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जीएसटी दर के 18 फीसदी से ऊपर रहने के आसार
शिशिर चौरसिया, नई दिल्ली
Updated Tue, 30 Aug 2016 05:43 AM IST
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वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली में कर की दर के 18 फीसदी से ऊपर जाने की संभावना है क्योंकि राज्य सरकारें चाहतीं है कि कर की दर 20 फीसदी से भी ऊपर रहे जबकि उद्योग जगत इससे कम दर की मांग कर रहा है। राज्य और केंद्र सरकार के अधिकारियों का कहना है कि 20 फीसदी एक ऐसा दर है जिसपर आम सहमति बन सकती है। हालांकि दर पर अंतिम निर्णय जीएसटी काउंसिल का ही होगा।
केंद्रीय वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि जीएसटी को लागू करने पर सभी राज्य इसलिए सहमत हुए हैं, क्योंकि उन्हें केेंद्र ने रेवेन्यू न्यूट्रल रेट (आरएनआर) का आश्वासन दिया है। यदि जीएसटी की दर बहुत कम रखी जाती है, जैसा कि उद्योग जगत चाहते हैं, तो राज्यों के साथ-साथ केंद्र को भी कर वसूली में नुकसान होगा। इसका खामियाजा अंतत: केंद्र सरकार को ही भुगतना होगा, क्योंकि केंद्र सरकार ने जीएसटी लागू होने के बाद पांच साल तक राज्यों के राजस्व में कमी होने पर शत प्रतिशत भरपाई का आश्वासन दिया है। इससे राजकोषीय घाटा भी बढ़ेगा। इसलिए बेहतर हो कि जीएसटी की दर 20 फीसदी के करीब हो। लेकिन एक सरकारी अधिकारी का कहना है कि यदि जीएसटी को 20 फीसदी तक सीमित किया गया तो सरकार को घाटा होगा।
पिछले दिनों अमर उजाला से बातचीत में केंद्रीय राजस्व सचिव हसमुख अढिया ने बताया था कि जीएसटी प्रणाली में केंद्र और राज्यों के 30 से भी अधिक कर समाहित होंगे। इस समय अधिकतर कमोडिटी पर केंद्र और राज्य सरकारों का कुल कर 30 फीसदी से भी ऊपर बैठ रहा है। जब जीएसटी लागू होगा तो इसमें उल्लेखनीय कमी आएगी। उद्योग संगठन सीआईआई ने पिछले दिनों कहा था कि खाने-पीने की जिन वस्तुओं पर अभी तक राज्यों में वैट से छूट है, उस पर जीएसटी में भी छूट बरकरार रहनी चाहिए। इसके साथ ही 10 रुपये मूल्य तक की पैकिंग को भी जीएसटी से मुक्त किया जाए। संगठन ने महंगाई भड़कने की दुहाई देकर ऐसा करने की सिफारिश की है।
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जीएसटी दर क्या हो, इसे तय करने का अधिकार जीएसटी काउंसिल को होगा। इसमें केंद्र और राज्य, दोनों की भागीदारी होगी, लेकिन जिस तरह से काउंसिल का खाका खींचा गया है, उसमें केंद्र सरकार का पलड़ा ज्यादा भारी होगा। उल्लेखनीय है कि मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम के नेतृत्व में बने पैनल ने जीएसटी रेट 17 से 19 फीसदी के बीच रखने की सिफारिश की है। पैनल ने आरएनआर 15-15.5 फीसदी और स्टैंडर्ड रेट 17-19 फीसदी के बीच आंकी है। सुब्रमण्यम ने कहा है कि 18-19 फीसदी से ज्यादा स्टैंडर्ड रेट महंगाई बढ़ाएगी।
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केंद्रीय वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि जीएसटी को लागू करने पर सभी राज्य इसलिए सहमत हुए हैं, क्योंकि उन्हें केेंद्र ने रेवेन्यू न्यूट्रल रेट (आरएनआर) का आश्वासन दिया है। यदि जीएसटी की दर बहुत कम रखी जाती है, जैसा कि उद्योग जगत चाहते हैं, तो राज्यों के साथ-साथ केंद्र को भी कर वसूली में नुकसान होगा। इसका खामियाजा अंतत: केंद्र सरकार को ही भुगतना होगा, क्योंकि केंद्र सरकार ने जीएसटी लागू होने के बाद पांच साल तक राज्यों के राजस्व में कमी होने पर शत प्रतिशत भरपाई का आश्वासन दिया है। इससे राजकोषीय घाटा भी बढ़ेगा। इसलिए बेहतर हो कि जीएसटी की दर 20 फीसदी के करीब हो। लेकिन एक सरकारी अधिकारी का कहना है कि यदि जीएसटी को 20 फीसदी तक सीमित किया गया तो सरकार को घाटा होगा।
