अब हैकर नहीं ‘हैक’ कर सकेंगे चुनाव आयोग की वेबसाइट, सुरक्षा तैयारियां शुरू
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विदेशी चुनावों में हैकिंग के मामले सामने आने के बाद भारतीय निर्वाचन आयोग भी सर्तक हो गया है। आगामी लोकसभा और विधान सभा चुनावों को देखते हुए आयोग ने साइबर खतरों से निबटने के लिए कमर कसनी शुरू कर दी है। साइबर खतरों से निबटने के लिए आयोग ने सुरक्षा अधिकारियों की नियुक्ति करने के साथ थर्ड पार्टी सिक्योरिटी ऑडिट कराने की ठानी है। अमेरिकी चुनावों में रूसी हैकरों के शामिल होने की खबरों से सतर्क भारतीय निर्वाचन आयोग भी वोटरों के डाटाबेस को हैकरों की पहुंच से दूर रखने के लिए कई तरह की सुरक्षा तैयारियों में जुटा है।
आयोग की वेबसाइट को हैकरों की पहुंच से दूर रखने के लिए गुपचुप ही एसएसएल (सिक्योर सॉकेट लेयर) सर्टिफिकेट को अपने डॉमेन में शामिल किया है। आयोग ने डोमेन नेम के शुरू में लगने वाले एचटीटीपी यानी हाइपरटेक्स्ट ट्रांसफर प्रोटोकॉल की जगह सुरक्षित माने जाने वाले एचटीटीपीएस यानी हाइपरटेक्स्ट ट्रांसफर प्रोटोकॉल सिक्योर पर स्विच किया है। गौरतलब है कि हाल ही हैक हुई यूपीएससी की वेबसाइट अभी भी एसएसएल सर्टिफिकेट के बिना चल रही है। गौरतलब है कि यूजर डाटाबेस या पेमेंट सूचना रखने वाली वेबसाइट्स के पास एसएसएल सर्टिफिकेशन होना जरूरी है।
आयोग के सूत्रों के मुताबिक साइबर खतरों से निबटने के लिए दिल्ली मुख्यालय में एक मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारी के अलावा राज्यों में साइबर सुरक्षा नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। ये अधिकारी साइबर सुरक्षा नियम बनाने के साथ चुनाव आयोग और मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के मध्य समन्वय बनाने का काम करेंगे। चुनाव आयोग देश की पहली अकेली संवैधानिक संस्था है, जिसके पास अपने साइबर सुरक्षा नियम हैं। सुरक्षा नियमों के तहत राजनीतिक दलों और पब्लिक को दी जाने वाली मतदाता सूची को छेड़छाड से रोकने के लिए इमेज फॉर्मेट बदला गया है। साथ ही, स्मार्टफोन, टेबलेट और कंप्यूटर पर प्रतिबंधित सामग्री के इस्तेमाल पर मनाही है। आधिकारिक कामकाज के लिए पर्सनल डिवाइसेज और पर्सनल ईमेल के प्रयोग पर प्रतिबंध लगाया गया है।
इसके अलावा आयोग ने चुनावों से संबंधित सभी मोबाइल एप्स और वेबसाइट्स का सालाना थर्ड पार्टी ऑडिट कराने का भी फैसला किया है। आयोग की मुख्य वेबसाइट के अलावा चुनाव से संबंधित छह अन्य वेबसाइट्स को भी स्टैंडर्ड सिक्योरिटी प्रोटोकॉल यानी एसएसएल से लैस किया जा रहा है। वहीं राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और मिजोरम की वेबसाइट पर एसएसएल सर्टिफिकेट इंस्टॉल किया जा चुका है। वही तेलंगाना की वेबसाइट पर यह प्रक्रिया जारी है। इसके अलावा वेबसाइट क्रेश होने की स्थिति से निबटने के लिए प्लान-बी भी तैयार किया गया है, इसके लिए दूसरी कंपनियों को अनुबंधित किया गया है।
आयोग के सूत्रों का कहना है कि साइबर हमलों से निबटने के लिए जून से ही तैयारियां शुरू कर दी गई थीं। इसके लिए सूचना प्रौद्योगिकी एक्ट, 2000 के तहत उत्तर, दक्षिण और मध्य भारत में कई कार्यशालाओं को आयोजन भी किया जा रहा है, जिसमें अधिकारियों को साइबर हमलों से निबटने की ट्रेनिंग दी जा रही है। इसके अलावा आयोग के लोगो का इस्तेमाल करने वाली गूगल प्ले स्टोर या इंटरनेट पर मौजूद कई मोबाइल एप्स और वेबसाइट पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है।