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Haryana: दिग्गजों की बगावत से भाजपा को कितना नुकसान, पार्टी की लिस्ट में ही छिपा है दांव
Fri, 06 Sep 2024 04:23 PM IST
श्वेता महतो
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
Published by: श्वेता महतो
Updated Fri, 06 Sep 2024 04:23 PM IST
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हरियाणा विधानसभा चुनाव
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संवाद
विस्तार
हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा की पहली लिस्ट सामने आने के बाद अब तक दो दर्जन से ज्यादा नेताओं ने पार्टी को अलविदा कह दिया है। इसमें हरियाणा सरकार में मंत्री रणजीत सिंह चौटाला, आदित्य चौटाला, दर्शन गिरी महाराज, पंडित जीएल शर्मा, लक्ष्मण दास नापा और करणदेव कंबोज जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इनमें से कई नेताओं ने कांग्रेस ज्वाइन करने तो कुछ ने स्वतंत्र रूप से चुनाव में उतरने की घोषणा कर दी है। इससे भाजपा की मुश्किलें बढ़ गई हैं। भाजपा नेता इन नेताओं के बगावती सुर का सीधा जवाब देने से बच रहे हैं। पार्टी उन तरीकों को आजमाने की कोशिश कर रही है जिससे वह इन बगावती नेताओं के विद्रोह से होने वाले नुकसान को कम कर सके।लोकसभा चुनावों के ठीक पहले नवीन जिंदल और उनकी मां सावित्री जिंदल ने भाजपा ज्वाइन कर लिया था। एक बड़े उद्योगपति परिवार को अपने साथ जोड़ने को भाजपा बड़ी उपलब्धि करार दे रही थी, लेकिन सावित्री जिंदल को टिकट न मिलने से उसकी यह बढ़त अब उसकी कमजोरी साबित होती दिख रही है। सावित्री जिंदल ने अपने समर्थकों को स्वतंत्र रूप से मैदान में उतरने के लिए कह दिया है। इससे भी पार्टी को बड़ा झटका लगेगा।
हरियाणा भाजपा के एक नेता के अनुसार, चुनावों के ठीक पहले टिकट न पाने वाले कार्यकर्ताओं में इस तरह की नाराजगी होती है, लेकिन जल्दी ही सब कुछ ठीक हो जाता है। उनके अनुसार, यह स्थिति केवल भाजपा के साथ ही नहीं रहेगी। जैसे ही कांग्रेस की लिस्ट सामने आएगी, वहां भी इस तरह की स्थिति पैदा हो सकती है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल इस तरह के हानि-लाभ को समझते हैं, लेकिन इससे बड़ा अंतर नहीं पड़ेगा।
किस तरह सधेगा हरियाणा
भाजपा ने 2014 और 2019 में गैर जाटों पर दांव खेलकर हरियाणा को सफलतापूर्वक साध कर दिखाया था। इस बार भी इसी तरह की उम्मीद की जा रही थी कि वह गैर जाट पर दांव खेलकर हरियाणा में चुनावी जीत हासिल करेगी। लेकिन इस बार भाजपा ने हरियाणा के सभी वर्गों को साधने की कोशिश किया है।
हर समुदाय को लिया साथ
पार्टी ने 67 उम्मीदवारों में हरियाणा के हर प्रमुख समुदाय को हिस्सेदारी देने की कोशिश की है। इसमें जाट, गैर जाट, ब्राह्मण, बनिया, यादव, कुम्हार, कंबोज और राजपूत शामिल हैं। भाजपा को उम्मीद है कि इस बार उसके टिकटों का वितरण उसकी जीत की राह आसान करेगा। पहली सूची में सामान्य श्रेणी के 40 उम्मीदवार, 14 ओबीसी और अनुसूचित जातियों के 13 उम्मीदवारों को टिकट थमाया है।
एंटी इनकमबेंसी का सामना
भाजपा हमेशा से नए उम्मीदवार मैदान में उतारकर एंटी इनकमबेंसी फैक्टर का मुकाबला करती रही है। 4 सितंबर को जारी हुई 67 उम्मीदवारों की पहली सूची में पार्टी ने 40 सीटों पर उम्मीदवार बदल दिए हैं। इसमें भी 27 उम्मीदवार बिल्कुल पहली बार चुनावी मैदान में उतरे हैं। ऐसे में उसकी उम्मीद है कि वह एंटी इनकमबेंसी फैक्टर को कमजोर कर सकेगी और उसे इसका लाभ मिलेगा।
लेकिन ये है चुनौती
हालांकि, भाजपा की पूरी तैयारी के बाद भी दस साल का केंद्र-राज्य का एंटी इनकमबेंसी फैक्टर उसके लिए चुनौती बना हुआ है। जाट समुदाय की कथित नाराजगी, महिला खिलाड़ियों के साथ हुई घटना, किसानों की नाराजगी उसके लिए अभी भी चिंता का सबसे बड़ा कारण बने हुए हैं। हरियाणा में सरकारी नौकरियों के प्रति लोगों में बहुत ज्यादा आकर्षण है।
यहां के युवा सैन्य बलों में नौकरी को अपनी सबसे बड़ी प्राथमिकता में रखते हैं, लेकिन जिस तरह अग्निवीर को लेकर पूरे देश में युवाओं की नाराजगी सामने आई है, हरियाणा में भी उसका असर पड़ सकता है। इस बीच महंगाई ने भी लोगों की जिंदगी दूभर की है। भाजपा को इसका नुकसान भी उठाना पड़ सकता है।
हालांकि, भाजपा नेताओं का अनुमान है कि इन परिस्थितियों में भी उसके लिए संभावनाएं छिपी हुई हैं। पार्टी नेताओं के अनुसार, लोकसभा चुनावों में भी भाजपा को कांग्रेस से कड़ी टक्कर मिली थी। लेकिन इसके बाद भी पार्टी ने पांच सीटों के साथ साथ लगभग आधा वोट शेयर हासिल कर लिया था। बीजेपी नेताओं का अनुमान है कि विधानसभा चुनाव में भी लड़ाई कांटे की हो सकती है, लेकिन मामला एकतरफा बिल्कुल भी नहीं है। पार्टी का अनुमान है कि अभी भी वह सभी समीकरणों को साधते हुए विजय की ओर आगे बढ़ सकती है।