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गुजरात हाई कोर्ट की टिप्पणी: हिंदू विवाह की वैधता के लिए केवल पंजीकरण नहीं, सात फेरे और रीति-रिवाज भी जरूरी

Thu, 02 Jul 2026 06:33 AM IST
अमन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद Published by: अमन तिवारी Updated Thu, 02 Jul 2026 06:33 AM IST
सार

गुजरात हाईकोर्ट ने कहा कि हिंदू विवाह में केवल विवाह पंजीकरण पर्याप्त नहीं है। अगर सात फेरे और आवश्यक पारंपरिक रस्में पूरी नहीं हुई हैं तो शादी वैध नहीं मानी जा सकती। कोर्ट ने विवाह को एक पवित्र संस्था बताते हुए परिवार अदालत का आदेश रद्द कर दिया।

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Gujarat High Court: validity of a Hindu marriage, not just registration but rituals are essential
गुजरात हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गुजरात हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि यदि शादी के दौरान सप्तपदी (सात फेरे) और अन्य पारंपरिक रीति-रिवाज और रस्में नहीं निभाई गई हैं तो केवल विवाह पंजीकरण के आधार पर उस शादी को वैध नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह टिप्पणी भी की कि विवाह केवल नाचने-गाने, खाने-पीने का अवसर या कोई व्यावसायिक सौदा नहीं, बल्कि यह एक पवित्र संस्था है।
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जस्टिस इलेश वोरा और जस्टिस आरटी वच्छानी की खंडपीठ ने अपने 23 जून के फैसले में कहा कि पारंपरिक रस्में भौगोलिक और सांस्कृतिक रूप से अलग-अलग हो सकती हैं। लेकिन माना जाता है कि वे एक व्यक्ति के आध्यात्मिक अस्तित्व को पवित्र और परिवर्तित करती हैं।
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यह फैसला ब्रिटेन में रहने वाले अनिवासी भारतीय कौशल सोनार की ओर से दायर याचिका पर आया, जिसमें परिवार अदालत के फैसले को चुनौती दी गई थी। परिवार अदालत ने शादी को अमान्य घोषित करने की मांग खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट ने परिवार अदालत के आदेश को रद्द कर दिया। 
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क्या था मामला?
अपीलकर्ता कौशल सोनार ने अदालत को बताया कि उन्हें इस कथित शादी के बारे में तब पता चला जब महिला ने उनके माता-पिता से संपर्क किया और खुद को वैध पत्नी बताते हुए विवाह प्रमाण पत्र सौंपा। सोनार का दावा था कि उन्होंने कभी महिला के साथ कोई शादी नहीं की, न ही कोई हिंदू रीति-रिवाज निभाए। उसने यह भी आरोप लगाया कि दस्तावेज पर उसके हस्ताक्षर धोखे से लिए गए थे।

हिंदू परंपरा पर कोर्ट की टिप्पणी
हाईकोर्ट ने कहा कि हिंदू परंपरा में पत्नी को पति की अर्धांगिनी माना जाता है, और साथ ही उसे अपनी पहचान के साथ एक व्यक्ति और विवाह में एक समान भागीदार के रूप में मान्यता दी जाती है।
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