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Gujarat: इस गांव में पशुओं को अपने हिस्से का पानी पिलाते हैं ग्रामीण, प्यास बुझाने वाले को ही मिलेगा वोट!

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Wed, 01 May 2024 12:51 PM IST
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सार
अमर उजाला डॉट कॉम ने चार हजार से अधिक आबादी वाले इस गांव के लोगों से बातचीत की। दोपहर में जब इस गांव में पहुंचे, तो सबसे पहले तालाब आता है। तालाब का आकार इतना बड़ा था कि उसके जरिए दस पंद्रह गांव में पानी की सप्लाई हो सकती है। सड़क से तालाब की गहराई देखें, तो वह भी करीब बीस फुट से अधिक ही होगी। तालाब के बीच में उस पंप से पानी छोड़ा जा रहा था, जिसमें गांव के लोगों के लिए पीने का पानी आता है। इसके बावजूद तालाब का 98 फीसदी हिस्सा खाली था। केवल एक गड्ढे में पानी को एकत्रित किया जा रहा था। 
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Gujarat Lok Sabha Election 2024 Surendra Nagar Seat Village Bhaduka Water Crisis deepening BJP Congress issues
गुजरात से ग्राउंड रिपोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गुजरात के सुरेंद्र नगर लोकसभा क्षेत्र के गांव भाडुका, मूली ताल्लुका के लोग परेशान हैं। ये गांव, मुख्य सड़क से करीब डेढ़ किलोमीटर अंदर है। गांव में जाने के लिए पक्की सड़क तो बन गई है, मगर पानी का बड़ा संकट है। पानी इतना ही मिलता है कि जिससे इंसान और पशु, दोनों जीवित रह सकें। रही बात खेत खलियान की, तो वे सूखे पड़े हैं। ग्रामीण, अपने हिस्से का पानी तालाब में डालते हैं, ताकि भीषण गर्मी और तेज गति से चलने वाली 'लू' यानी हीट वेव में उनके पशुओं का जीवन बच सके। अब ग्रामीणों का कहना है कि वे उसी पार्टी को वोट देंगे, जो उनके लिए नर्मदा का पानी लाएगा। वादा तो सब करते हैं, मगर पूरा कोई नहीं करता।


मंगलवार को अमर उजाला डॉट कॉम ने चार हजार से अधिक आबादी वाले इस गांव के लोगों से बातचीत की। दोपहर में जब इस गांव में पहुंचे, तो सबसे पहले तालाब आता है। तालाब का आकार इतना बड़ा था कि उसके जरिए दस पंद्रह गांव में पानी की सप्लाई हो सकती है। सड़क से तालाब की गहराई देखें, तो वह भी करीब बीस फुट से अधिक ही होगी। तालाब के बीच में उस पंप से पानी छोड़ा जा रहा था, जिसमें गांव के लोगों के लिए पीने का पानी आता है। इसके बावजूद तालाब का 98 फीसदी हिस्सा खाली था। केवल एक गड्ढे में पानी को एकत्रित किया जा रहा था। लू के दौरान उसमें एक-दूसरे से सट कर पशु लोट मार रहे थे।

 
गांव के शुरू में एक पेड़ के नीचे दो-तीन लोग बैठे थे। उनमें से एक व्यक्ति हिंदी समझता था और टूटी फूटी बोल भी लेता था। उसने गांव की समस्या बताई। आग्रह करने पर वह व्यक्ति हमें गांव के अंदर ले गया। वहां पर छह सात ग्रामीण बैठे थे। दिक्कत वही कि वे भी हिंदी नहीं बोल सकते थे। कुछ देर वे लोग अपनी बात बताते रहे। ज्यादा कुछ समझ नहीं आ रहा था, तो उनसे आग्रह किया गया कि किसी ऐसे व्यक्ति को बुलाएं, जो हिंदी बोलता हो। समस्या हल हो गई। पड़ोस में ही एक लड़का मिल गया। उसे ग्रामीणों के बीच बैठा दिया गया। गांव में बैठे लोग जो कुछ भी बोलते, वह लड़का हमें बता देता। इस तरह संवाद शुरू हुआ।  

ज्म्विा दर्शन ने बताया, नर्मदा का पानी हमारे गांव में नहीं आता। बाकी सभी गांव में नर्मदा का लिंक हो चुका है। गांव में पानी की बड़ी समस्या है। सिंचाई का पानी भी नहीं आता। तीन चार वर्ष से तालाब खाली पड़ा है। गांव में मीठा पानी नहीं मिलता। लोगों को खारा पानी पीना पड़ता है। इस पानी को भी हर दूसरे दिन तालाब में छोड़ते हैं। वजह, पशुओं को भी जीवित रखना है। किसी भी जन प्रतिनिधि ने सुध नहीं ली। न भाजपा वाले आए और न ही कांग्रेस वाले। कुएं में कुछ समय के लिए पानी आता है तो वहीं से ग्रामीण लोग, अपने घरों में लाते हैं। अलु भाई कहते हैं, खेतों को पानी चाहिए। खेत खाली पड़े हैं। पानी का भरोसा कोई नहीं देता।

भखा भाई बोले, कांग्रेस ने वादा भी नहीं किया। भाजपा से एक व्यक्ति आता है। लोगों को लगता है कि भाजपा वाले पानी लाएंगे। जगा भाई और यसाण भाई भी पानी की समस्या बताते हैं। गांव में पानी आ जाए, तो सारी दिक्कतें दूर हो जाएंगी। खेत लहला उठेंगे। पशुओं को पर्याप्त पानी मिल सकेगा।

गांव से आगे निकलने के बाद सड़क किनारे बैठे प्रहलाद सिंह से बात हुई। उन्होंने बताया, यह बात सही है कि भाडुका में पानी का घोर संकट है। अगर सरकार डैम को पूरा भरती है और वहां से पर्याप्त मात्रा में पानी छोड़ा जाए तो बात बन सकती है। डैम को भरा नहीं जाता। नतीजा, खेतों को पूरा पानी नहीं मिलता। भाडुका गांव की जमीन, थोड़ी ऊंचाई पर है। वहां इसलिए भी पानी का संकट रहता है। सरकार चाहे तो नर्मदा के पानी से गांव के लोगों की समस्या को दूर कर सकती है।
 
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