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Gujarat Elections: गुजरात में कौन बिगाड़ेगा कांग्रेस का खेल, क्या इस गणित को ठीक करने में कामयाब होंगे राहुल?

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Tue, 15 Nov 2022 06:18 PM IST
सार

Gujarat Election: भाजपा नेता कहते हैं कि 2017 में 182 सीटों में से भाजपा को 99 और कांग्रेस के खाते में 77 सीटें आई थीं। उस वक्त भाजपा को 'पटेल' आंदोलन से जूझना पड़ रहा था। अब दो आंदोलनकारी नेता हार्दिक पटेल और अल्पेश ठाकोर भाजपा में हैं...

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Gujarat Election: Rahul Gandhi will hit Assembly poll campaign trail for Congress in Gujarat on November 22
Gujarat Election 2022: Congress - फोटो : ANI (File Photo)

विस्तार

गुजरात विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है। 2017 में राहुल गांधी ने यहां पर धुआंधार प्रचार किया था। इस बार वे 'भारत जोड़ो यात्रा' निकाल रहे हैं। हिमाचल प्रदेश के चुनाव प्रचार से भी राहुल गांधी दूर ही रहे। पार्टी सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस ने ग्रामीण गुजरात में लोगों से ठीक-ठाक संपर्क किया है। कांग्रेस को वहां अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद नजर आई थी, लेकिन 'आप' के बढ़ते जनाधार ने पार्टी को अपनी तय रणनीति में बदलाव लाने पर मजबूर कर दिया।

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भाजपा को हुआ दोहरा फायदा

2017 में 182 सीटों में से भाजपा को 99 और कांग्रेस के खाते में 77 सीटें आई थीं। उस वक्त भाजपा को 'पटेल' आंदोलन से जूझना पड़ रहा था। अब दो आंदोलनकारी नेता हार्दिक पटेल और अल्पेश ठाकोर भाजपा में हैं। भाजपा नेता कहते हैं कि हमें दोहरा फायदा हुआ है। आंदोलनकारी नेता अब हमारे पाले में हैं और दूसरा 'आम आदमी पार्टी' की सक्रियता। इसका नुकसान कांग्रेस पार्टी को पहुंच सकता है। यही वजह है कि यात्रा के बीच से गुजरात में राहुल गांधी की रैलियों का कार्यक्रम तय किया जा रहा है। सोनिया गांधी भी यहां पर कुछ जनसभाओं में आ सकती हैं।

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पिछले विधानसभा चुनाव से पहले गुजरात में पटेल आरक्षण आंदोलन शुरू हुआ था। उससे पार्टी को राजनीतिक नुकसान हुआ। नतीजा, विधानसभा चुनाव में भाजपा दो अंकों में सिमट गई। हालांकि भाजपा ने सरकार बनी ली। अल्पेश ठाकोर, जिसने 'ठाकोर सेना' के नाम से अपना एक बड़ा संगठन बनाया था, अब वे भी कमल के फूल के साथ हैं। गुजरात में उनका संगठन दस हजार से अधिक गांवों में फैला हुआ है। तीसरे आंदोलनकारी नेता जिग्नेश मेवानी थे, वे भी गत वर्ष कांग्रेस में शामिल हो गए थे। भाजपा को यह लग रहा था कि इस बार के चुनाव में उसकी टक्कर कांग्रेस से होगी। कुछ माह पहले तक किसी को यह अंदाजा नहीं था कि आम आदमी पार्टी वहां पर एकाएक इतनी ज्यादा सक्रिय हो जाएगी।

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आप से भाजपा को कोई नुकसान नहीं

भाजपा को कांग्रेस की जमीनी सक्रियता मालूम थी। कांग्रेस पार्टी, ग्रामीण इलाकों में पहुंच रही है, इस बात का अंदाजा खुद पीएम मोदी को रहा है। उन्होंने सार्वजनिक मंच से इसे लेकर इशारा भी किया था। हालांकि भाजपा अपने कैडर वोट बैंक के सहारे इस बात से निश्चिंत है कि आम आदमी पार्टी का उसे कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा। वह कांग्रेस पार्टी के वोट बैंक में ही सेंध लगाएगी। इससे पहले दिल्ली और पंजाब में देखें तो वहां 'आप' ने कांग्रेस को पूरी तरह साफ कर दिया है। गुजरात में लगभग 48 फीसदी वोट पिछड़े वर्ग के हैं। करीब 12 फीसदी पटेल हैं और गुजरात में 15 फीसदी आदिवासी आबादी है। पिछड़े वर्गों के अलावा आदिवासी इलाकों में कांग्रेस पार्टी का अच्छा प्रभाव रहा है। ये अलग बात है कि भाजपा ने यहां पर एक दांव चल दिया है। भाजपा ने आदिवासी समुदाय से आने वाली द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति बना दिया है। पार्टी नेताओं का मानना है कि इसका फायदा न केवल गुजरात में, बल्कि 2024 के लोकसभा चुनाव में भी मिल सकता है। भाजपा, विभिन्न मंचों से इस मुद्दे को भुना रही है।

कांग्रेस का 125 सीटें जीतने का टारगेट

गुजरात में पटेल आंदोलन का खत्म होना और इसके नेता का भाजपा में शामिल होना, ओबीसी समुदाय के लिए काम करने वाले नेता अल्पेश ठाकोर का भी भाजपा में आना और आम आदमी पार्टी की अति सक्रियता, ये सभी बातें कहीं न कहीं कांग्रेस पार्टी के खिलाफ जा रही हैं। गुजरात कांग्रेस प्रभारी रघु शर्मा ने गत दिनों कहा था राज्य में 52000 बूथों में हर बूथ पर 25 नए कार्यकर्ता तैयार किए जा रहे हैं। विधानसभा चुनाव में पार्टी का टारगेट 125 से अधिक सीटें जीतना है। चूंकि अब यह बात जोर पकड़ चुकी है कि गुजरात में 'आप' भले ही कुछ सीट न ले पाए, मगर शहरी क्षेत्र के वोटों में अच्छी खासी सेंध लगा सकती है। अगर ऐसा होता है तो इसका सीधा नुकसान कांग्रेस को पहुंचेगा।

इसके चलते चुनाव में पार्टी ने जो लक्ष्य निर्धारित किया है, वह दूर चला जाएगा। यही वजह है कि अब पार्टी ने राहुल गांधी की कुछ रैलियां कराने की योजना बनाई है। आने वाले 14 दिनों में करीब दो दर्जन बड़ी रैलियां होंगी। सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे इन्हीं रैलियों में पहुंचेंगे। पार्टी का फोकस अब आदिवासी, दलित, पिछड़ा वर्ग, पटेल और मुस्लिम समुदाय को साधना है। करीब 1.59 करोड़ लोगों तक राहुल गांधी के आठ वचनों वाला पत्र वितरित किया जा रहा है।

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