंध को लेकर राज्य की मुस्लिम लड़कियों के साथ खड़े होने का एलान किया है। मलप्पुरम राष्ट्रीय कार्यकारिणी परिषद की बैठक में पारित प्रस्ताव की जानकारी देते हुए पीएफआई ने गत शुक्रवार को मुस्लिम धार्मिक प्रतीकों पर कथित प्रतिबंध की निंदा भी की।  पीएफआई ने एक बयान में कहा, 'कर्नाटक की भाजपा सरकार का सिर्फ मुस्लिम धार्मिक प्रतीकों पर रोक लगाना साफ करता है कि इसका विभाजनकारी राजनीतिक उद्देश्य है। दुर्भाग्य से हाईकोर्ट भी यह देखने में असफल रहा और उसने एक ऐसी प्रथा के खिलाफ फैसला लिया जिसका उपयोग मुस्लिम महिलाएं कई सदियों से करती आ रही हैं।'

हाईकोर्ट के फैसले को संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ बताया
बयान में आगे कहा गया कि हिजाब पर प्रतिबंध को वैध बताने वाला कर्नाटक हाईकोर्ट का फैसला हमारे देश के संविधान के मूल्यों और धार्मिक स्वतंत्रता के वैश्विक सिद्धांत के पूरी तरह खिलाफ है। पीएफआई ने कहा कि हाईकोर्ट का यह फैसला देश में सामाजिक बहिष्कार को और बढ़ावा देगा और धार्मिक उत्पीड़न का एक और बहाना बनेगा।


हिजाब पर फैसला देने वाले जजों को धमकाने वाला दूसरा आरोपी गिरफ्तार
हिजाब मामले पर फैसला सुनाने वाले कर्नाटक हाईकोर्ट के जजों को जान से मारने की धमकी देने वाले दूसरे आरोपी जमाल मोहम्मद उस्मानी को भी बेंगलुरू पुलिस ने तमिलनाडु से पकड़ लिया है। इससे पहले पुलिस ने कोवाई रहमतुल्लाह को पकड़ा था। ये दोनों ही तमिलनाडु के इस्लामी संगठन तौहीद जमात के सदस्य हैं। धमकी वाले वीडियो में दोनों ने एलान किया था कि हिजाब को लेकर उडुपी की लड़कियों की याचिका खारिज करने वाले जजों को जान से मार डाला जाएगा।
 
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