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Senthil Balaji Case: 'ED के पास सेंथिल बालाजी को गिरफ्तार करने का अधिकार', एजेंसी ने उच्च न्यायालय को बताया

Wed, 12 Jul 2023 07:06 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 12 Jul 2023 07:06 PM IST
सार

Senthil Balaji Case:  सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने उच्चतम न्यायालय के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि धनशोधन के मामले में आरोपी की जांच करना या उससे पूछताछ करना ईडी का नैतिक कर्तव्य है।

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Have powers to arrest and take custody of Senthil Balaji, ED tells HC
तमिलनाडु के मंत्री सेंथिल बालाजी (फाइल) - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार को मद्रास उच्च न्यायालय बताया कि उसके पास धन शोधन रोकथाम अधिनियम के तहत मंत्री वी सेंथिल बालाजी को गिरफ्तार करने और हिरासत में लेने की शक्तियां हैं। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायमूर्ति सीवी कार्तिकेयन के समक्ष इस आशय का अपना पक्ष रखा, जिन्हें बालाजी की पत्नी द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका (एससीपी) पर सुनवाई के लिए तीसरे न्यायाधीश के रूप में नामित किया गया था।

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बालाजी को ईडी ने पिछले महीने पीएमएलए के तहत नौकरी के बदले पैसा घोटाले में गिरफ्तार किया था। तब वह पूर्ववर्ती अन्नाद्रमुक सरकार में परिवहन मंत्री थे। मेहता ने कहा कि ईडी को अपने वैधानिक कर्तव्य का पालन करना होगा। एक बार जब उसके पास अपराध से संबंधित पर्याप्त सामग्री हो जाती है, तो वह किसी व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकती है, उसकी संपत्तियों को कुर्क कर सकती है और उसे जब्त कर सकती है।

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उन्होंने कहा कि शिकायत दर्ज करने और गिरफ्तारी के बाद भी जांच पर विचार किया गया। केवल इसलिए कि ईडी के अफसर पुलिस अधिकारी नहीं थे, इसका मतलब यह नहीं है कि उनके पास जांच करने की कोई शक्ति नहीं है। धनशोधन मामले में सिर्फ एक अपराध हुआ था और सजा 7 साल की सजा थी। इसके अलावा यह एक गैर-जमानती अपराध था। इसलिए ईडी के पास किसी आरोपी को रिहा करने का कोई अधिकार नहीं है। उसे केवल अदालत से रिहा किया जा सकता है। इसलिए ईडी अधिकारियों को स्टेशन अधिकारी के रूप में नहीं माना जा सकता है।

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मेहता ने उच्चतम न्यायालय के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि धनशोधन के मामले में आरोपी की जांच करना या उससे पूछताछ करना ईडी का नैतिक कर्तव्य है। अधिनियम की योजना के अनुसार, ईडी को व्यक्ति को गिरफ्तार करने के अलावा सामग्री एकत्र करना, जांच करना, तलाशी लेना, जब्त करना और संपत्तियों को कुर्क करना होता है। इसके बाद भी अगर आरोपी के खिलाफ कोई मामला नहीं बनता है, तो क्लोजर रिपोर्ट दायर की जाती है। उन्होंने कहा कि जब ईडी के पास क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने का अधिकार है तो निश्चित तौर पर उसके पास आगे की जांच करने का अधिकार है।

उन्होंने कहा कि इस मामले में गिरफ्तारी करते समय प्रक्रियाओं का पूरी तरह से पालन किया गया। गिरफ्तारी के तुरंत बाद दो गवाहों की मौजूदगी में सैंथिल बालाजी को सूचित किया गया था कि उन्हें क्यों गिरफ्तार किया गया है, लेकिन उन्होंने इसे प्राप्त करने से इनकार कर दिया। मेहता ने कहा कि सत्र न्यायाधीश के आधेश में इसे दर्ज किया गया है। 

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