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Khambhalia Assembly Seat: यहां AAP के मुख्यमंत्री उम्मीदवार इसुदान गढ़वी हारे, जानें खंभालिया का चुनावी इतिहास
Sun, 01 Jan 2023 04:33 PM IST
शिवेंद्र तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
Published by: शिवेंद्र तिवारी
Updated Sun, 01 Jan 2023 04:33 PM IST
सार
Gujarat Election 2022: देवभूमि द्वारका जिले की खंभालिया विधानसभा सीट पर आम आदमी पार्टी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार इसुदान गढ़वी मैदान में थे। इस चुनाव के नतीजे की बात करें तो यहां भाजपा के मूलु भाई ने आप के इसुदान गढ़वी को 18,745 वोटों से हरा दिया।
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इसुदान गढ़वी की हार
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
गुजरात विधानसभा चुनाव के नतीजे आ चुके हैं। इस बार भारतीय जनता पार्टी ने नया रिकॉर्ड बना दिया है। 182 विधानसभा सीटों वाले गुजरात में भाजपा के 156 प्रत्याशी चुनाव जीत गए। कांग्रेस को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा। कांग्रेस 77 सीटों से सीधे 17 पर आ गई। मतलब कांग्रेस को 60 सीटों का नुकसान उठाना पड़ा। वहीं, इस बार सरकार बनाने का दावा करने वाली आम आदमी पार्टी के केवल पांच प्रत्याशी ही चुनाव जीत पाए। एक सीट पर सपा उम्मीदवार विजयी हुए तो बाकी तीन सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीतीं।
देवभूमि द्वारका जिले की खंभालिया विधानसभा सीट पर आम आदमी पार्टी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार इसुदान गढ़वी मैदान में थे। इस चुनाव के नतीजे की बात करें तो यहां भाजपा की ओर से उतरे मूलु भाई ने आप के इसुदान गढ़वी को 18,745 वोटों से हरा दिया। भाजपा उम्मीदवार को 77,834 वोट जबकि आप को यहां 59,089 वोट मिले। तीसरे नंबर कांग्रेस रही। इसके प्रत्याशी विक्रमभाई अरजणभाई मादम को 44.715 वोट मिले जो कुल वोट का 23.53 फीसदी रहा। मादम इससे पहले लगातार दो बार यहां पर कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज कर चुके थे। बसपा एवं AIMIM उम्मीदवारों समेत आठ उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई। वहीं, नोटा को 2.582 वोट मिले।
2017 में कांग्रेस को मिली थी जीत
खंभालिया सीट पर 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को जीत मिली थी। इस चुनाव में इस सीट से कांग्रेस ने विक्रमभाई अरजणभाई मादम को अपना उम्मीदवार बनाया था। उन्होंने भाजपा के कालूभाई चावड़ा को 11 हजार वोटों से हराया था। यहां कुल 20 उम्मीदवार मैदान में थे। इन दोनों के अलावा बाकी 18 उम्मीदवार की जमानत जब्त हो गई थी। इससे पहले 2014 के उपचुनाव में भी यहां कांग्रेस को जीत मिली थी।
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दरअसल, 2012 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर जीतीं पूनम मादम के 2014 में सांसद बनने के बाद इस सीट पर उप चुनाव की नौबत आई थी। इससे पहले 2007, 2002, 1998 और 1995 में भी यहां भाजपा को जीत मिली थी। कांग्रेस 1990 और 1962 में यहां जीत दर्ज करने में सफल रही थी। 1972, 1975, 1980 और 1985 में लगातार चार बार यहां से निर्दलीय हेमतभाई मादम जीते थे। हेमतभाई मादम की बेटी पूनम मादम यहां से 2012 में भाजपा के टिकट पर जीतीं। वहीं, 2014 और 2019 में पूनम जामनगर लोकसभा सीट से जीतीं।
बदलाव की मांग करते हुए आप में शामिल हुए थे गढ़वी
