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High Court: 'अलग हुए पति-पत्नी अपने अहंकार की संतुष्टि के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं', हाईकोर्ट की टिप्पणी

Thu, 03 Apr 2025 03:51 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: नितिन गौतम Updated Thu, 03 Apr 2025 03:51 PM IST
सार

उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता महिला की याचिका खारिज करते हुए उस पर 5000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। पीठ ने कहा कि यह याचिका कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन है और इससे अदालत का कीमती समय बर्बाद हुआ है।

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high court says estranged spouses can go to any extent to satisfy ego on plea over child birth record
बॉम्बे हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई

विस्तार

बॉम्बे उच्च न्यायालय ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए एक अहम टिप्पणी की। पीठ ने कहा कि अलग हुए माता-पिता अपने अहंकार की संतुष्टि के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। पीठ ने एक महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह बात कही। महिला ने अपने बच्चे के जन्म प्रमाण पत्र में सिर्फ अपना नाम दर्ज कराने की मांग की थी। उच्च न्यायालय ने महिला की याचिका खारिज कर दी। 
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'वैवाहिक विवाद कई मुकदमों को जन्म देते हैं'
उच्च न्यायालय की औरंगाबाद पीठ के जस्टिस मंगेश पाटिल और जस्टिस वाई जी खोबरागड़े ने 28 मार्च को दिए आदेश में कहा कि परिजनों में से कोई भी अपने बच्चे के जन्म प्रमाण पत्र को लेकर किसी अधिकार इस्तेमाल नहीं कर सकते। पीठ ने कहा कि ये याचिका इस बात का उदाहरण है कि वैवाहिक विवाद किस तरह से कई अन्य मुकदमों को जन्म देते हैं। उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता महिला की याचिका खारिज करते हुए उस पर 5000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। पीठ ने कहा कि यह याचिका कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन है और इससे अदालत का कीमती समय बर्बाद हुआ है। 
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क्या है मामला
38 वर्षीय महिला ने याचिका दायर कर उसके बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र सिर्फ उसके नाम पर जारी करने की मांग की थी। महिला ने कहा कि बच्चे का पिता बुरी आदतों का शिकार है और उसने कभी बच्चे की शक्ल भी नहीं देखी है। ऐसे में जन्म प्रमाण पत्र पर सिर्फ उसका नाम होना चाहिए। पीठ ने कहा कि पिता अगर बुरी आदतों का शिकार है तो भी महिला एकल परिजन होने का दावा नहीं कर सकती। उच्च न्यायालय ने कहा कि ये दिखाता है कि अलग हुए पति-पत्नी अपने अहं को संतुष्ट करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।  

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