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हिंदी को लेकर विवाद का सिलसिला जारी, अब कुमारस्वामी ने उठाए सवाल

Mon, 24 Aug 2020 07:38 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू Published by: Sneha Baluni Updated Mon, 24 Aug 2020 07:38 PM IST
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HD Kumaraswamy raises question on AYUSH Dept Secretary ask how many kannadigas to sacrifice for hindi
एचडी कुमारस्वामी (फाइल फोटो) - फोटो : Facebook

योग और नैचरोपेथी को लेकर आयुष विभाग द्वारा आयोजित बैठक के बारे में विवाद जारी है। दक्षिण भारत के कुछ राजनेताओं ने आयुष मंत्रालय पर आरोप लगाया है कि हिंदी भाषा नहीं बोलने वालों के साथ पक्षपात किया जा रहा है। इस विवाद में अब कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और जनता दल सेक्युलर के नेता एचडी कुमारस्वामी भी कूद गए हैं। उन्होंने पूछा है कि कितने कन्नड़ियों को हिंदी न बोलने की वजह से बलिदान देना होगा?

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उन्होंने एक ट्वीट में कहा, 'आयुष विभाग द्वारा आयोजित एक वर्चुअल ट्रेनिंग सत्र में सचिव राजेश कोटेचा ने कहा कि जिन्हें हिंदी नहीं आती वे जा सकते हैं। मैं अच्छी तरह से अंग्रेजी नहीं बोल सकता। क्या यह अंग्रेजी या हिंदी नहीं बोलने के अनुरोध को थोपना नहीं है? कितने कन्नड़ियों को हिंदी न बोलने की वजह से बलिदान देना होगा?'
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हालांकि, आयुष सचिव कोटेचा ने इन सभी आरोपों को खारिज करते हुए बेबुनियाद बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि ऐसा कोई विवाद हुआ ही नहीं है। आयुष मंत्रालय की ओर से किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं किया गया। उन्होंने बताया कि दरअसल बैठक में कुछ लोग बेवजह का हंगामा खड़ा कर रहे थे, जिन्हें म्यूट कर दिया। बाद में इस मुद्दे को भाषाई विवाद का रंग दे दिया गया।

यह भी पढ़ें- भाषा विवाद में बोले आयुष सचिव, अंग्रेजी में बोलने के लिए बनाया जा रहा था दबाव


डीएमके ने की कार्रवाई की मांग, आयुष मंत्री को लिखा पत्र
विवाद के बढ़ने पर डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन ने आरोप लगाया है कि भाजपा नेतृत्व वाली सरकार जबरन हिंदी भाषा थोपना चाहती है और इस घटना से उनका एजेंडा सामने आ गया है। जबकि पार्टी सांसद कनिमोझी ने इस संबंध में आयुष मंत्री श्रीपद नाइक को पत्र लिखकर मामले की जांच की मांग की है।
  
कनिमोझी ने ट्वीट किया, 'आयुष मंत्रालय के सचिव का मंत्रालय के ट्रेनिंग सत्र में हिंदी न बोलने वाले प्रतिभागियों को जाने के लिए कहना दिखाता है कि हिंदी को थोपा जा रहा है। यह बेहद निंदनीय है। सरकार को सचिव को निलंबित करना चाहिए। कब तक गैर हिंदी भाषी लोगों के खिलाफ ऐसा व्यवहार बर्दाश्त किया जाएगा?'

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