{"_id":"584a45764f1c1be05944a9a3","slug":"hasmukh-adhia-and-five-others-were-privy-to-the-plan-demonetisation","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"खुलासा: इन 6 लोगों ने कसम खाकर बनाई थी नोटबंदी की योजना","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
खुलासा: इन 6 लोगों ने कसम खाकर बनाई थी नोटबंदी की योजना
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 09 Dec 2016 11:43 AM IST
विज्ञापन
पीएम मोदी पर्सन ऑफ द ईयर
- फोटो : SELF
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐतिहासिक कदम उठाते हुए 500 और 1000 रुपए के पुराने नोट बदलने का फैसला लिया था। उनके इस फैसले में उनके द्वारा चुनी गई छह लोगों की टीम ने बहुत रही गोपनीय तरीके से काम किया और इसे सफलता पूर्वक अंजाम दिया।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के वित्तीय हलकों से बाहर थोड़ी बहुत ही पहचान रखने वाले 6 ब्यूरोक्रेट ने देश की 86 फीसदी करेंसी को बदलने के क्रांतिकारी कदम की अगुवाई की थी। रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि फैसला लागू करने के पहले जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैबिनेट की मीटिंग में मंत्रियों से कहा था, 'नोटबंदी की पॉलिसी फेल हुई तो इसकी पूरी जिम्मेदारी मेरी होगी।'
रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि ब्यूरोक्रेट हसमुख अढिया और पांच अन्य लोगों को इस योजना को अत्यंत गोपनीय रखने के लिए कसम भी खिलाई गई थी। उन्हें नरेंद्र मोदी के दिल्ली स्थित आवास के दो कमरों पर काम करने वाली एक नौजवानों की टीम का सपोर्ट भी मिला हुआ था।
विज्ञापन
बताया जा रहा है कि यह गोपनीयता इस बात को ध्यान में रखते हुए बरती गई थी कि पहले से जानकारी होने पर लोग इन रुपए को सोना, प्रॉपर्टी और दूसरे संपत्ति में बदल सकते हैं।
विज्ञापन
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के वित्तीय हलकों से बाहर थोड़ी बहुत ही पहचान रखने वाले 6 ब्यूरोक्रेट ने देश की 86 फीसदी करेंसी को बदलने के क्रांतिकारी कदम की अगुवाई की थी। रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि फैसला लागू करने के पहले जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैबिनेट की मीटिंग में मंत्रियों से कहा था, 'नोटबंदी की पॉलिसी फेल हुई तो इसकी पूरी जिम्मेदारी मेरी होगी।'
विज्ञापन
रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि ब्यूरोक्रेट हसमुख अढिया और पांच अन्य लोगों को इस योजना को अत्यंत गोपनीय रखने के लिए कसम भी खिलाई गई थी। उन्हें नरेंद्र मोदी के दिल्ली स्थित आवास के दो कमरों पर काम करने वाली एक नौजवानों की टीम का सपोर्ट भी मिला हुआ था।
विज्ञापन
बताया जा रहा है कि यह गोपनीयता इस बात को ध्यान में रखते हुए बरती गई थी कि पहले से जानकारी होने पर लोग इन रुपए को सोना, प्रॉपर्टी और दूसरे संपत्ति में बदल सकते हैं।
नरेंद्र मोदी के करीबी रहे हैं हसमुख अढिया
narendra modi
- फोटो : File Photo
इस अभियान का नेतृत्व कर रहे 58 साल के अढ़िया गुजरात में नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में साल 2003 से 2006 तक प्रमुख सचिव भी रह चुके हैं। इस दौरान दोनों के रिश्ते मजबूत हुए और अढ़िया ने ही प्रधानमंत्री का योग से परिचय कराया था। अपनी निष्ठा और विवेक की वजह से उन्होंने अपनी खास जगह बनाई हुई थी।
सितंबर 2015 में अढ़िया का नाम राजस्व सचिव के रूप में सामने आया था। ऐसे तो यह पद वित्त मंत्री अरुण जेटली के अधीन आता है, लेकिन बताया जाता है कि अढ़िया सीधे-सीधे नरेंद्र मोदी के संपर्क में रहते हैं।
सितंबर 2015 में अढ़िया का नाम राजस्व सचिव के रूप में सामने आया था। ऐसे तो यह पद वित्त मंत्री अरुण जेटली के अधीन आता है, लेकिन बताया जाता है कि अढ़िया सीधे-सीधे नरेंद्र मोदी के संपर्क में रहते हैं।
नोटबंदी पर कई तरह के आए थे रिएक्शन
राजकोट कैश
- फोटो : ani
नोटबंदी के फैसले का स्वागत करने वाले कुछ वकीलों का कहना है कि पैसों को खत्म करने के बाद बैंकिंग सिस्टम में ज्यादा पैसा आएगा और कर राजस्व बढ़ेगा। वहीं, बहुत से भारतीय डरे हुए हैं कि उन्हें पैसे बदलवाने या लेने के लिए बैंक और एटीएम की लाइन में लगना होगा।
इसके साथ 500 और 1000 रुपए के नोट रिप्लेस करने की तैयारी पर भी सवाल उठे। वहीं, नोटों की छपाई में समय लगने के साथ-साथ स्थिति सामान्य होने में कई महीने लगने की भी बात की गई।
इसके साथ 500 और 1000 रुपए के नोट रिप्लेस करने की तैयारी पर भी सवाल उठे। वहीं, नोटों की छपाई में समय लगने के साथ-साथ स्थिति सामान्य होने में कई महीने लगने की भी बात की गई।