पूर्व प्रधानमंत्री के बेटे पर हाईकोर्ट ने लगाया दस लाख रुपये का हर्जाना
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हाईकोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री स्व. वीपी सिंह के पुत्र अजेय सिंह पर दस लाख रुपये हर्जाना लगाया है। कोर्ट ने उनके द्वारा एचडीएफसी बैंक के उपमहाप्रबंधक के खिलाफ मुकदमे को भी बोगस करार देते हुए रद्द कर दिया है। आदेश देते हुए अदालत ने कहा कि मुकदमा बैंक पर दबाव बनाने की नीयत से दर्ज कराया गया है, ताकि बैंक की करोड़ों रुपये की देनदारी से राहत मिल सके।
एचडीएफसी बैंक के उपमहाप्रबंधक डीके गुप्ता की याचिका पर न्यायमूर्ति अरुण टंडन और न्यायमूर्ति यूसी श्रीवास्तव की पीठ ने यह आदेश दिया है। याचिका में अजेय सिंह द्वारा कैंट थाने में 26 दिसंबर 2014 को दर्ज कराई प्राथमिकी को रद्द करने की मांग की गई थी।
प्राथमिकी उपमहाप्रबंधक और समक्ष प्राधिकारी एचडीएफसी बैंक डीके गुप्ता के खिलाफ दर्ज कराई गई थी। इसमें उन पर धोखाधड़ी, कूट रचना, आपराधिक षडयंत्र जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे। मामला यह था कि अजेय सिंह ने एचडीएफसी बैंक से 10 फरवरी 2006 को 25 करोड़ रुपये का लोन अटलांटिस मल्टीप्लेक्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम लिया था। बाद में यह राशि 34 करोड़ 25 लाख रुपये तक बढ़ गई।
कोर्ट ने अजेय सिंह पर दस लाख रुपये हर्जाना भी लगाया है
समय से किश्त न देने के कारण बैंक ने करार रद्द कर दिया और 30 करोड़ 93 लाख रुपये से अधिक के बकाए हेतु वसूली कार्यवाही प्रारंभ कर दी। अजेय सिंह 22 करोड़ रुपये देकर समझौता करने का प्रयास किया मगर बैंक राजी नहीं हुआ। इसके बाद बैंक ने 30 अक्तूबर 2010 में 40 करोड़ 33 लाख रुपये से अधिक की डिमांड नोटिस अजेय सिंह को भेज दी। इससे क्षुब्ध होकर अजेय सिंह ने डीके गुप्ता और अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करा दी।
हाईकोर्ट ने डीके गुप्ता को अंतरिम राहत देते हुए गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। बुधवार को मुकदमे पर अंतिम सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि इस प्राथमिकी से कोई अपराध नहीं बनता है। प्राथमिकी पेशबंदी के इरादे से दर्ज कराई गई है।
बोगस प्राथमिकी दर्ज कराने पर कोर्ट ने अजेय सिंह पर दस लाख रुपये हर्जाना भी लगाया है। डीके गुप्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जीएस चतुर्वेदी ने पक्ष रखा, जबकि प्रदेश सरकार का पक्ष अपर शासकीय अधिवक्ता सैय्यद अली मुर्तजा ने।