{"_id":"636e694e429d8c3a763fddbe","slug":"hate-speeches-sc-discharges-uttarakhand-govt-dgp-from-list-of-parties-in-contempt-plea","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hate speeches: सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना मामले में उत्तराखंड सरकार, डीजीपी को पक्षकारों की सूची से हटाया","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Hate speeches: सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना मामले में उत्तराखंड सरकार, डीजीपी को पक्षकारों की सूची से हटाया
Fri, 11 Nov 2022 08:55 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Fri, 11 Nov 2022 08:55 PM IST
सार
अदालत ने दिल्ली पुलिस से दो सप्ताह के भीतर नफरत भरे भाषणों में की गई कार्रवाई पर अपना जवाब दाखिल करने को कहा।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : Social Media
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उत्तराखंड सरकार और पुलिस प्रमुख को राज्य राष्ट्रीय राजधानी और हरिद्वार में धार्मिक सभाओं में किए गए घृणास्पद भाषणों के मामलों में कथित निष्क्रियता के संबंध में कार्यकर्ता तुषार गांधी द्वारा दायर अवमानना याचिका में पक्षकारों की सूची से मुक्त कर दिया। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने उत्तराखंड सरकार की दलीलों पर ध्यान दिया कि हरिद्वार में नफरत भरे भाषणों से संबंधित एक याचिका एक अन्य पीठ के समक्ष लंबित है और इसलिए इसे यहां जारी नहीं रखा जा सकता है। पीठ ने कहा, उत्तराखंड राज्य और राज्य के पुलिस महानिदेशक को मुक्त किया जाता है।
विज्ञापन
लांकि, अदालत ने दिल्ली पुलिस से दो सप्ताह के भीतर नफरत भरे भाषणों में की गई कार्रवाई पर अपना जवाब दाखिल करने को कहा। शुरुआत में उत्तराखंड के उप महाधिवक्ता जतिंदर कुमार सेठी ने पीठ को सूचित किया कि न्यायमूर्ति के एम जोसेफ और अजय रस्तोगी की अध्यक्षता वाली दो अन्य पीठ भी इसी तरह के मुद्दों से निपट रही है और तुषार गांधी की वर्तमान जनहित याचिका को भी एक पीठ को भेजा जाए। .
विज्ञापन
सेठी ने कहा कि राज्य पुलिस ने अभद्र भाषा से संबंधित मामलों में न केवल पांच प्राथमिकी दर्ज की हैं, बल्कि उन आरोपियों के खिलाफ भी आरोप पत्र दायर किया है जो अब मुकदमे का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड पुलिस ने एक अन्य पीठ के समक्ष लंबित मामलों में एक विस्तृत स्थिति रिपोर्ट दायर की थी और अदालत अपनी कार्रवाई से संतुष्ट थी, लेकिन तुषार गांधी ने अब उस मामले का उल्लेख किए बिना इस अदालत के समक्ष अवमानना याचिका दायर की है।
विज्ञापन