पत्रकार से नेता बने गढ़वी (40 वर्षीय) एक साल पहले जून 2021 में राजनीति में आए और राज्य में 27 साल के भाजपा शासन के बाद बदलाव की मांग करते हुए आप में शामिल हुए थे। उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया था। इस साल नवंबर में पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल द्वारा उन्हें मुख्यमंत्री उम्मीदवार के रूप में घोषित किया गया था।
आप के मुताबिक उसने लोगों से सोशल मीडिया, एसएमएस और ईमेल के जरिए मुख्यमंत्री के उम्मीदवार के बारे में अपनी राय देने को कहा था। सत्तर फीसदी से ज्यादा उत्तरदाताओं ने गढ़वी के पक्ष में अपनी राय व्यक्त की थी। हालांकि, इन सब के बावजूद इसुदान गढ़वी अपनी सीट पर कोई कमाल नहीं दिखा पाए और चुनाव में हार गए।
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देवभूमि द्वारका जिले की खंभालिया विधानसभा सीट पर आम आदमी पार्टी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार इसुदान गढ़वी मैदान में थे। इस चुनाव के नतीजे की बात करें तो यहां भाजपा की ओर से उतरे मूलु भाई ने आप के इसुदान गढ़वी को 18,745 वोटों से हरा दिया। भाजपा उम्मीदवार को 77,834 वोट जबकि आप को यहां 59,089 वोट मिले। तीसरे नंबर कांग्रेस रही। इसके प्रत्याशी विक्रमभाई अरजणभाई मादम को 44.715 वोट मिले जो कुल वोट का 23.53 फीसदी रहा। मादम इससे पहले लगातार दो बार यहां पर कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज कर चुके थे। बसपा एवं AIMIM उम्मीदवारों समेत आठ उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई। वहीं, नोटा को 2.582 वोट मिले।
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2017 में कांग्रेस को मिली थी जीत
खंभालिया सीट पर 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को जीत मिली थी। इस चुनाव में इस सीट से कांग्रेस ने विक्रमभाई अरजणभाई मादम को अपना उम्मीदवार बनाया था। उन्होंने भाजपा के कालूभाई चावड़ा को 11 हजार वोटों से हराया था। यहां कुल 20 उम्मीदवार मैदान में थे। इन दोनों के अलावा बाकी 18 उम्मीदवार की जमानत जब्त हो गई थी। इससे पहले 2014 के उपचुनाव में भी यहां कांग्रेस को जीत मिली थी।
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दरअसल, 2012 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर जीतीं पूनम मादम के 2014 में सांसद बनने के बाद इस सीट पर उप चुनाव की नौबत आई थी। इससे पहले 2007, 2002, 1998 और 1995 में भी यहां भाजपा को जीत मिली थी। कांग्रेस 1990 और 1962 में यहां जीत दर्ज करने में सफल रही थी। 1972, 1975, 1980 और 1985 में लगातार चार बार यहां से निर्दलीय हेमतभाई मादम जीते थे। हेमतभाई मादम की बेटी पूनम मादम यहां से 2012 में भाजपा के टिकट पर जीतीं। वहीं, 2014 और 2019 में पूनम जामनगर लोकसभा सीट से जीतीं।
बदलाव की मांग करते हुए आप में शामिल हुए थे गढ़वी
पत्रकार से नेता बने गढ़वी (40 वर्षीय) एक साल पहले जून 2021 में राजनीति में आए और राज्य में 27 साल के भाजपा शासन के बाद बदलाव की मांग करते हुए आप में शामिल हुए थे। उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया था। इस साल नवंबर में पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल द्वारा उन्हें मुख्यमंत्री उम्मीदवार के रूप में घोषित किया गया था।
आप के मुताबिक उसने लोगों से सोशल मीडिया, एसएमएस और ईमेल के जरिए मुख्यमंत्री के उम्मीदवार के बारे में अपनी राय देने को कहा था। सत्तर फीसदी से ज्यादा उत्तरदाताओं ने गढ़वी के पक्ष में अपनी राय व्यक्त की थी। हालांकि, इन सब के बावजूद इसुदान गढ़वी अपनी सीट पर कोई कमाल नहीं दिखा पाए और चुनाव में हार गए।