कर्नाटक चुनावः किंग मेकर नहीं अस्तित्व की लड़ाई में फंसे हैं एचडी देवेगौड़ा
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कर्नाटक विधानसभा चुनाव से पहले चुनावी सर्वेक्षण भले ही जनता दल (सेक्युलर) को किंग मेकर बनता दिखा रहे हों, लेकिन जमीनी हकीकत है कि कभी राज्य में कांग्रेस के मुकाबले भाजपा से भी बड़ी ताकत रहे पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा और उनकी पार्टी जनता दल (एस) को इस बार अपने अस्तित्व की लड़ाई में जूझना पड़ रहा है। कांग्रेस और भाजपा दोनों की कोशिश राज्य की तीसरी ताकत जनता दल (एस) के जनाधार में सेंधमारी करने की है। इसके लिए जहां देवेगौड़ा परिवार पर डोरे भी डाले जा रहे हैं वहीं दूसरी तरफ जद (एस) जनाधार को अपने साथ समेटने की रणनीति पर भी कांग्रेस और भाजपा दोनों ही काम कर रहे हैं।
बीदर के कारोबारी मोहम्मद बिखारुद्दीन के मुताबिक कांग्रेस की नजर जद (एस) से मुस्लिम जनाधार को पूरी तरह अपने साथ करने की है और साथ ही डीके शिवकुमार जैसे अपने कद्दावर वोक्कालिंगा नेताओं के जरिए कुछ सीटों पर वोक्कालिंगा वोटों में भी सेंधमारी की है। इसी वजह से कांग्रेस ने जद (एस) से टूटकर कांग्रेस में आए नेताओं को उनकी पुरानी सीटों पर टिकट दिया है। जिसने एक दर्जन से ज्यादा उन सीटों पर कांग्रेस का पलड़ा भारी कर दिया है जो पिछले चुनाव में पार्टी हार गई थी।
कांग्रेस जद (एस) को भाजपा की बी टीम प्रचारित भी करके उसके मुस्लिम जनाधार को पूरी तरह अपने साथ एकजुट करने में जुटी है तो भाजपा देवेगौड़ा और कुमारस्वामी से निकटता दिखाते हुए जद (एस) के वोक्कालिंगा जनाधार में घुसपैठ कर रही है। कांग्रेस और भाजपा की दुधारी मार के बीच पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा चुनाव बाद किंग मेकर बनकर अपने बेटे एचडी कुमारस्वामी को एक बार फिर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर देखना चाहते हैं, जिससे संसाधनों की कमी और बिखरते जनाधार की चुनौती से जूझ रहे जद (एस) को सत्ता की संजीवनी मिल सके।
भाजपा के साथ गए कुमारस्वामी तो बेटे का साथ छोड़ देंगे देवेगौड़ा
अपने मुस्लिम जनाधार को बचाए रखने के लिए देवेगौड़ा बार-बार सफाई दे रहे हैं कि चुनाव के बाद जद (एस) भाजपा के साथ नहीं जाएगा और अगर कुमारस्वामी ने एसा किया तो वो अपने बेटे को छोड़ देंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरह चुनाव प्रचार की शुरुआत करते हुए मंच से देवेगौड़ा की तारीफ की और उनके कथित अपमान के लिए कांग्रेस को आड़े हाथों लिया उसके पीछे चुनाव बाद त्रिशंकु विधानसभा की हालत में कांग्रेस को रोकने के लिए जद (एस) से हाथ मिलाने की गुंजाइश बनाए रखने की रणनीति तो है ही, साथ ही इसे जद (एस) के मूल जनाधार वोक्कालिंगा समुदाय को खुश करके जद (एस) की कमजोर सीटों पर भाजपा के लिए समर्थन जुटाने की कोशिश भी माना जा रहा है।
इसी रणनीति के तहत चुनाव प्रचार के अगले चरण में गुरुवार को नरेंद्र मोदी ने अपनी सभाओं में कहा कि जद (एस) सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है इसलिए उसे समर्थन देकर अपना वोट खराब मत कीजिए। दरअसल मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के लिंगायत कार्ड को लेकर भाजपा को भी अपने मूल लिंगायत जनाधार में बिखराव का खतरा दिख रहा है। इसलिए भाजपा एसे किसी भी संभावित नुकसान को वोक्कालिंगा मतों में सेंधमारी करके भरना चाहती है।
उधर कांग्रेस ने जद (एस) से पाला बदलकर आए सात विधायकों जमीर अहमद, अखंड श्रीनिवास, चलवार्या स्वामी आदि को उन्हें उनकी ही सीटों पर मैदान में उतारकर बड़ा दांव चला है। इनके अलावा पिछली बार करवार में निर्दलीय जीते सतीश सेल, कुडरकी से जीते नागेंद्र को भी कांग्रेस का टिकट दे दिया है। जबकि हासपेट में भाजपा से अलग हुए आनंद सिंह कांग्रेस के मजबूत उम्मीदवार माने जा रहे हैं।
पूरे राज्य की सियासत पर गहरी नजर रखने वाले व्यवसायी कमाल पाशा कहते हैं कि करीब डेढ़ दर्जन सीटें, जो कांग्रेस पिछले चुनाव में हारी थी, उन पर उसने जद (एस), भाजपा और पूर्व निर्दलीय विधायकों को अपने टिकट पर खड़ा करके भाजपा और जद (एस) के सामने कड़ी चुनौती पेश कर दी है। लेकिन सबसे दिलचस्प है कि देवेगौड़ा के बेटे एचडी कुमारस्वामी के खिलाफ रामनगर सीट पर मुस्लिम उम्मीदवार देकर कांग्रेस ने वहां उनकी राह भी आसान की है। कहा जा रहा है कि यह कुमारस्वामी और डी के शिवकुमार के बीच रणनीतिक समझदारी के तहत एसा किया गया है। शिवकुमार के खिलाफ जद (एस) ने भी कमजोर उम्मीदवार उतारा है।