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नहीं रहे ज्ञानरंजन: सभी वर्गों के मन की कहानियों के सशक्त चित्रकार, समाजिक जीवन को सामने लाती है इनकी रचनाएं

Thu, 08 Jan 2026 07:09 AM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शुभम कुमार Updated Thu, 08 Jan 2026 07:09 AM IST
सार

सातवें दशक के कथाकार ज्ञानरंजन ने ‘पिता’, ‘अमरूद’ जैसी कहानियों में मध्यवर्गीय जीवन की आर्थिक, सामाजिक और भावनात्मक जटिलताओं को जीवंत किया। उनकी कहानियां समाज के सभी वर्गों के मनोभावों की गहरी पड़ताल करती हैं और हिंदी कहानी को नया गद्य देती हैं।

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Gyanranjan passed away A powerful portrayer of the stories of people from all walks of life News In Hindi
सातवें दशक के यशस्वी कथाकार ज्ञानरंजन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सातवें दशक के यशस्वी कथाकार ज्ञानरंजन ने ‘घंटा’, ‘बहिर्गमन’, ‘अमरूद’ और ‘पिता’ जैसी कहानियों के माध्यम से हिंदी कहानी लेखन को एक नया गद्य दिया। उन्होंने मध्यवर्गीय पात्रों के जीवन के तमाम विरोधाभासों को अभिव्यक्त करने का भाषिक हुनर भी कथाकारों को दिया। उनकी बहुचर्चित कहानियां समकालीन सामाजिक जीवन की अनेकानेक विरूपताओं का खुलासा करती हैं।

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मध्यवर्ग की नई पीढ़ी की सोच को ज्ञानरंजन ने बखूबी पकड़ा और अपनी कहानियों में उसे ढाला भी। उनकी कहानी ‘पिता’ इस बात की पुष्टि करती है। वस्तुतः आर्थिक विडंबनाओं से घिरा मध्यवर्ग सामान्य जन से न जुड़कर जिन बुराइयों और भटकावों का शिकार है, ज्ञानरंजन की कहानियां उसके विविध पहलुओं का अविस्मरणीय साक्ष्य पेश करती हैं।
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सभी वर्गों के लोगों के मन का मंथन 
मध्यवर्ग ही क्यों बल्कि वे समाज के सभी वर्गों की मन:स्थितियों का मंथन करते रहते हैं। साहित्यिक पत्रिका ‘पहल’ को ज्ञानरंजन के संपादन ने बहुत ऊंचा मुकाम दिलाया। साठोत्तरी प्रगतिशील कथा-साहित्य में ज्ञानरंजन की कहानियों का महत्वपूर्ण स्थान है।
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6 कहानी संग्रह प्रकाशित
प्रकाशित संग्रह के रूप में ज्ञानरंजन के छह कहानी संग्रह प्रकाशित हुए हैं, लेकिन यह बहुचर्चित तथ्य है कि इनकी कहानियों की कुल संख्या 25 है, जो कि सपना नहीं नामक संकलन में एकत्र प्रकाशित हैं। अनूठी गद्य रचनाओं की एक किताब कबाड़खाना बहुत लोकप्रिय हुई। कहानियों के अतिरिक्त भी साहित्य की कई विधाओं में ज्ञानरंजन ने लेखन किया।


अनेक विदेशी भाषाओं में भी रचनाएं
ज्ञानरंजन की कहानियों का हिंदी से इतर कई भारतीय भाषाओं में अनुवाद तो हुआ ही इसके अतिरिक्त अनेक विदेशी भाषाओं में भी उनकी रचनाएं अनूदित हो चुकी हैं। भारतीय विश्वविद्यालयों के अतिरिक्त ओसाका, लंदन, सैनफ्रांसिस्को, लेनिनग्राद, और हाइडेलबर्ग आदि के अनेक अध्ययन केंद्रों के पाठ्यक्रमों में भी इनकी कहानियां शामिल हैं।

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