भड़काऊ भाषण पर विधि आयोग की रिपोर्ट लागू करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को भड़काऊ भाषण पर विधि आयोग की रिपोर्ट लागू करने के लिए केंद्र को फौरन दिशानिर्देश देने की मांग वाली याचिका सुनने से इनकार कर दिया। भाजपा नेता और वकील अश्विनी उपाध्याय ने यह याचिका दी थी।
हालांकि, पीठ ने उपाध्याय को बुलंदशहर सामूहिक दुष्कर्म मामले में सपा सांसद आजम खान के भड़काऊ बयान देने के मामले में दखल देने की मंजूरी दे दी। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट इस बात की जांच कर रहा है कि क्या सार्वजनिक पद धारण करने वाले व्यक्ति पर विचाराधीन आपराधिक मामलों में अपने विचार रखने पर पाबंदी लगानी चाहिए।
जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस इंदिरा बनर्जी की पीठ ने याचिका सुनने से इनकार करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता भड़काऊ भाषण मामले की सुनवाई कर रही शीर्ष अदालत की संविधान पीठ के समक्ष अपनी यह याचिका दे। विधि आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के आधार पर अपनी रिपोर्ट 2017 में तैयार कर ली थी। 27 फरवरी को दायर याचिका में उपाध्याय ने इसी रिपोर्ट को लागू करने की मांग की थी।
क्या है विधि आयोग की रिपोर्ट में
विधि आयोग ने 2017 में अपनी रिपोर्ट में भड़काऊ भाषण की व्याख्या की थी और भारतीय दंड संहिता और अपराध प्रक्रिया संहिता की धारा 153-सी और 505-ए शामिल करने की सलाह दी थी। याचिका में कहा गया है कि भड़काऊ भाषण के चलते सामाजिक सद्भाव, व्यक्ति की गरिमा, एकता और राष्ट्रीय अखंडता को नुकसान पहुंचता है। नफरत वाले बयानों से संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 जैसे मौलिक अधिकारों को नुकसान पहुंचता है।