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Gujarat: पिता ने नाबालिग बेटी से किया दुष्कर्म, गर्भपात की मांग पर हाईकोर्ट ने दिया मेडिकल जांच का निर्देश
Tue, 05 Sep 2023 03:46 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
Published by: नितिन गौतम
Updated Tue, 05 Sep 2023 03:46 PM IST
सार
याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस समीर दवे की पीठ ने वडोदरा के सर सयाजी राव गायकवाड़ जनरल अस्पताल के चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश दिया है कि चिकित्सकों का एक पैनल मेडिकल टर्मिनेशनल प्रेग्नेंसी एक्ट के तहत पीड़ित नाबालिग की मेडिकल जांच करे।
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गुजरात हाईकोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
गुजरात हाईकोर्ट ने वडोदरा के सरकारी अस्पताल के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वह 12 साल की बच्ची की मेडिकल जांच करें। बता दें कि आरोप है कि बच्ची के पिता ने ही उसके साथ दुष्कर्म किया। बच्ची की मां ने गर्भपात के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। जिस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने चिकित्सा अधिकारियों को बच्ची की मेडिकल जांच करने के निर्देश दिए हैं और रिपोर्ट मांगी है।
क्या है मामला
गुजरात के नर्मदा जिले में एक पिता पर ही अपनी 12 साल की बेटी से दुष्कर्म का आरोप लगा है। दुष्कर्म के बाद नाबालिग 28 हफ्ते की गर्भवती है। पीड़िता की मां ने गर्भपात के लिए गुजरात हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस समीर दवे की पीठ ने वडोदरा के सर सयाजी राव गायकवाड़ जनरल अस्पताल के चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश दिया है कि चिकित्सकों का एक पैनल मेडिकल टर्मिनेशनल प्रेग्नेंसी एक्ट के तहत पीड़ित नाबालिग की मेडिकल जांच करे और बुधवार तक अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट को सौंपे।
हाईकोर्ट ने स्थानीय पुलिस इंस्पेक्टर को पीड़िता को मेडिकल जांच के लिए अस्पताल ले जाने का निर्देश दिया है क्योंकि पीड़िता आदिवासी बहुल गांव में रहती है। पीड़िता के वकील ने इस मामले में आगे जल्द सुनवाई की मांग की है।
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स्वास्थ्य कर्मी के यौन शोषण के दोषी को तीन साल जेल की सजा
गुजरात के मेहसाणा की जिला अदालत ने कोरोना महामारी के दौरान स्वास्थ्य कर्मी का यौन शोषण करने के दोषी व्यक्ति को तीन साल जेल की सजा सुनाई है। विशेष जज सीएम पवार ने बीते हफ्ते कमलेश पटेल नामक व्यक्ति को आईपीसी के तहत यौन शोषण, एपिडेमिक डिजीज एक्ट, एससी एसटी प्रताड़ना रोकथाम कानून और आपदा प्रबंधन कानून के तहत का दोषी ठहराया था।
अतिरिक्त जन अभियोजक अशोक मकवाना ने दावा किया कि संभव है कि एपीडेमिक डिजीज कानून के तहत पहली बार किसी व्यक्ति को दोषी ठहराया गया है। खबर के अनुसार, मेहसाणा के बालोल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में काम करने वाली महिला कर्मचारी ने अप्रैल 2020 में शिकायत दर्ज कराई थी कि जब वह ड्यूटी के दौरान मरीजों को देखने जा रही थी तो आरोपी ने उसका यौन शोषण किया और उसका अपहरण करने की कोशिश की। पीड़िता के पिता और अन्य लोगों ने किसी तरह पीड़िता को बचाया। अब अदालत ने कमलेश पटेल को दोषी ठहराते हुए उस पर 5 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
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क्या है मामला
गुजरात के नर्मदा जिले में एक पिता पर ही अपनी 12 साल की बेटी से दुष्कर्म का आरोप लगा है। दुष्कर्म के बाद नाबालिग 28 हफ्ते की गर्भवती है। पीड़िता की मां ने गर्भपात के लिए गुजरात हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस समीर दवे की पीठ ने वडोदरा के सर सयाजी राव गायकवाड़ जनरल अस्पताल के चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश दिया है कि चिकित्सकों का एक पैनल मेडिकल टर्मिनेशनल प्रेग्नेंसी एक्ट के तहत पीड़ित नाबालिग की मेडिकल जांच करे और बुधवार तक अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट को सौंपे।
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हाईकोर्ट ने स्थानीय पुलिस इंस्पेक्टर को पीड़िता को मेडिकल जांच के लिए अस्पताल ले जाने का निर्देश दिया है क्योंकि पीड़िता आदिवासी बहुल गांव में रहती है। पीड़िता के वकील ने इस मामले में आगे जल्द सुनवाई की मांग की है।
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स्वास्थ्य कर्मी के यौन शोषण के दोषी को तीन साल जेल की सजा
गुजरात के मेहसाणा की जिला अदालत ने कोरोना महामारी के दौरान स्वास्थ्य कर्मी का यौन शोषण करने के दोषी व्यक्ति को तीन साल जेल की सजा सुनाई है। विशेष जज सीएम पवार ने बीते हफ्ते कमलेश पटेल नामक व्यक्ति को आईपीसी के तहत यौन शोषण, एपिडेमिक डिजीज एक्ट, एससी एसटी प्रताड़ना रोकथाम कानून और आपदा प्रबंधन कानून के तहत का दोषी ठहराया था।
अतिरिक्त जन अभियोजक अशोक मकवाना ने दावा किया कि संभव है कि एपीडेमिक डिजीज कानून के तहत पहली बार किसी व्यक्ति को दोषी ठहराया गया है। खबर के अनुसार, मेहसाणा के बालोल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में काम करने वाली महिला कर्मचारी ने अप्रैल 2020 में शिकायत दर्ज कराई थी कि जब वह ड्यूटी के दौरान मरीजों को देखने जा रही थी तो आरोपी ने उसका यौन शोषण किया और उसका अपहरण करने की कोशिश की। पीड़िता के पिता और अन्य लोगों ने किसी तरह पीड़िता को बचाया। अब अदालत ने कमलेश पटेल को दोषी ठहराते हुए उस पर 5 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।