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हरियाली और रास्ता: पत्नी का इंतजार और बूढ़े की सीख
Wed, 24 Apr 2019 12:23 AM IST
गौरव द्विवेदी
फीचर डेस्क
फीचर डेस्क
Published by: गौरव द्विवेदी
Updated Wed, 24 Apr 2019 12:23 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
यह कहानी भिखारी की है, जिसने एक समृद्ध युवक को जिंदगी का महत्वपूर्ण सबक सिखा दिया। ओबेरॉय मॉल के सामने हर्ष अपनी गाड़ी में बैठा हुआ पत्नी नीता और बेटे रोहन का बहुत देर से इंतजार कर रहा था। उन्हें आने में अभी दस मिनट बाकी थे। खाली बैठे हुए हर्ष के मन में विचार आया कि बेकार बैठने से अच्छा है कि क्यों न अपनी गाड़ी ही साफ कर ली जाए। यह सोचकर हर्ष गाड़ी से बाहर निकला और अपनी गाड़ी साफ करने में जुट गया। कुछ दूरी पर एक भिखारी था। वह हर्ष की तरफ आ रहा था। तभी हर्ष की नजर उस बूढ़े भिखारी पर पड़ी। भिखारी की हालत ठीक नहीं लग रही थी।
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हर्ष यह समझ चुका था कि उसके पास खाना खाने के पैसे भी नहीं होंगे। ऐसा नहीं था कि हर्ष को भिखारियों से कोई दिक्कत थी, पर उस दिन हर्ष का उस भिखारी से बात करने का मन नहीं था। लेकिन वह हर्ष के पास नहीं आया, और न ही उससे कुछ बोला। वह भिखारी बस स्टॉप पर जाकर बैठ गया। हर्ष अब भी अपनी गाड़ी साफ करता रहा। अचानक हर्ष ने मुड़कर देखा और उसकी नजर उस भिखारी से मिल गई, जो अब भी उसकी ओर टकटकी लगाए देख रहा था।
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भिखारी ने कहा- 'आपकी गाड़ी बहुत अच्छी है।' हर्ष ने हां में सिर हिला दिया। हर्ष हैरान था कि वह भिखारी अब भी कुछ मांग नहीं रहा। थोड़ी देर में हर्ष से रहा नहीं गया। उसने भिखारी से पूछा-'क्या आपको किसी मदद की जरूरत है?' उसके बाद जो कुछ भिखारी ने कहा, उसने हर्ष की जिंदगी बदल दी। उसने कहा- 'हम सभी को किसी न किसी मदद की जरूरत है। है न?' यह सुनकर हर्ष स्तब्ध रह गया। हम कितने भी समृद्ध क्यों न हों जाएं, कितने भी बड़े आदमी क्यों न बन जाएं, फिर भी हम सभी को किसी न किसी मदद की जरूरत है। ठीक उसी तरह से, हम कितने भी कमजोर क्यों न हों, हम सब एक दूसरे की मदद कर सकते हैं।
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