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Uniform Civil Code: गुजरात चुनाव से पहले BJP का बड़ा दांव, समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए गठित होगी कमेटी
Sat, 29 Oct 2022 08:23 PM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
Published by: प्रांजुल श्रीवास्तव
Updated Sat, 29 Oct 2022 08:23 PM IST
सार
गौरतलब है कि इसी महीने की शुरुआत में केंद्र सरकार ने भी समान नागरिक संहिता लागू करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दिया था। इसमें कहा गया कि केंद्र सरकार संसद को समान नागरिक संहिता पर कोई कानून बनाने या उसे लागू करने का निर्देश नहीं दे सकता है।
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गुजरात सीएम भूपेंद्र पटेल
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
गुजरात चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी बड़ा दांव खेला है। गुजरात कैबिनेट की बैठक के बाद राज्य के गृह मंत्री हर्ष सांघवी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से प्रेरणा लेते हुए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कैबिनेट बैठक में ऐतिहासिक फैसला लिया है। राज्य में अब समान नागरिक संहिता को लागू करने के लिए एक कमेटी का गठन किया जाएगा।
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उन्होंने कहा कि चुनाव के लिए आदर्श आचार संहिता लागू होने से पहले समिति का गठन किया जाएगा। सांघवी ने कहा कि निर्णय संविधान के खंड-चार के अनुच्छेद 44 के प्रावधानों के अनुसार लिया गया था, जो राज्य सरकार से सभी नागरिकों के लिए समान कानून लागू करने की अपेक्षा करता है। सांघवी ने कहा, ‘‘यह मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल का ऐतिहासिक फैसला है। हमारी सरकार ने इस तरह की संहिता की आम लोगों के साथ-साथ भाजपा कार्यकर्ताओं की इच्छा का भी सम्मान किया है।’’
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केंद्रीय मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला ने कैबिनेट के इस फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि गुजरात में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के कार्यान्वयन के लिए समिति की अध्यक्षता उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश करेंगे और इसमें तीन से चार सदस्य होंगे। इस बैठक को भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व वाली कैबिनेट की आखिरी मुलाकात माना जा रहा है, क्योंकि राज्य चुनावों के कार्यक्रम की घोषणा अगले हफ्ते होने की उम्मीद है।
केंद्र सरकार ने इसी महीने दिया था सुप्रीम कोर्ट में जवाब
गौरतलब है कि इसी महीने की शुरुआत में केंद्र सरकार ने भी समान नागरिक संहिता लागू करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दिया था। इसमें कहा गया कि केंद्र सरकार संसद को समान नागरिक संहिता पर कोई कानून बनाने या उसे लागू करने का निर्देश नहीं दे सकता है। वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय की ओर से याचिका दाखिल की गई थी, जिसमें उत्तराधिकार, विरासत, गोद लेने, विवाह, तलाक, रखरखाव और गुजारा भत्ता को विनयमित करने वाले व्यक्तिगत कानूनों में एकरूपता की मांग की गई थी। केंद्र सरकार ने इसी याचिका के जवाब में हलफनामा दाखिल किया था।