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गुजरात: विधानसभा ने पारित किए दो संशोधन विधेयक, कृषि विश्वविद्यालय का नाम बदला गया

Fri, 04 Mar 2022 09:28 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गांधी नगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गांधी नगर Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Fri, 04 Mar 2022 09:28 PM IST
सार

गुजरात विधानसभा ने शुक्रवार को दो संशोधन विधेयक पारित किए। गुजरात भूमि कब्जा (निषेध) अधिनियम 2020 और गुजरात जैविक कृषि विश्वविद्यालय अधिनियम 2017 में संशोधन किया गया है।

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Gujarat Assembly passes amendment bill connected to land grabbing and Gujarat Organic Agricultural University Act
गुजरात विधानसभा

विस्तार

गुजरात विधानसभा ने शुक्रवार को गुजरात भूमि कब्जा (निषेध) अधिनियम 2020 और गुजरात जैविक कृषि विश्वविद्यालय अधिनियम 2017 में संशोधन से संबंधित दो विधेयक पारित किए। दोनों संशोधन विधेयक कांग्रेस विधायकों की अनुपस्थिति में पारित किए गए। दरअसल, कांग्रेस विधायकों ने प्रश्नकाल के बाद वरिष्ठ विधायक पुंजा वंश के निलंबन को लेकर सदन से वॉकआउट कर गए थे।

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गुजरात भूमि निषेध संशोधन विधेयक-2022 को राज्य के राजस्व मंत्री राजेंद्र त्रिवेदी द्वारा पेश किया गया। इसमें कहा गया है कि मूल अधिनियम में 'भूमि' शब्द में वह भूमि शामिल नहीं होगी, जिसके संबंध में इस कानून के लागू होने की तिथि तक अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वनवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम 2006 के अनुदान के लिए आवेदन लंबित हैं। राजस्व मंत्री राजेंद्र त्रिवेदी ने कहा कि यह संशोधन आदिवासियों को भूमि हथियाने अधिनियम के तहत किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से बचाएगा, यदि उन्होंने अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम के तहत भूमि आवंटन के लिए पहले ही आवेदन कर दिया था।
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एक अन्य महत्वपूर्ण संशोधन प्रस्तावित भूमि कब्जा (निषेध) अधिनियम के तहत गठित विशेष अदालतों द्वारा जारी किए गए आदेशों के खिलाफ अपील के प्रावधान के बारे में भी था। मंत्री ने कहा अब पीड़ित व्यक्ति 30 दिनों के भीतर विशेष अदालत के आदेशों के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील दायर कर सकते हैं। ये वर्तमान अधिनियम में नहीं था।
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विधानसभा ने गुजरात जैविक कृषि विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक भी पारित किया है। इसमें गुजरात जैविक कृषि विश्वविद्यालय का नाम बदलकर गुजरात प्राकृतिक खेती और जैविक कृषि विश्वविद्यालय करने का प्रस्ताव है। 

कृषि मंत्री राघवजी पटेल ने गुजरात जैविक कृषि विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक पेश करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती का मतलब है रासायनिक मुक्त या पारंपरिक खेती के तरीके। केंद्र सरकार ने इस साल के बजट में भी प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की बात कही है। इसी क्रम में प्राकृतिक खेती के आंदोलन को बढ़ावा देने के लिए हमने विश्वविद्यालय का नाम बदलना और प्राकृतिक खेती को जोड़ना आवश्यक समझा। 


गौरतलब है कि गुजरात कार्बनिक कृषि विश्वविद्यालय 2017 में विधानसभा द्वारा एक विधेयक पारित करने के बाद अस्तित्व में आया था। वर्तमान में ये विवि आनंद शहर में आनंद कृषि विश्वविद्यालय परिसर से संचालित किया जा रहा है। मूल अधिनियम के अनुसार, प्रस्तावित विश्वविद्यालय का निर्माण गांधीनगर में होना था। पटेल ने कहा कि अब संशोधन के तहत पंचमहल जिले के हलोल तालुका में विश्वविद्यालय का स्थायी परिसर स्थापित किया जाएगा।

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