गुजरात : इंजीनियरिंग कॉलेज दाखिले पर दे रहे मुफ्त लैपटॉप और बाइक, सालाना फीस महज 2500 रुपए
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अब तक आप सबने कपड़ों और दूसरी रोजमर्रा की जरूरतों के सामानों पर छूट का ऑफर सुना होगा। लेकिन अब कई इंजीनियरिंग कॉलेज बच्चों को अपने यहां दाखिला लेने के लिए कम फीस के साथ-साथ मुफ्त में बाइक और लैपटॉप का ऑफर दे रहे हैं। हजारों सीट खाली रह जाने और एआईसीटीई के कड़े मानदंडों के चलते प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेज अब छात्रों को एडमिशन लेने के लिए कई तरह के लुभावने ऑफर दे रहे हैं। ये कॉलेज छात्रों से महज 2,500 रुपये सालाना फीस लेकर दाखिला दे रहे हैं। इतना ही नहीं कुछ प्राइवेट कॉलेज तो मुफ्त लैपटॉप और दोपहिया वाहनों की भी पेशकश कर रहे हैं। लेकिन पिछले साल कर्मचारियों की काबिलियत का मूल्यांकन करने वाली एक कंपनी के अध्ययन में दावा किया गया था कि कि 95 फीसदी भारतीय इंजीनियर नौकरी के लायक नहीं हैं।
ऑल इंडियन काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) के आंकड़ों के मुताबिक, 2016-17 में देशभर में 3,291 इंजीनियरिंग कॉलेजों के 15.5 लाख इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों में से 50 फीसदी से ज्यादा सीटें खाली रहीं। 2015-16 में भी 14.76 लाख इंजीनियरिंग की आधी सीटें खाली रह गई थीं। अहमदाबाद मिरर की खबर के मुताबिक इस साल गुजरात के इंजीनियरिंग कॉलेजों में पहले चरण की प्रवेश प्रक्रिया के अंत में 55,422 में से 34,642 सीटें खाली रह गई हैं।
इस स्थिति से निपटने के लिए कॉलेज छात्रवृत्ति के नाम पर कम फीस के साथ-साथ पहले सेमेस्टर में पूरी फीस माफ करने का ऑफर दे रहे हैं। कई कॉलेज मुफ्त लैपटॉप, हॉस्टल और बस के किराये में 50 फीसदी की छूट का ऑफर दे रहे हैं। इतना ही नहीं चार साल की इंजीनियरिंग की पढ़ाई के अंत में जो छात्र एकमुश्त फीस जमा करेंगे उन्हें मुफ्त में बाइक का ऑफर दिया जा रहा है।
कई साल पहले इंजीनियिंरग की पढ़ाई शान समझी जाती थी लेकिन अब प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेजों की चमक तेजी से धूमिल होती जा रही है। पिछले साल कर्मचारियों की काबिलियत का मूल्यांकन करने वाली एक कंपनी के अध्ययन में दावा किया गया था कि 95 फीसदी भारतीय इंजीनियर नौकरी के लायक नहीं हैं।
उद्योग जगत के दिग्गजों ने भी युवा भारतीय इंजीनियर्स की क्वालिटी को लेकर चिंता जताई है। हाल ही में टेक महिंद्रा के सीईओ और प्रबंध निदेशक सीपी गुरनानी ने कहा था कि देश के 94 फीसदी बीटेक की पढ़ाई किये छात्र नौकरी के लायक नहीं हैं।
मणिपाल ग्लोबल एजुकेशन के चेयरमैन टीवी मोहनदास पाई ने भी दावा किया था कि देश में 10 करोड़ 21-35 आयु वर्ग युवाओं को बढ़िया ट्रेनिंग नहीं मिली है, एक तरह से वह प्रशिक्षित नहीं हैं। ये देश की अर्थव्यवस्था के खांचे में भी फिट बैठने लायक नहीं हैं।