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Karnataka: महिला ने एक दशक में नौ शिकायतें दर्ज कराई, हाईकोर्ट का निर्देश- शिकायतकर्ता का पता लगाए पुलिस

Wed, 11 Sep 2024 11:13 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ज्योति भास्कर Updated Wed, 11 Sep 2024 11:13 PM IST
सार

कर्नाटक हाईकोर्ट ने राज्य की पुलिस को निर्देश दिया है कि बीते एक दशक में नौ शिकायतें दर्ज कराने वाली महिला का पता लगाए। न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना की एकल पीठ ने फैसला पारित किया। हाईकोर्ट ने कहा, पुलिस थानों को महिला की शिकायतों का रिकार्ड रखना चाहिए। अतिरिक्त शिकायतें दर्ज कराने का प्रयास किए जाने की सूरत में अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।

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High Court Order Karnataka Police to track woman who filed harassment complaints
कर्नाटक उच्च न्यायालय (फाइल) - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

कर्नाटक हाईकोर्ट ने पुलिस को उत्पीड़न की कई शिकायतें दर्ज कराने वाली महिला का पता लगाने का आदेश दिया। महिला ने पिछले एक दशक में नौ अलग-अलग शिकायतें दर्ज कराई हैं। महिला ने यौन उत्पीड़न, आपराधिक धमकी और भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498-ए सहित अन्य अपराधों का आरोप लगाया है। कानून की इस धारा के तहत  महिला के पति या पति के रिश्तेदार पर उसके साथ क्रूरता करने के आरोप लगाए जाते हैं। अदालत ने इस बात पर भी जोर दिया कि नई शिकायत दर्ज करने से पहले पुलिस को प्रारंभिक जांच जरूर करनी चाहिए। ऐसा करने से बार-बार और झूठे मामले दर्ज कराने से रोका जा सकेगा।
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महिला की शिकायतों को रद्द करने का अनुरोध
न्यायमूर्ति एम नागप्रसन्ना ने कहा, कानून का मकसद लोगों के खिलाफ अपराधों का अंधाधुंध पंजीकरण रोकना है। हमने ऐसे दस मामले देखे हैं। पुलिस को निर्देश ग्यारहवें मामले को रोकने के लिए दिया गया है। अदालत ने यह फैसला महिला के पति और ससुराल वालों द्वारा दायर याचिका को स्वीकार करते हुए सुनाया। इसमें महिला की शिकायतों को रद्द करने का अनुरोध किया था। न्यायमूर्ति ने कहा, महिला ने आईपीसी की धारा 323, 498ए, 504, 506 और 149 के तहत आरोप लगाए हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता मूर्ति डी नाइक ने महिला की पिछली शिकायतों के साक्ष्य प्रस्तुत किए। इन्हें अभियोजन पक्ष की तरफ से सत्यापित किया गया था।
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सुप्रीम कोर्ट ने हनी ट्रैप का भी जिक्र किया
पिछले नौ मामलों की समीक्षा के बाद अदालत ने पाया कि कई पुरुषों पर गलत तरीके से आरोप लगाए गए। उन्हें हिरासत में लिया गया और बाद में शिकायतकर्ता की ओर से सबूतों या सहयोग की कमी के कारण बरी कर दिया गया। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि महिला की हरकतें आरोपी को परेशान करने वाली लग रही हैं। उसका बर्ताव 10 से अधिक पुरुषों को फंसाने के मकसद से 'हनी ट्रैप' की तरह लगता है। अदालत ने अपनी अहम टिप्पणी में यह भी कहा कि शिकायतकर्ता बिना किसी वैध कारण के मामले दर्ज करा रही है। जिन लोगों पर मुकदमे चलाए गए, सभी बरी हो गए।
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अगस्त-सितंबर 2022 का मामला
वर्तमान मामले में महिला ने अपने पति, परिवार, 75 वर्षीय महिला पर दुर्व्यवहार करने के आरोप लगाए हैं। चौंकाने वाली बात यह भी है कि एक शख्स से वह कभी मिली ही नहीं। रिपोर्ट के मुताबिक कथित घटनाएं 28 अगस्त से 22 सितंबर, 2022 के बीच हुईं। अदालत ने आरोपों को निराधार पाया। न्यायमूर्ति नागप्रसन्ना ने कहा कि कोर्ट के फैसले का मकसद कानूनी प्रणाली के भावी दुरुपयोग को रोकना और निर्दोष व्यक्तियों को झूठे आरोपों से बचाना है।
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