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हाईवे के धूल, धुंए से काला पड़ा अकबर का मकबरा
एजेंसी / आगरा
Updated Tue, 12 Dec 2017 01:34 AM IST
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अकबर मकबरा
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भारी प्रदूषण से ताजमहल के साथ शहर में मौजूद अन्य संगमरमरी स्मारकों की चमक कम हो रही है, साथ ही ताज की तरह रखरखाव नहीं होने से उनके अस्तित्व पर भी संकट मंडरा रहा है। मुगल शहंशाह अकबर के मकबरे, सिकंदरा पर हाईवे के धूल और धुंए से कालिख जमी हुई है। एएसआई साइंस ब्रांच ने सिकंदरा में प्रदूषण के सैंपल लिए हैं और हर महीने धूल कणों के जमाव का रिकार्ड तैयार किया जा रहा है।
नेशनल हाईवे नंबर दो से सटे सिकंदरा स्थित अकबर के मकबरे की संगमरमरी मीनारें और नकली कब्र के चारों ओर मौजूद संगमरमरी जालियां प्रदूषण के कारण पीली और काली पड़ रही हैं। ताजमहल के 500 मीटर के दायरे में तो वाहनों का प्रतिबंध है, लेकिन सिकंदरा में गेट के सामने ही हाइवे है, जहां से प्रतिदिन हजारों ट्रक और वाहन जहरीला धुआं छोड़ते निकलते हैं। चौराहे पर लग रहे जाम और अब हाइवे चौड़ीकरण के लिए की जा रही खोदाई से धूल कण स्मारक की दीवार और मीनार पर जमा हो गए हैं।
पढ़ें- जब मुगल बादशाह औरंगजेब बन गए थे शाकाहारी
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एएसआई साइंस ब्रांच हर महीने धूल कणों का ब्योरा एकत्र कर रही है। मीनारों पर जमा प्रदूषण की परत के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे गए हैं। 1605 से 1613 के बीच तामीर किए गए सिकंदरा में लाल पत्थर और संगमरमर को प्रदूषण से हो रहे नुकसान का अध्ययन भी किया जा रहा है। अकबर के मकबरे में मीनारों पर धूल कणों और प्रदूषण का असर पड़ रहा है। ताजमहल के बाद सिकंदरा में भी क्ले पैक ट्रीटमेंट कराया जाएगा ताकि चमक बरकरार रह सके।
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नेशनल हाईवे नंबर दो से सटे सिकंदरा स्थित अकबर के मकबरे की संगमरमरी मीनारें और नकली कब्र के चारों ओर मौजूद संगमरमरी जालियां प्रदूषण के कारण पीली और काली पड़ रही हैं। ताजमहल के 500 मीटर के दायरे में तो वाहनों का प्रतिबंध है, लेकिन सिकंदरा में गेट के सामने ही हाइवे है, जहां से प्रतिदिन हजारों ट्रक और वाहन जहरीला धुआं छोड़ते निकलते हैं। चौराहे पर लग रहे जाम और अब हाइवे चौड़ीकरण के लिए की जा रही खोदाई से धूल कण स्मारक की दीवार और मीनार पर जमा हो गए हैं।
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