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Maharashtra: महाराष्ट्र में बढ़ रहा गुलियन बैरे सिंड्रोम का प्रकोप, अब तक 225 मामले सामने आए, 12 लोगों की मौत

Sat, 08 Mar 2025 11:13 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: बशु जैन Updated Sat, 08 Mar 2025 11:13 PM IST
सार

महाराष्ट्र में गुलियन बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) का प्रकोप बढ़ रहा है। राज्य में अब तक जीबीएस के 225 मामले सामने आए हैं। इसमे से 197 मामलों की पुष्टि हुई है। जबकि 28 संदिग्ध हैं। अधिकारी बताते हैं कि अब तक इस बीमारी से 12 लोग जान गवां चुके हैं। इसमें से छह लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। जबकि छह मौतें संदिग्ध हैं।

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Guillain Barre Syndrome is increasing in Maharashtra, 225 cases have been reported, 12 people have died
गिलियन बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) - फोटो : stock

विस्तार

महाराष्ट्र में गुलियन बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) का प्रकोप बढ़ रहा है। राज्य में अब तक जीबीएस के 225 मामले सामने आए हैं। इसमे से 197 मामलों की पुष्टि हुई है। जबकि 28 संदिग्ध हैं। अधिकारी बताते हैं कि अब तक इस बीमारी से 12 लोग जान गवां चुके हैं। इसमें से छह लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। जबकि छह मौतें संदिग्ध हैं। अफसरों ने बताया कि 179 मरीज ठीक हो चुके हैं और उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। वहीं 24 लोग गहन देखभाल में हैं। 15 को वेंटीलेटर सपोर्ट पर रखा गया है। 

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जीबीएस एक दुर्लभ और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी बीमारी है। स्वाइन फ्लू की तरह इस बीमारी के लक्षण होते हैं, जिसमें सर्दी, जुकाम और जेलस बुखार आता है। इसके कारण मांसपेशियों में कमजोरी आ जाती है और शरीर के अंग सुन्न पड़ जाते हैं। महाराष्ट्र में इसके मामले बढ़ रहे हैं। राज्य में इस बीमारी के मामले पुणे नगर निगम, पिंपरी चिंचवाड़ नगर निगम, पुणे ग्रामीण और अन्य जिलों से सामने आए हैं। इसे लेकर स्वास्थ्य अधिकारी स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। यहां चिकित्सा सुविधाओं को अलर्ट मोड पर रखा गया है। 
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अफसरों ने बताया कि जीबीएस को देखते हुए सरकार ने निगरानी बढ़ा दी है। प्रभावित रोगियों के उपचार और संसाधन सुनिश्चित करने के लिए अस्पतालों के साथ समन्वय किया जा रहा है। स्थिति का आकलन करने के लिए एक राज्य-स्तरीय टीम को तुरंत प्रभावित क्षेत्रों में भेजा गया।
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पुणे नगर निगम (PMC) और पुणे ग्रामीण के अधिकारियों को निगरानी गतिविधियों को मजबूत करने का निर्देश दिया गया है। शहर के विभिन्न हिस्सों से 7,262 पानी के नमूने रासायनिक और जैविक विश्लेषण के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशाला में भेजे गए हैं। इसमें से अब तक 144 जल स्रोत दूषित पाए गए। इस पर कार्रवाई की गई है। सरकार ने निजी चिकित्सकों से भी अपील की है कि वे समय पर संबंधित सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारियों को किसी भी संदिग्ध जीबीएस मामले की सूचना दें। 

कई क्षेत्रों में घर-घर निगरानी की जा रही है। इसमें 89,699 घर शामिल हैं। वहीं एंटीगैंग्लियोसाइड एंटीबॉडी परीक्षण के लिए बंगलूरु में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य और तंत्रिका विज्ञान संस्थान (NIMHANS) को 82 सीरम नमूने भेजे गए हैं। वहीं राज्य के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसमें नागरिकों से संक्रमण के जोखिम को कम करने के लिए निवारक उपाय करने और स्वच्छता बनाए रखने का आग्रह किया गया है।


अधिकारियों ने लोगों को सलाह दी है कि वे केवल उबला हुआ पानी पीकर और ताजा, स्वच्छ भोजन खाकर पानी की गुणवत्ता सुनिश्चित करें। स्वास्थ्य जोखिमों को कम करने के लिए, लोगों को बासी या आंशिक रूप से पका हुआ भोजन, विशेष रूप से चिकन और मटन न खाएं।  स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है और लोगों से घबराने की जरूरत नहीं है। जीबीएस के लक्षण वाले किसी भी व्यक्ति को बिना देरी किए सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा सहायता लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

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