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Bombay HC: बच्ची से सामूहिक दुष्कर्म के आरोपी को जमानत, अदालत ने कहा- युवक परिवार से जुड़ने का हकदार
Wed, 07 Sep 2022 07:18 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: Amit Mandal
Updated Wed, 07 Sep 2022 07:18 PM IST
सार
अदालत ने उसे रिहा करने का आदेश देते हुए कहा कि आवेदक अब एक वयस्क है। उसकी शिक्षा को और बंद नहीं किया जा सकता है।
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bombay high court
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
बॉम्बे हाईकोर्ट ने 18 वर्षीय एक युवक को जमानत दे दी, जिसे दो साल पहले सामूहिक बलात्कार के मामले में गिरफ्तार किया गया था। बुधवार को उपलब्ध कराए गए 22 अगस्त के आदेश में न्यायमूर्ति भारती डांगरे की एकल पीठ ने यह भी कहा कि कानून तोड़ने वाला बच्चा अपने परिवार के साथ फिर से जुड़ने का हकदार है। आरोपी अपनी गिरफ्तारी के बाद से दक्षिण मुंबई के डोंगरी इलाके में एक ऑब्जरवेशन होम में बंद है। उस पर 2020 में एक सात वर्षीय लड़की के साथ सामूहिक बलात्कार के लिए मामला दर्ज किया गया था। वह उस समय 16 वर्ष का था और उसे ऑब्जर्वेशन होम भेज दिया गया था जहां वह हाल ही में 18 साल का हो गया है।
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आरोपी की शिक्षा को और बंद नहीं किया जा सकता
अदालत ने उसे रिहा करने का आदेश देते हुए कहा कि आवेदक अब एक वयस्क है। उसकी शिक्षा को और बंद नहीं किया जा सकता है और उसे अपने परिवार के साथ फिर से जोड़ने से वह खुद को अपनी पूरी क्षमता से विकसित करने में सक्षम होगा। न्यायमूर्ति डांगरे ने कहा कि आवेदक ने ऑब्जरवेशन होम में रहने के दौरान पुनर्वास प्रयासों के लिए सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। वह अपने परिवार के साथ फिर से जुड़ने और बहाल होने का हकदार है और यह उसके हित में होगा ताकि वह खुद को पूरी क्षमता से विकसित कर सके।
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अपनी जमानत याचिका में आरोपी ने दावा किया था कि ऑब्जर्वेशन होम में उसकी लंबी हिरासत ने उसके जीवन में व्यवधान पैदा किया है और अगर सही तरह के अवसर, मार्गदर्शन और समर्थन उपलब्ध कराया जाता है, तो उसके पास अच्छी क्षमता है।
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अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी या उसके परिवार द्वारा पीड़ित को कोई नहीं होना चाहिए। न्यायमूर्ति डांगरे ने कहा कि आवेदक उसी सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक स्थिति में बहाली के सिद्धांत के आधार पर जमानत पर रिहा होने का हकदार है, जो वह कथित अपराध करने से पहले था। अदालत ने कहा कि आवेदक द्वारा लगाए गए आरोप निर्विवाद रूप से गंभीर हैं, लेकिन उसे एक बच्चा होने का लाभ मिलना चाहिए और इसलिए किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम के लाभ से इनकार नहीं किया जा सकता है।