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पिछले दिनों अमर उजाला से बातचीत में केंद्रीय राजस्व सचिव हसमुख अढिया ने बताया था कि जीएसटी प्रणाली में केंद्र और राज्यों के 30 से भी अधिक कर समाहित होंगे। इस समय अधिकतर कमोडिटी पर केंद्र और राज्य सरकारों का कुल कर 30 फीसदी से भी ऊपर बैठ रहा है। जब जीएसटी लागू होगा तो इसमें उल्लेखनीय कमी आएगी। उद्योग संगठन सीआईआई ने पिछले दिनों कहा था कि खाने-पीने की जिन वस्तुओं पर अभी तक राज्यों में वैट से छूट है, उस पर जीएसटी में भी छूट बरकरार रहनी चाहिए। इसके साथ ही 10 रुपये मूल्य तक की पैकिंग को भी जीएसटी से मुक्त किया जाए। संगठन ने महंगाई भड़कने की दुहाई देकर ऐसा करने की सिफारिश की है।
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जीएसटी दर क्या हो, इसे तय करने का अधिकार जीएसटी काउंसिल को होगा। इसमें केंद्र और राज्य, दोनों की भागीदारी होगी, लेकिन जिस तरह से काउंसिल का खाका खींचा गया है, उसमें केंद्र सरकार का पलड़ा ज्यादा भारी होगा। उल्लेखनीय है कि मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम के नेतृत्व में बने पैनल ने जीएसटी रेट 17 से 19 फीसदी के बीच रखने की सिफारिश की है। पैनल ने आरएनआर 15-15.5 फीसदी और स्टैंडर्ड रेट 17-19 फीसदी के बीच आंकी है। सुब्रमण्यम ने कहा है कि 18-19 फीसदी से ज्यादा स्टैंडर्ड रेट महंगाई बढ़ाएगी।
जीएसटी से उपभोक्ता वस्तु होगी सस्ती, बढ़ेगा रोजगार : सीबीईसी
जीएसटी
वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के लाभ गिनाते हुए सोमवार को राजस्व विभाग ने कहा कि इससे उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतें घटेगी, देश में खपत बढ़ेगी और इसकी वजह से आर्थिक गतिविधि के बढ़ने के कारण रोजगार बढ़ेगी। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीईसी) ने एक अखबार में एक विज्ञापन जारी कर कहा कि जीएसटी से भारत के लिए एक एकीकृत साझा राष्ट्रीय बाजार का निर्माण होगा और इससे विदेशी निवेश तथा मेक इन इंडिया अभियान को गति मिलेगी। जीएसटी से अर्थव्यवस्था को होने वाले लाभ के प्रति आम लोगों में जागरूकता बढ़ाने की कोशिश करते हुए सीबीईसी ने कहा कि अधिकतर छोटे रिटेलरों को दी जाने वाली छूट के कारण कई उत्पाद सस्ते हो जाएंगे। इसके अलावा नई कर व्यवस्था से देश में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी, जिसके कारण रोजगार के अधिक अवसर पैदा होंगे।
पूरे देश में एक समान अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था जीएसटी को लागू करने के लिए संविधान संशोधन विधेयक इस महीने के शुरू में संसद में पारित हो चुका है। इसके लागू होने से केंद्रीय उत्पाद शुल्क, सेवा कर, बिक्री कर और वैट सहित केंद्र और राज्यों के दर्जनभर से अधिक शुल्क समाप्त हो जाएंगे और उसकी जगह जीएसटी ले लेगा। इसके कारण देशभर में माल परिवहन की बाधाएं समाप्त हो जाएंगी। एक ही वस्तु पर बार-बार कर नहीं लगेगा। जीएसटी के तहत किसी भी वस्तु पर कर खपत के लिए खरीदे जाते समय लगेगा।
सीबीईसी ने कहा कि जीएसटी से करों का एकीकरण हो जाएगा, विकास को बल मिलेगा, एक साझा राष्ट्रीय बाजार का निर्माण होगा और नियमों के अनुपालन में सुविधा होगी। व्यापार और उद्योग को होने वाले लाभ के बारे में बताते हुए सीबीईसी ने कहा कि इससे असेसी की अनुपालन लागत घटेगी, क्योंकि उन्हें अनेक प्रकार के करों के लिए अनेक कागजात सुरक्षित नहीं रखने पड़ेंगे।
पूरे देश में एक समान अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था जीएसटी को लागू करने के लिए संविधान संशोधन विधेयक इस महीने के शुरू में संसद में पारित हो चुका है। इसके लागू होने से केंद्रीय उत्पाद शुल्क, सेवा कर, बिक्री कर और वैट सहित केंद्र और राज्यों के दर्जनभर से अधिक शुल्क समाप्त हो जाएंगे और उसकी जगह जीएसटी ले लेगा। इसके कारण देशभर में माल परिवहन की बाधाएं समाप्त हो जाएंगी। एक ही वस्तु पर बार-बार कर नहीं लगेगा। जीएसटी के तहत किसी भी वस्तु पर कर खपत के लिए खरीदे जाते समय लगेगा।
सीबीईसी ने कहा कि जीएसटी से करों का एकीकरण हो जाएगा, विकास को बल मिलेगा, एक साझा राष्ट्रीय बाजार का निर्माण होगा और नियमों के अनुपालन में सुविधा होगी। व्यापार और उद्योग को होने वाले लाभ के बारे में बताते हुए सीबीईसी ने कहा कि इससे असेसी की अनुपालन लागत घटेगी, क्योंकि उन्हें अनेक प्रकार के करों के लिए अनेक कागजात सुरक्षित नहीं रखने पड़ेंगे।