{"_id":"5eded78d8ebc3e907234bec6","slug":"health-ministry-took-this-big-step-for-relief-to-severe-corona-patients","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्वास्थ्य मंत्रालय ने गंभीर कोरोना मरीजों को राहत देने के लिए उठाया यह बड़ा कदम","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
स्वास्थ्य मंत्रालय ने गंभीर कोरोना मरीजों को राहत देने के लिए उठाया यह बड़ा कदम
Tue, 09 Jun 2020 05:57 AM IST
श्रीधर मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: श्रीधर मिश्रा
Updated Tue, 09 Jun 2020 05:57 AM IST
विज्ञापन
फाइल फोटो
- फोटो : PTI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोविड-19 के गंभीर मरीजों की प्रायोगिक दवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए एक मसौदा अधिसूचना जारी की है। इसके तहत दुनिया भर में तीसरे चरण के क्लिनिकल ट्रायल में चल रही किसी भी अप्रमाणित दवा के ‘करुणामय उपयोग’ के लिए सीमित मात्रा में आयात और निर्माण की अनुमति होगी। इसके लिए किसी अस्पताल या चिकित्सा संस्थान की तरफ से दवा का परामर्श किया जाना जरूरी है।
विज्ञापन
स्वास्थ्य मंत्रालय ने पांच जून को जारी मसौदे में नई दवा और क्लीनिकल ट्रायल नियमावली में संशोधन किया। इसके तहत कोई अस्पताल या चिकित्सा संस्थान जानलेवा बीमारी, गंभीर स्थायी विकलांगता वाली बीमारी या ऐसी बीमारी से पीड़ित मरीज जिनकी चिकित्सीय आवश्यकता पूरी नहीं हुई हो के इलाज में करुणामय उपयोग के उद्देश्य से उन नई दवाओं का आयात कर सकते हैं जिनके प्रयोग को देश में अनुमति नहीं है। हालांकि, इसके लिए दवाओं को देश या विदेश में क्लिनिकल ट्रायल के तीसरे चरण में होना अनिवार्य है। इसके लिए अस्पतालों को पहले केंद्रीय औषधि नियामक को आवेदन देना होगा।
विज्ञापन
अधिसूचना में कहा गया कि अगर कोई अस्पताल इन्हीं मकसदों के लिए नई दवा लिखते हैं तो नियमावली के प्रावधानों के अनुसार सीमित मात्रा में उनके उत्पादन को अनुमति दी जा सकती है। नए मसौदा नियमावली को 15 दिनों के लिए लागू किया जाएगा। इस बीच लोग अपनी आपत्तियां और सुझाव सरकार को भेज सकते हैं। जिनके विश्लेषण के बाद अंतिम नियम अधिसूचित किए जाएंगे।
विज्ञापन
मरीज या वारिस की सहमति लेनी होगी
नई दवा बनाने की मंशा रखने वाले उत्पादक को लिखित में मरीज की या उसके कानूनी वारिसों की सहमति लेनी होगी जिसके लिए यह दवा लिखी गई है। साथ ही नई दवा के निर्माण के लिए उसकी विशेष अनुशंसा प्राप्त करने के लिए अस्पताल या चिकित्सा संस्थान की नीति समिति को आवेदन देना होगा। नीति समिति की अनुशंसा प्राप्त करने के बाद, उत्पादक को नई दवा के करुणामय उपयोग की अनुमति हासिल करने के लिए केंद्रीय लाइसेंसी प्राधिकरण को आवेदन देना होगा। इस दवा को तय कारणों के लिए ही इस्तेमाल करना होगा। इसे बाजार में बेचने की इजाजत नहीं होगी।