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Gujarat: नकली मृत्यु प्रमाणपत्र से पॉलिसी का पैसा निकालने वाले गिरोह का पर्दाफाश; तीन गिरफ्तार, अन्य तीन फरार
Thu, 02 Nov 2023 11:02 AM IST
श्वेता महतो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
Published by: श्वेता महतो
Updated Thu, 02 Nov 2023 11:02 AM IST
सार
छह आरोपियों ने धोखे से एक व्यापारी का मृत्यु प्रमाणपत्र हासिल किया और उन्हें मिलने वाली बीमा पॉलिसी की राशि का दावा किया।
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Gujarat Police
- फोटो : Social Media
विस्तार
गुजरात पुलिस ने पॉलिसी का पैसा निकालने के लिए नकली मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने में शामिल एक अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार भी किया है। वहीं बाकी तीन आरोपियों की तलाश जारी है।
छह आरोपियों ने धोखे से एक व्यापारी का मृत्यु प्रमाणपत्र हासिल किया और मृतक को मिलने वाली बीमा पॉलिसी की राशि का दावा करने लगे। इस मामले में एसीपी प्रदीप सिंह जडेजा ने कहा, '2009 में रामचंद्र हरिलाल पटेल नाम के व्यक्ति ने पॉलिसी खरीदी थी और 2012 तक प्रीमियम का भुकतान किया। 2020 में इसे बंद करने के लिए दफ्तर गया, जहां उन्हें मालूम चला कि उनकी नकली मृत्यु प्रमाणपत्र दिखाकर किसी ने 15 लाख रुपये की राशि निकाल ली है। इसके बाद उन्होंने पुलिस से संपर्क किया, पुलिस ने जांच शुरू की और इस मामले में तीन आरोपियों को पकड़ लिया। हालांकि, तीन अन्य आरोपियों की तलाश फिलहाल जारी है।'
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एसीपी ने बताया कि आरोपी सुनील शंकर स्वरूप ने इस घटना को अपने साथी रजनीकांत संतोष प्रसाद के साथ मिलकर अंजाम दिया। उन्होंने कहा, 'गुजरात का रहने वाला फारुख हुसैन मृत्यु प्रमाणपत्र बनाता हैं और इसके लिए रोहित कुमार पैसा देता था। इस सभी आरोपियों को एक ही कार्यप्रणाली के जरिए 2021 में पकड़ा गया था, इसकी जानकारी अहमदाबाद के क्राइम ब्रांच ने दी। अन्य आरोपी चिराग गणेश परमार अपनी पत्नी के नाम से एक नकली अकाउंट खुलवाकर उससे पैसे निकालता था।' उन्होंने आगे बताया कि आरोपी राजेश राठौड़, रोहित कुमार के साथ मिलकर फारुख से संपर्क करने के बाद नकली प्रमाणपत्र हासिल करता था।
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छह आरोपियों ने धोखे से एक व्यापारी का मृत्यु प्रमाणपत्र हासिल किया और मृतक को मिलने वाली बीमा पॉलिसी की राशि का दावा करने लगे। इस मामले में एसीपी प्रदीप सिंह जडेजा ने कहा, '2009 में रामचंद्र हरिलाल पटेल नाम के व्यक्ति ने पॉलिसी खरीदी थी और 2012 तक प्रीमियम का भुकतान किया। 2020 में इसे बंद करने के लिए दफ्तर गया, जहां उन्हें मालूम चला कि उनकी नकली मृत्यु प्रमाणपत्र दिखाकर किसी ने 15 लाख रुपये की राशि निकाल ली है। इसके बाद उन्होंने पुलिस से संपर्क किया, पुलिस ने जांच शुरू की और इस मामले में तीन आरोपियों को पकड़ लिया। हालांकि, तीन अन्य आरोपियों की तलाश फिलहाल जारी है।'
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एसीपी ने बताया कि आरोपी सुनील शंकर स्वरूप ने इस घटना को अपने साथी रजनीकांत संतोष प्रसाद के साथ मिलकर अंजाम दिया। उन्होंने कहा, 'गुजरात का रहने वाला फारुख हुसैन मृत्यु प्रमाणपत्र बनाता हैं और इसके लिए रोहित कुमार पैसा देता था। इस सभी आरोपियों को एक ही कार्यप्रणाली के जरिए 2021 में पकड़ा गया था, इसकी जानकारी अहमदाबाद के क्राइम ब्रांच ने दी। अन्य आरोपी चिराग गणेश परमार अपनी पत्नी के नाम से एक नकली अकाउंट खुलवाकर उससे पैसे निकालता था।' उन्होंने आगे बताया कि आरोपी राजेश राठौड़, रोहित कुमार के साथ मिलकर फारुख से संपर्क करने के बाद नकली प्रमाणपत्र हासिल करता था।